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  • Jul 4 2019 11:38AM

पाैधा लगाएं, पानी भी राेकें

पाैधा लगाएं, पानी भी राेकें

अनुज कुमार सिन्हा

बरसात का माैसम अा गया है लेकिन गरमी कम नहीं हुई है. चाहे शहर हाे या गांव, समस्याएं एक जैसी हैं. इस बार जितनी गरमी पड़ी, हाल के वर्षाें में वैसी गरमी नहीं पड़ी थी. यह इस बात का सबूत है कि जलवायु परिवर्तन का क्या असर पड़ रहा है. सिर्फ गरमी ही नहीं पड़ी, बल्कि पानी का संकट भी गहराया. गांवाें में वे तालाब आैर कुएं भी सूख गये, जाे कभी सूखते नहीं थे. चापाकल ने काम करना बंद कर दिया. अगर रांची शहर की बात करें, ताे यहां 30 हजार से ज्यादा बाेरिंग बेकार हाे गये. यह सब इसलिए हुआ, क्याेंकि जलस्तर तेजी से नीचे चला गया. अब सही समय है जब लाेग इस पर गंभीर हाें.

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झारखंड में अभी भी लगभग 28 फीसदी जंगल है, उसके बावजूद यह हालात हैं. साेचिए, अगर जंगल कम हाे जाये ताे कैसा हाेगा जीवन? जंगल कट भी रहे हैं. शहराें से ताे पेड़ साफ कर दिये गये हैं आैर यह सब तेजी से हुआ है पांच-छह साल में. सड़कें चाैड़ी हुई हैं. फाेरलेन सड़कें बन गयीं आैर इसके लिए पुराने-पुराने बड़े-बड़े पेड़ काट दिये गये. यह सिलसिला जारी है. यह हर काेई जानता है कि अगर सड़कें चाैड़ी हाेंगी, ताे पेड़ कटेंगे ही. लेकिन, पेड़ लगाना ताे भी पड़ेगा. पेड़ कट जा रहे हैं आैर सड़काें के किनारे पेड़ लगाये नहीं जा रहे हैं. असर तब दिखता है जब हाइवे से गरमी के माैसम में आप यात्रा करते हैं.

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पुराने दिनाें काे याद कीजिए. सड़क किनारे बड़े-बड़े पेड़ हाेते थे, जिससे गरमी का अहसास नहीं हाेता था. शहराें में बड़े-बड़े अपार्टमेंट बन गये हैं आैर अधिकांश जमीन पक्का कर दी गयी हैं. वर्षा का पानी जमीन में जा नहीं पा रहा है. इसे समझने की जरूरत है. लाेग चेत जायें. जहां माैका मिले, पेड़ लगायें, ताकि गरमी से भी राहत मिले. साथ ही पानी का लेयर भी बचा रहे. खास ताैर पर हाइवे के किनारे पेड़ लगाना सबसे जरूरी है. सरकार यह काम करे या नहीं करे, जिस गांव से ये हाइवे गुजर रहा है, वहां के लाेग जनसेवा के तहत यह काम करें. यह पेड़ उस गांव काे भी जीवन देगा. हर साल कागजाें पर एनजीआे के माध्यम से लाखाें पेड़ लगते हैं, मर जाते हैं. वैसा पेड़ नहीं चाहिए. जब गांव के लाेग, आसपास के लाेग खुद पेड़ लगायेंगे ताे उन पेड़ाें से उनका जुड़ाव हाेगा, उनकी संवेदना जुड़ी हाेगी. वे ज्यादा देखभाल करेंगे. इसी फार्मूले पर पेड़ लगें.

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पेड़ लगाकर ताे देखिए. जैसे-जैसे पेड़ बड़ा हाेगा, छाया देना शुरू करेगा, अगर पेड़ फलदार है आैर जब वह फल देगा, पेड़ लगानेवाले काे संतुष्टि मिलेगी, खुशी मिलेगी. अभी यह बेहतर समय है. हर वह स्थान तलाशिये जहां आप बारिश के पानी काे राेक पायें. छाेटी नदी, नाले में बाेरा बांध बना कर भी पानी काे राेक सकते हैं. यह पानी बरसात के बाद आपके ही काम आयेगा. ताे आइए, संकल्प लें कि हर हाल में इस साल कम से कम एक पेड़ लगायेंगे. आपके पास जगह नहीं हाे, ताे किसी सार्वजनिक स्थान पर लगायें. साथ ही वर्षा के पानी काे बह कर जाने से राेकने का भी उपाय करें. यही सबके हित में हाेगा.