aapne baat

  • Jun 2 2017 12:47PM

विकास को संजोता हिंदी पाक्षिक

मानसून इस बार अच्छा रहेगा. इस तरह की भविष्यवाणी मौसम विभाग कर रहा है. इधर, खरीफ की तैयारियां शुरू हो गयी है. कृषि विभाग ने खरीफ फसल का लक्ष्य तय करना शुरू कर दिया है. मौसम विभाग के मुताबिक, 10 जून तक मानसून झारखंड पहुंच जायेगा. राज्य में खरीफ की तैयारी सरकार क्या और किस तरह से कर रही है? किसान सरकार से क्या और किस तरह की मदद चाहते हैं? क्या सरकार जो योजनाएं किसानों के लिए बनाती है, वह धरातल में उतर पाते हैं. क्या किसानों को खरीफ के समय बंटने वाले बीज या खाद मिलता है. अगर, नहीं मिलता है, तो वह कहां चला जाता है. इससे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार खरीफ के लिए योजनाएं बनाती हैं. मुफ्त में बीज व खाद मुहैया कराने की घोषणा करती है, तो वो कौन-सी ताकतें हैं, जो किसानों का हक मार लेती है. किसानों को बाजार के भरोसे रहना पड़ता है. ये बहुत ही अहम सवाल है. 
 
पंचायतनामा ने इस अंक में प्रगतिशील किसान बालक महतो से बातचीत की. उनसे यह जानने की कोशिश की है कि सचमुच सरकार की योजनाएं किसानों तक पहुंच रही है या नहीं. कहां परेशानी आती है. बालक महतो के शब्दों में कहें, तो सरकारी बीज किसानों के बीच बंटने के लिए आता तो है, लेकिन रोपनी होने के बाद. खाद मिलती तो है, लेकिन फसल को जब जरूरत होती है, तब नहीं मिलती है. इस कारण मजबूरी में ब्लैक में खाद खरीदनी पड़ती है. इधर, सरकार की ओर से खरीफ सीजन शुरू होते ही विज्ञापनों का दौर शुरू हो जाता है. विज्ञापनों में बताया जाता है कि सरकार किसानों को कितना बीज दे रही है. क्या-क्या सुविधा दे रही है. कृषि जागृति रथ चल रहा है. हर सरकार-हर कदम पर यह बताती है कि वह किसानों के लिए काम कर रही है. किसानों के लिए योजनाएं बना रही है. इसके बावजूद किसानों की हालत खराब है. किसानों का दुखड़ा सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है. 
 
पंचायतनामा ने इस अंक में सरकार की योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाने की कोशिश की है. किसानों को बताया है कि उनका क्या हक है. खरीफ सीजन में उन्हें क्या-क्या चीजें सरकार मुफ्त में उपलब्ध कराती है. उन्हें यह हक हर हाल में लेना है. अगर हक नहीं मिलता है, तो हक मारने वालों के खिलाफ आवाज बुलंद करनी है. अब समय आ गया है, जब किसानों को खुद आगे आना होगा. पहले उन्हें सरकार की योजनाओं की जानकारी लेनी होगी. फिर उन योजनाओं के लिए दावा करना पड़ेगा. नहीं तो हर बार की तरह उनका हक मारा जायेगा. 
पंचायतनामा का यह अंक आपको कैसा लगा, हमें जरूर बताइएगा. हमें आप ई-मेल, मोबाइल, व्हाट्सअप पर भी अपनी प्रतिक्रिया या सुझाव भेज सकते हैं. आप मोबाइलवाणी के नंबर पर भी मिस्ड कॉल करके अपनी समस्या, सुझाव या अपनी कोई भी सार्वजनिक समस्याओं से संबंधित जानकारी रिकार्ड करा सकते हैं. हमें आपके सुझाव का इंतजार रहेगा.
 
नमस्कार,
संजय मिश्र
ई-मेल : panchayatnama@prabhatkhabar.in
फोन नंबर : 0651-3053131
व्हाट्सएप नंबर : 97714 75678