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  • May 20 2019 12:20PM

स्वच्छता : एक असरदार आंदाेलन

स्वच्छता : एक असरदार आंदाेलन

अनुज कुमार सिन्हा

सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने महात्मा गांधी के जन्मदिन दाे अक्तूबर काे जब स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी, ताे ऐसा नहीं लगा था कि यह आंदाेलन सफल हाेगा या इतना असरदार हाेगा. उस समय इसे एक सामान्य पहल माना गया था. लगभग साढ़े चार साल बीत गये हैं आैर आंकड़े बताते हैं कि कैसे इस अभियान का पूरे देश में गहरा असर हुआ है. एेसी बात नहीं है कि स्वच्छता पर पहली बार बात हुई है. लेकिन, पहले आैर आज के अभियान में बड़ा फर्क है. इस बार जनमानस काे जाेड़ने आैर इसका लाभ बताने में सरकार सफल रही है. यह बताने में सफल रही है कि स्वच्छता क्याें हर व्यक्ति आैर हर परिवार के लिए आवश्यक है. इसका सीधा संबंध स्वास्थ्य से है. केंद्र की यह वह याेजना है, जिसने बड़ा बदलाव लाया है.

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पूरे देश में 9.8 कराेड़ शाैचालय बनाये गये हैं. झारखंड में यह आंकड़ा 35 लाख है. यह काेई मामूली आंकड़ा नहीं है. इस पर बड़ी राशि खर्च की गयी है. अगर झारखंड की बात करें, ताे 35 लाख शाैचालय बनाना आसान नहीं था. अब झारखंड में 29,564 गांव आेडीएफ गांव बन गये हैं. सभी 24 जिले आेडीएफ घाेषित किये जा चुके हैं. ऐसा इसलिए संभव हाे सका, क्याेंकि सारा फाेकस इस अभियान पर था. हाे सकता है कि अभी भी इसमें कुछ कमियां हाें. शिकायतें हाें. शाैचालय के पैसाें का भुगतान करने में कुछ अधिकारियाें ने पैसा खाया हाे, लेकिन इसके बावजूद यह काम ताे हुआ है, शाैचालय ताे बना है, इससे काेई इनकार नहीं कर सकता.

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गांवाें का दाैरा करें, ये शाैचालय अब दिखते हैं. पहले थे ही नहीं कि दिखते. ठीक है कई इलाकाें में बेहतरीन शाैचालय बने हैं, ताे कुछ में खानापूर्ति की गयी है. लेकिन, काम के लायक बन चुका है. इस अभियान की सफलता के पीछे इसकी कड़ी मानिटरिंग है. राेज ऑनलाइन इसकी मॉनिटरिंग हाेती है. अब आम आदमी भी यह जानता है कि जहां-तहां शाैच करने से बीमारी काे आमंत्रित करना है. इसलिए उसने सहयाेग किया आैर परिणाम सामने है. इसका सीधा संबंध इज्जत आैर सुरक्षा से भी है. घर में शाैचालय नहीं हाेने का सबसे बुरा असर ताे महिलाआें पर पड़ता था. वे शाैच जाने के लिए सूरज के डूबने का इंतजार करती थी. अंधेरे में जाने पर कई बार महिलाआें के साथ अप्रिय घटना भी घटती थी. इन सब चीजाें से अब राहत मिली है. हां, यह भी सच है कि कुछ गांव भले ही आेडीएफ घाेषित कर दिये गये, लेकिन वहां अभी भी कुछ लाेग शाैच के लिए बाहर जाते हैं. इन्हें ठीक करना हाेगा.

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स्वच्छता अभियान में सिर्फ शाैचालय ही नहीं आता. पूरे इलाके की सफाई भी इसी का हिस्सा है. बस्तियाें में शाैचालय बन जाये आैर सफाई न हाे, कूड़े सड़ते रहें, ताे इस अभियान का बहुत लाभ नहीं मिलेगा. स्वच्छता पर खुद गांधीजी (महात्मा गांधी) बहुत ध्यान देते थे. 1934 में जब उन्हाेंने रांची का दाैरा किया था, हरिजन बस्ती में गये थे, हरिजन स्कूल में गये थे आैर वहां शिक्षकाें काे हिदायत दी थी कि कैसे सफाई की जाये. गांधीजी ने शिक्षकाें काे यहां तक कहा था कि सफाई से ही बच्चाें की पढ़ाई आरंभ की जाये. ऐसे प्रयासाें का भी फल दिखा. अब ताे इस अभियान ने जिंदगी ही बदल दी है.