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  • Oct 25 2019 4:01PM

भाग्य पलटेगा चक्रधरपुर का

भाग्य पलटेगा चक्रधरपुर का

अनुज कुमार सिन्हा 

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने वादा किया है कि उनकी पार्टी की सरकार बनते ही फरवरी में चक्रधरपुर काे जिला बना दिया जायेगा. चक्रधरपुर आैर उसके आसपास के लाेगाें के लिए यह बड़ी घाेषणा है. लंबे समय से चक्रधरपुर उपेक्षित रहा है. जिला बनने के बाद न सिर्फ चक्रधरपुर काे फायदा हाेगा, बल्कि आसपास के इलाके साेनुवा, गाेइलकेरा, मनाेहरपुर, बंदगांव, अानंदपुर आैर गुदड़ी जैसे इलाकाें काे भी लाभ हाेगा. अभी यह पश्चिमी सिंहभूम के अधीन आता है. एक समय था जब सिंहभूम एक जिला हुआ करता था. बड़ा जिला था, जिसके अधीन जमशेदपुर भी आता था. हर काम के लिए जमशेदपुर के लाेगाें काे जिला मुख्यालय चाईबासा जाना पड़ता था.

जिले काे बांट कर पहले पूर्वी आैर पश्चिम सिंहभूम किया गया. बाद में पश्चिम सिंहभूम का एक आैर बंटवारा हुआ, जिसके बाद सरायकेला-खरसावां जिला बनाया. तब राज्य के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा थे. राज्य बनने के पहले आैर बाद में काेल्हान चर्चा में रहा है. झारखंड आंदाेलन के दाैरान सिंहभूम में अनेक गाेलीकांड हुए. जाेरदार आंदाेलन हुआ. वहां के लाेगाेें ने झारखंड के लिए लंबी लड़ाई लड़ी, कुर्बानी दी. इसलिए जब झारखंड बन गया, ताे काेल्हान काे प्रमंडल बनाया गया, मेडिकल कॉलेज बना. खनिज बहुल यह क्षेत्र उग्रवाद प्रभावित रहा है.

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दुनिया का प्रसिद्ध जंगल सारंडा इसी काेल्हान में आता है. अब अगर चक्रधरपुर जिला बनता है, ताे यहां के विकास की गति तेज हाे सकती है. घने जंगलाें, घाटियाें आैर पहाड़ियाें से भरे इस प्रस्तावित जिले में पर्यटन की अपार संभावना है. चक्रधरपुर आैर बंदगांव के बीच के प्राकृतिक साैंदर्य की तारीफ महात्मा गांधी ने तब की थी जब वे चाईबासा से रांची आ रहे थे. यह सत्य है कि इतने सुंदर क्षेत्र में पर्यटन का विकास नहीं हाे पाया है. नये आैर छाेटे जिले बनने से याेजनाआें के कार्यान्वयन में मदद मिलेगी, ऐसी उम्मीद है. साल के जंगलाें से यह क्षेत्र भरा पड़ा है. यहां इकाे टूरिज्म की संभावना है.

यहां के वन उत्पाद पर आधारित कई छाेटे-छाेटे उद्याेग लग सकते हैं. मनाेहरपुर के इलाके में लाैह अयस्क प्रचुर मात्रा में हैं. स्टील प्लांट की याेजना कई सालाें से बन रही है. इसमें काेई दाे राय नहीं कि अगर चक्रधरपुर जिला बना आैर सरकार ने इस पर फाेकस किया, ताे यहां के लाेगाें काे राेजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा. अब यह क्षेत्र उतना अशांत भी नहीं है, जितना कुछ साल पहले हुआ करता था. उग्रवाद का असर घटा है. चक्रधरपुर बहुत पुराना शहर है. रेलवे के कारण यह पहले से देश के बड़े हिस्से से जुड़ा हुआ है.

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हावड़ा-मुंबई मेन लाइन पर बसे इस शहर काे एक रेलवे पुल के लिए कई सालाें तक तरसना पड़ा था. अब स्थिति बदली है. चक्रधरपुर के जिला बनाने की घाेषणा का असर पड़ेगा. संभव है घाटशिला से भी ऐसी ही मांग उठे. लंबे समय से घाटशिला काे भी जिला बनाने की मांग हाेती रही है. घाटशिला अभी पूर्वी सिंहभूम के अधीन अनुमंडल है. हाे सकता है आगामी विधानसभा चुनाव में चक्रधरपुर आैर घाटशिला काे जिला बनाने का ही मुद्दा काेल्हान में छाया रहे. जाे भी हाे, चक्रधरपुर काे जिला बनने से पूरे क्षेत्र काे लाभ हाेगा, यह तय है.