aapne baat

  • May 10 2017 1:13PM

अपनी बात

पंचायती राज पर पंचायतनामा का यह खास अंक आपके हाथों में है. बहुत ही खास मकसद से पंचायतनामा ने पंचायती राज व्यवस्था से क्या बदला है, पंचायतों को कैसे अधिकार मिले हैं, अच्छे पंचायत प्रतिनिधि तमाम परेशानियों के बावजूद कैसे अपने गांव-पंचायत का विकास करा रहे हैं. सच्चे उदाहरण के साथ पंचायतनामा इन सवालों के जवाब आप तक पहुंचाने की कोशिश इस अंक में कर रहा है.

24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपने राज्य के भी पंचायतों और जिला परिषदों को पुरस्कृत किया गया है. पुरस्कार पानेवाले पंचायती राज प्रतिनिधियों को बधाई. हमें इन पुरस्कृत पंचायतों व जिला परिषद से सीखने की कोशिश करनी चाहिए कि पंचायती राज व्यवस्था से गांवों व पंचायतों का विकास कैसे हो सकता है. कैसे बहुत ही छोटी कोशिश से, बगैर किसी सरकारी फंड के सामूहिक प्रयास से गांवों और पंचायतों की तसवीर बदल सकती है. झारखंड में पंचायती राज व्यवस्था ने बहुत कुछ बदला है. इसके बावजूद लोगों में पंचायती राज व्यवस्था के प्रति विश्वास नहीं बन पाया है. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि आज भी पंचायतों में ग्रामसभा के आयोजन को लेकर गंभीरता न तो पंचायती राज प्रतिनिधियों में है और न ही पंचायत के लोगों में. आज भी झारखंड की 50 प्रतिशत से अधिक पंचायतों में ग्रामसभाओं का आयोजन नहीं होता. अगर पंचायतों में ग्रामसभा का आयोजन होता है, तो उसमें पारित प्रस्ताव पर अधिकारी समय पर काम नहीं होने देते. इस तरह पंचायती राज को अविश्वसनीय बनाने में अधिकारियों की भूमिका ज्यादा है. अधिकारियों की पूरी कोशिश होती है कि ग्रामसभा का आयोजन केवल दिखावे के लिए हो. ग्रामसभा को लेकर पंचायती राज प्रतिनिधियों का भाव भी उदासीन ही रहता है. इस तरह पंचायती राज के प्रति ग्रामीणों में अविश्वास का भाव गहराता जाता है.

पंचायती राज के बाद क्या बदला? इस सवाल का जवाब आपको राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में मिलेगा. नक्सली घटनाओं में कमी के साथ आदिवासियों, दलितों व महिलाओं का बहुत बड़ा वर्ग, जो विकास की मुख्यधारा से अलग था, आज वह मुख्यधारा से जुड़ रहा है. जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र और कई दूसरे प्रकार के प्रमाण पत्रों को बनाने की प्रक्रिया आसान हुई है. साथ ही बहुत सारी सरकारी योजनाओं का लाभ भी लोगों तक पहुंचने लगा है. लेकिन, यह भी उतना ही सच है कि पंचायती राज व्यवस्था को अभी लंबी दूरी तय करनी है. यह दूरी तभी आसानी से तय हो सकती है, जब व्यवस्था के प्रति आम लोगों में विश्वास पैदा होगा.

इस अंक में पुरस्कृत पंचायतों में कैसे बदलाव हुआ है, इसे आपके सामने रखने की कोशिश हमने की है. चतरा जिला परिषद ने योजना बना कर राजस्व जुटाने का काम कैसे किया है, कैसे बुंडू पंचायत ने सफाई टैक्स लगा कर पूरे गांव को स्वच्छ बनाया है. इसे हमारी टीम ने जानने की कोशिश की है, ताकि इनका अनुकरण कर और इनके जैसे नये प्रयासों से अपनी-अपनी पंचायतों और अपने-अपने जिले में विकास कार्य को बढ़ावा दे सकें.

आपको यह अंक कैसा लगा, हमें जरूर बताइयेगा. आप हमसे टेलीफोन, मोबाइल, ई-मेल और व्हाट्सएप पर संपर्क कर सकते हैं.

नमस्कार,

संजय मिश्र

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