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  • Oct 3 2019 12:36PM

गांधी काे समझना हाेगा

गांधी काे समझना हाेगा

अनुज कुमार सिन्हा

 पूरी दुनिया महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ मनाने में जुटी है. यह सही माैका है जब देश-दुनिया गांधी, उनके मूल आदर्श, उनकी नीति, उनके सिद्धांत काे समझे. दुनिया काे गांधी ने सत्य, अहिंसा आैर शांति का जाे संदेश दिया है, आज उसकी सबसे ज्यादा जरूरत महसूस हाे रही है. न सिर्फ भारत काे बल्कि पूरी दुनिया काे. गांधी का महत्व कितना है या आज गांधी कितने प्रासंगिक हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के कई विश्वविद्यालयाें में गांधी काे काेर्स में शामिल किया गया है, उन पर रिसर्च हाे रहे हैं. गांधी के दर्शन काे हर व्यक्ति खास कर युवा पीढ़ी तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनाैती है. गांधी के जन्म के डेढ़ साै साल पूरे हाेने पर हम सभी के सामने गांधी काे समझने का एक अवसर आया है आैर इसका भरपूर उपयाेग किया जाना चाहिए. ऐसे ताे गांधी ने देश-दुनिया काे बहुत सारे रास्ते सुझाये हैं, जिन पर अब काम हाे रहा है. सभी काे अपनाना अगर किसी के लिए संभव नहीं भी हाे, ताे उनमें से कुछ बाताें काे अपने जीवन में उतार लेने से बड़ा बदलाव दिख सकता है

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जब दुनिया में युद्ध हाे रहे थे, हिंसा का माहाैल था, तब गांधी ने अहिंसा का मार्ग अपना कर नया संदेश दिया था. अब अपवाद काे छाेड़ दें, ताे लगभग पूरी दुनिया उसी शांति के रास्ते पर चलना चाहती है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसी अहिंसा की चर्चा हाेती है. निष्कर्ष निकलता है कि बातचीत से ही किसी समस्या का समाधान निकल सकता है, युद्ध से नहीं. गांधी का मार्ग भी ताे यही ही है. स्वच्छता का पूरा देश में लंबा अभियान चल रहा है. इसकी बुनियाद गांधीजी की ही रखी हुई है. गांधीजी ने पूरे देश का दाैरा कर लाेगाें के मन काे समझा था आैर रास्ता भी बताया था. इसी क्रम में वे झारखंड क्षेत्र भी आये थे. आदिवासियाें से मुलाकात के दाैरान उनकी जीवन शैली, सरलता से काफी प्रभावित हुए थे. उसी दाैरान उन्हाेंने मजदूराें से भी मुलाकात की थी. सब कुछ समझने के बाद गांधीजी ने सलाह दी थी कि लाेग शराब आैर नशे से दूर रहे. इसके सेवन से पूरा परिवार तबाह हाे जाता है. काश, गांधीजी के सलाह काे लाेग पूरे ताैर पर मान लिये हाेते आैर नशा से दूर हाेते, शराब नहीं पीते.

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अब भी माैका है. कई गांवाें-शहराें में महिलाएं शराब के खिलाफ अभियान चला रही हैं. ऐसे अभियान काे गांधीजी की 150वीं वर्षगांठ से जाेड़ कर आैर सघन करना चाहिए. सामाजिक बुराई काे दूर किये बगैर समाज का भला नहीं हाे सकता. खादी की बात ताे बहुत हाेती है, लेकिन गंभीर प्रयास नहीं हाेते. सरकार बच्चाें काे मुफ्त में पाेशाक देती है. अगर यह तय हाे जाये कि सरकार की आेर से जाे पाेशाक छात्राें काे दी जाती है, उसमें खादी काे प्रमुखता दी जाये. अन्य स्कूलाें में भी बच्चे कम से कम एक दिन खादी के कपड़े पहने. अब खादी भी पहले जैसी नहीं रही. उसमें भी बड़े बदलाव हुए हैं. आकर्षक भी है. एक समय था जब खादी के कपड़े माेटे हाेते थे. अब तकनीक के जरिए खादी के भी सुंदर से सुंदर पाेशाक बन रही है. इन्हेें बढ़ावा देने का वक्त है. हम सब इतना ही तय कर लें कि अपने घराें काे, आसपास के क्षेत्र काे साफ रखेंगे, सप्ताह में एक दिन खादी का प्रयाेग करेंगे, नशा से दूर रहेंगे, अहिंसा का मार्ग अपनायेंगे, प्रकृति से छेड़छाड़ नहीं करेंगे, ताे आधी समस्या का निदान ताे हाे ही जायेगा. ऐसा कर ही हम सही अर्थाें में गांधी काे याद कर सकते हैं.