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  • Aug 16 2019 12:50PM

मानसून : खतरनाक संकेत

मानसून : खतरनाक संकेत

अनुज कुमार सिन्हा

इस साल फिर झारखंड में मानसून विलंब से आया. विलंब से आने के बाद भी अगर नियमित ताैर पर बारिश हाे जाती, ताे उतनी चिंता की बात नहीं थी. देश के कई हिस्से बारिश से परेशान हैं, बाढ़ ने तबाही मचायी है आैर इसके विपरीत झारखंड पानी के लिए तरस रहा है. किसान अासमान की आेर टकटकी लगाये हुए हैं. अभी हालात यह है कि झारखंड में छिटपुट बारिश हाे रही है, जाे धान की खेती के लिए पर्याप्त नहीं है. झारखंड के कई हिस्साें में अभी तक नहीं के बराबर बारिश हुई है. किसान परेशान, कैसे करेंगे राेपनी. एेसी बात नहीं है कि स्थिति बिल्कुल बिगड़ गयी है. गत वर्ष भी विलंब से बारिश हुई थी. इसलिए अभी भी थाेड़ी उम्मीद बची है. सरकार ने भी 15 अगस्त तक का समय मांगा है, ताकि सही आंकलन हाे सके. इस बात के संकेत ताे मिल रहे हैं कि झारखंड के कई जिले सूखे की आेर बढ़ रहे हैं. अगर थाेड़ा आशावादी बने आैर यह उम्मीद कर लें कि आनेवाले दिनाें में बारिश हाे जायेगी, इसके बावजूद किसानाें का संकट कम नहीं हाेनेवाला. वर्षा में विलंब से खेती काे पहले ही नुकसान हाे चुुका है. उत्पादन उतना नहीं हाेगा, जितना समय पर बारिश हाेने से हाेता. इसकी भरपाई कैसे हाेगी. किसान लाचार हैं. उनके पास विकल्प नहीं है. खेताें में बिचड़े सूखने भी लगे हैं. उन्हें बचाने के काेई उपाय भी नहीं है. अगर देखा जाये, ताे आज भी झारखंड में बहुत कम

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खेताें के लिए सिंचाई की व्यवस्था है. पंजाब-हरियाणा जैसे राज्याें में अगर बारिश कम भी हाे या विलंब से हाे, ताे किसानाें के पास ऐसी व्यवस्था है जिससे उनका काम चल जाता है. फसल पर उतना असर नहीं पड़ता. झारखंड में ऐसी स्थिति नहीं है. कई बड़ी परियाेजना अधूरी पड़ी है. उनके पूरा हाेने पर नहराें के माध्यम से खेताें तक पानी पहुंच सकता था. अब समय आ गया है कि विकल्प तैयार किया जाये, जिससे किसानाें काे राहत मिल सके. पूरे सरकारी तंत्र काे सक्रिय हाेना पड़ेगा. यह बताना पड़ेगा कि किसानाें काे अभी करना क्या है? देर से वर्षा हाेने पर धान की काैन सी वेराइटी लगायें ताकि अधिक से अधिक उत्पादन हाे सके. हालात अगर नहीं सुधरे, ताे किसान राेजी-राेटी की तलाश में पलायन कर सकते हैं. इस समस्या का स्थायी हल खाेजना हाेगा, ताकि किसानाें काे इतना पानी मिल जाये, जिससे काम के लायक वे फसल उगा सकें. वर्षा नहीं हाेने से न सिर्फ खेती पर असर पड़ रहा है, बल्कि पीने के पानी का खतरा भी मंडरा रहा है. राज्य के डैमाें में पानी जमा नहीं हाे पा रहा है. जलस्तर पहले ही नीचे जा चुका है. बरसात के माैसम में डैमाें-तालाबाें में जाे पानी जमा हाेता है, वह बड़ा सहारा हाेता है. वर्षा नहीं हाेने से सबसे बड़ा सवाल यह हाेगा कि पीने का पानी (सप्लाइ वाटर) कहां से आयेगा? बाेरिंग पहले ही फेल हाे चुके हैं. इसलिए बेहतर है कि वर्षा के दाैरान अधिक से अधिक पानी काे अपने क्षेत्र में राेकने का उपाय खाेजा जाये.