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  • Sep 2 2019 3:26PM

गांधी के अनन्य भक्त टानाभगत

गांधी के अनन्य भक्त टानाभगत

अनुज कुमार सिन्हा

देश महात्मा गांधी के जन्म की 150वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है. दुनिया के हालात काे देखें, ताे यही समझ में आता है कि बड़ी से बड़ी समस्याआें का निदान गांधी विचाराें-संदेशाें में छिपा है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण है अहिंसा के रास्ते, सत्य के रास्ते. जरूरत है ताे इसे समझने की, गांधी काे पढ़ने की. पूरा देश गांधीमय हाेनेवाला है. युवा पीढ़ी के लिए भी गांधी काे पढ़ने-समझने का एक अवसर आनेवाला है. यह उनके लिए आवश्यक है भी. जब गांधी आैर झारखंड की बात उठती है, ताे टाना भगताें का नाम सबसे पहले आता है. गांधीजी ने 1917 से 1940 के बीच कई बार झारखंड क्षेत्र का दाैरा किया. हर दाैरे में गांधीजी ने कुछ न कुछ बड़ा संदेश दिया. इसी दाैरान गांधीजी के विचाराें से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए टाना भगत. ये टाना भगत वास्तव में गांधीजी के अनन्य भक्त रहे हैं. रांची, लाेहरदगा, गुमला इनका मूल निवास रहा है. गांधीजी के विचाराें आैर उनके आह्वान के बाद ये टाना भगत देश की आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे. तिरंगा लेकर गांधी टाेपी पहन कर ये आंदाेलन करते थे. इन्हाेंने अंगरेजाें काे जमीन का टैक्स देना बंद कर दिया था. इनकी जमीनें जब्त कर ली गयी थी. देश के आजाद हाेने के बाद इनकी जमीन वापस करने का काम आरंभ हुआ. इसके बावजूद इनकी समस्याएं पूरे ताैर पर सुलझ नहीं पायी. आज भी ये टाना भगत गांधी के सपनाें काे साकार करने में लगे हुए हैं.

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रघुवर दास की सरकार ने इनकी जमीन की रजिस्ट्री का शुल्क भी माफ कर दिया था. इनकी समस्याआें काे सुलझाने आैर इन्हें सुविधा देने का आदेश भी दिया. इसके बावजूद कई ऐसे टाना भगत हैं, जाे परेशानी में जी रहे हैं. सरकार से इन्हें उम्मीदे हैं. जतरा टाना भगत (अब स्व) टाना भगताें के बड़े नेता थे. आजादी की लड़ाई में नेतृत्व करते थे. लेकिन, आज स्थिति यह है कि उन्हें सरकार ने जाे जमीन दी थी, उस पर किसी ने कब्जा कर रखा है. उनके वंशजाें काे राेजगार की तलाश में दूसरे राज्य में जाना पड़ रहा है. हरिवंश टाना भगत की साइकिल काे भी उनके वंशजाें ने मजबूर हाेकर बेच दिया. इसे अफसराें की लापरवाही ही कहिए कि सरकार की याेजना का लाभ भी हरिवंश टाना भगत के वंशजाें काे नहीं मिल पाया है, जबकि सरकार सभी गरीबाें के लिए एक से बढ़ कर एक याेजना लायी है. इन्हें ठीक करना हाेगा. जब पूरा देश गांधी काे याद कर रहा हाेगा, उस समय गांधी के सच्चे अनुयायी टाना भगताें के कल्याण पर भी ध्यान देना हाेगा, उन्हेें उनका हक देना हाेगा. इन टाना भगताें काे देख कर ही पहचाना जा सकता है. रामगढ़, गया आैर काेलकाता के कांग्रेस अधिवेशन में ये टाना भगत रांची, गुमला आैर लाेहरदगा के आसपास से पैदल ही चले जाते थे. देश की आजादी में इन टाना भगताें का बड़ा याेगदान रहा है. इनके साथ खड़ा हाेना हर व्यक्ति का दायित्व है.