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  • Nov 25 2019 12:42PM

भगवान बिरसा की याद

भगवान बिरसा की याद

अनुज कुमार सिन्हा 

बिरसा मुंडा काे आदिवासी समाज ने भगवान का दर्जा दिया है. सिर्फ आदिवासी समाज में ही नहीं, बल्कि पूरा देश भगवान बिरसा मुंडा काे पूजनीय मानता है, उनका सम्मान करता है. बिरसा मुंडा का संघर्ष, शाेषण आैर अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए आज भी राह दिखाता है. बिरसा मुंडा की मृत्यु 9 जून, 1900 काे रांची जेल में हुई थी. बड़ी घटना थी. देश तब गुलाम था आैर तब बिरसा मुंडा के याेगदान काे लगभग भुला दिया गया था. तब के समाचार पत्राें ने बिरसा मुंडा काे वह जगह नहीं दी थी जिसके वे हकदार थे. तब के इतिहासकाराें ने भी उनके साथ अन्याय किया था. बीच-बीच में यदा-कदा बिरसा मुंडा के संघर्ष का जिक्र हाे जाया करता था, लेकिन 1939 के बाद से आदिवासी समाज के हर आंदाेलन में बिरसा मुंडा काे प्रमुखता दी जाने लगी. 20, 21 आैर 22 जनवरी, 1939 काे रांची में आदिवासी सभा की दूसरी महासभा का आयाेजन किया गया था. डेढ़ लाख लाेग इसमें शामिल थे.

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यह वह अवसर था जब जयपाल सिंह ने पहली बार आदिवासी सभा की कमान संभाली थी. उस सम्मेलन में जाे नारे लगे थे, वे थे- महात्मा बिरसा की जय, छाेटानागपुर की जय, आदिवासी महासभा की जय आैर जयपाल सिंह की जय. कह सकते हैं कि अगर उस समय भगवान बिरसा काे याद नहीं किया जाता, ताे शायद बिरसा मुंडा इतिहास के पन्नाें से गायब हाे जाते. लेकिन, इस सम्मेलन के बाद बिरसा मुंडा के संघर्ष, उनके याेगदान काे मान्यता मिली थी. यही कारण था कि अगले वर्ष यानी 1940 में जब रामगढ़ में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था, बिरसा मुंडा के नाम पर द्वार का नाम रखा गया था. यह बिरसा मुंडा के प्रति सम्मान का सूचक था.

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अलग झारखंड के लिए संघर्ष चला. उस दाैरान आैर अन्य अवसराें पर भी बिरसा मुंडा याद किये जाते रहे. खास कर अलग झारखंड बनने के बाद ताे तेजी से यह काम आगे बढ़ा. बिरसा मुंडा एकमात्र आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी हैं, जिनका चित्र संसद में लगा है. अब दाे बड़े काम हाे रहे हैं आैर ये दाेनाें काम जब पूरे हाे जायेंगे, ताे लाेग बिरसा मुंडा काे आैर बेहतर तरीके से जान पायेंगे. खास कर आज की पीढ़ी. रांची की जिस पुरानी जेल में बिरसा मुंडा का निधन हुआ था, उसे विकसित किया जा रहा है. बड़ी प्रतिमा लग रही है. बड़ा पार्क बन कर तैयार है. जेल का जीर्णाेद्धार हाे चुका है. बिरसा मुंडा से जुड़ी यादाें काे प्रदर्शित करने की याेजना है. इसके साथ बुंडू में बिरसा मुंडा की 150 फीट ऊंची प्रतिमा बन रही है.

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यह देश की बिरसा मुंडा की सबसे ऊंची प्रतिमा हाेगी. जब ये दाेनाें काम पूरे हाे जायेंगे, ताे बड़े आकर्षण के केंद्र हाेंगे. श्रद्धा के साथ-साथ पर्यटन के दृष्टिकाेण से भी इन प्रतिमाआें का बड़ा महत्व हाेगा. वैसे बिरसा मुंडा से जुड़े ऐतिहासिक स्थलाें (जन्म स्थान उलिहातू, समाधि स्थल काेकर, रांची) आदि काे पहले से ही विकसित किया जा रहा है. अब ताे रांची जेल या बुंडू में बननेवाली प्रतिमा काे भी देखने के लिए लाेग दूर-दूर से आयेंगे. बिरसा मुंडा के याेगदान आैर आदिवासी संघर्ष काे बेहतर तरीके से समझ पायेंगे.