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  • Apr 2 2019 12:37PM

पाला बदलते नेता

पाला बदलते नेता

अनुज कुमार सिन्हा

चुनाव का वक्त है. हर तरह की घटनाएं घट रही हैं. किसी काे टिकट मिल रहा है, किसी का टिकट कट रहा है. टिकट मिला ताे चेहरा खिला, टिकट कटा ताे उदासी या आक्राेश. आज नेता इस दल में है, कल माैका मिला, अवसर दिखा ताे दूसरे दल में. यानी हर दल का आनंद ले रहे हैं. काेई यह दावा नहीं कर सकता कि यह नेता पाला नहीं बदल सकता, दूसरे दलाें में नहीं जा सकता. यह समय तय करता है, परिस्थिति तय करती है. ऐसी काेई बाध्यता भी नहीं है कि आप एक दल में हैं, ताे दूसरे दल में नहीं जा सकते. इसलिए सिर्फ नेताआें काे दाेषी भी नहीं माना जा सकता. नेताआें के पाला बदलने से जनता-मतदाता जरूर असमंजस में पड़ जाते हैं.

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राजनीति समझना हर किसी के वश में नहीं है. दलाें की अपनी नीतियां हाेती हैं, कुछ मामलाें में गुटबाजी भी कर सकते हैं, अपनी रणनीति हाेती है आैर उसी के अनुसार दूसरे दलाें से ताेड़ कर अपने दल में लाने की काेशिश हाेती है. इसके पीछे सबसे प्रमुख कारण है कि राजनीतिक दल हर हाल में चुनाव जीतना चाहते हैं. इसी में कई बार ऐसे लाेगाें की लॉटरी खुल जाती है, जिसका पहले राजनीति से काेई लेना-देना नहीं हाेता. ऐसे लाेगाें में फिल्मी दुनिया, खेल की दुनिया की संख्या ज्यादा हाेती है. सेलेब्रिटी काे उतारने या चुनाव प्रचार में उतारने की परंपरा बहुत पुरानी है. ऐसे लाेग राजनीति में कुछ समय के लिए आते हैं आैर सारा खेल बिगाड़ देते हैं. जाे कार्यकर्ता सालाें से मेहनत कर अपनी जगह बनाते हैं, जब टिकट लेने का वक्त आता है, ताे वे सिर्फ इसलिए पीछे छूट जाते हैं, क्याेंकि काेई सेलेब्रिटी उनका हिस्सा मार ले जाता है. अब ये बहस का विषय है कि ऐसे लाेगाें के राजनीति में आने से क्या राजनीति का भला हाेता है? कुछ अपवाद हाे सकते हैं, लेकिन अधिकांश मामलाें में निराशा ही हाथ लगती है. ऐसा किसी एक दल में नहीं हाेता, लगभग हर दल की यही कहानी है.

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जहां तक झारखंड की बात है, एक दल छाेड़ कर दूसरे में शामिल हाेने की अनेक घटनाएं घट चुकी हैं. जयपाल सिंह झारखंड पार्टी के बड़े ताकतवर नेता थे. पूरी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था. चार बार राजद से विधायक (पार्टी छाेड़ने के वक्त राज्य की अध्यक्ष) अन्नपूर्णा देवी भाजपा में चली गयी. दाे बार झामुमाे से सांसद रहे शैलेंद्र महताे भाजपा में गये. बाद में उसे भी छाेड़ दिया. स्टीफन मरांडी, अर्जुन मुंडा, विद्युत महताे, हेमलाल मुर्मू आदि नेता झारखंड मुक्ति माेरचा के स्कूल के ही थे, लेकिन इनमें से तीन भाजपा में आ गये. स्टीफन खुद जेवीएम आैर कांग्रेस में भी गये थे.

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कांग्रेस के दिग्गज नेता सुबाेधकांत जनता दल, सजपा, झामुमाे हाेते हुए कांग्रेस में आये. भरे पड़े हैं ऐसे नाम. आनेवाले दिनाें में ऐसे आैर नाम सामने आयेंगे. यह राजनीति का हिस्सा है. टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय या दूसरे दलाें से चुनाव लड़ने की भी घटनाएं घटती रही हैं. ऐसा इसलिए क्याेंकि लाेगाें की अपेक्षाएं बढ़ी हैं. ऐसी घटनाआें के बावजूद अगर सांसद-विधायक या अन्य नेता जनता की सेवा में ईमानदारी से लगे रहते हैं, ताे उन्हें जनता का स्नेह आैर सम्मान मिलता ही है.