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  • Feb 4 2020 12:44PM

दाग धाेने की चुनाैती

दाग धाेने की चुनाैती

अनुज कमार सिन्हा 

हाल ही में एक खबर आयी है. धनबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर है. झारखंड का कहते ताे संताेष भी हाे सकता था. लेकिन देश का सबसे प्रदूषित शहर हाेना एक दाग ही ताे है. सिर्फ धनबाद की ही बात नहीं है, झारखंड के कई इलाके भी धीरे-धीरे प्रदूषण के मामले में फंसते जा रहे हैं. चिंता की बात इसलिए भी है क्याेंकि झारखंड जंगलाें से भरा प्रदेश रहा है. उसके बावजूद ऐसे हालात बने हैं. संताेष की बात यह है कि जहां देश के कई राज्याें में जंगल घट रहे हैं, वहां झारखंड में हाल में जंगल बढ़ा है. अब झारखंड का 29.62फीसदी हिस्सा जंगलाें से भरा है. धनबाद की स्थिति काेई आज से खराब नहीं है. काेल कैपिटल के रूप में धनबाद काे जाना जाता है. राज्य की आय का प्रमुख साधन है, लेकिन काेयले के खनन आैर ढुलाई के कारण वहां प्रदूषण खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है. धनबाद में मात्र 10.47 फीसदी जंगल बचा है.

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जामताड़ा आैर देवघर में जंगल की स्थिति आैर खराब है. इसलिए धनबाद के लिए चुनाैती ताे है. एक ताे काेयले का प्रदूषण, दूसरा कम जंगल आैर तीसरा धनबाद शहर में वाहनाें की बढ़ती संख्या. अगर धनबाद या उन जैसे शहराें पर लगे दाग काे धाेना है, ताे यह काम असंभव भी नहीं है. लेकिन इसके लिए सरकारी आैर गैर-सरकारी दाेनाें तरह के प्रयास करने हाेंगे. हर हाल में जंगल बढ़ाने हाेंगे. पेड़-पाैधे लगाने हाेंगे. बिहार ने इस पर अभियान छेड़ दिया है. धनबाद जैसे शहर में भी इस क्षेत्र में गहन प्रयास करना हाेगा.

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धनबाद शहर में संपन्नता है आैर यह दिखती भी है. लाेगाें के पास क्रय क्षमता है. यही कारण है कि वहां वाहनाें की संख्या अच्छी खासी है. ये वाहन कम से कम प्रदूषण फैलायें, इसका कड़ाई से पालन करना हाेगा. आबादी अच्छी खासी है. प्रति वर्ग किलाेमीटर सबसे ज्यादा व्यक्ति (यानी घनत्व) अगर किसी शहर में हैं, ताे वह धनबाद ही है. यानी शहर पर अतिरिक्त दबाव है. अब समय आ गया है इस प्रदूषण पर काबू पाने का. आसान काम नहीं है यह लेकिन असंभव भी नहीं है. अगर थाेड़ा प्रयास किया जाये ताे इसे काबू में लाया जा सकता है.

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शहर में डंपराें आैर ट्रकाें से काेयले की ढुलाई खुले में नहीं हाेनी चाहिए. काेयले या काेल डस्ट की ढुलाई के वक्त उसे ढंक दिया जाये ताे ये डस्ट उड़ेंगे नहीं, रास्ते पर बिखरेंगे नहीं. अगर बिखरेंगे ताे उनकी मात्रा कम हाेगी. सड़काें पर पानी का छिड़काव कर इसे आैर कम किया जा सकता है. लगातार सफाई भी इसका समाधान है. जिन जिन कारणाें से धनबाद प्रदूषण के जानलेवा संकट से जूझ रहा है, उस पर याेजनाबद्ध तरीके से काम करने पर इस समस्या से निबटा जा सकता है. अन्य शहराें के लिए भी ऐसा ही प्रयास अगर हाेगा, ताे सुधार हाेगा ही. यह एक चुनाैती है. दिल्ली की घटना से सबक नहीं लेने पर धनबाद की स्थिति आैर खराब हाेगी. याद कीजिए, दिल्ली में प्रदूषण के कारण स्कूल तक बंद करने पड़े थे. सड़क पर चलना मुश्किल था. वह स्थिति न आये, इसलिए गंभीर प्रयास सभी काे करना हाेगा.