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  • Feb 18 2020 2:11PM

खतरनाक कीटनाशक

खतरनाक कीटनाशक

अनुज कुमार सिन्हा 

रासायनिक खाद आैर खतरनाक कीटनाशकाें के कारण हर साल लाखाें लाेगाें की जान जा रही है. किसान पैदावार बढ़ाने के लिए इनका उपयाेग कर रहे हैं आैर इसका खामियाजा भी भुगत रहे हैं. यह काेई आज का मामला नहीं है. एक समय था जब देश अनाज उत्पादन में पिछड़ रहा था आैर उसे अनाज के लिए विदेशाें पर निर्भर रहना पड़ता था. उत्पादन बढ़ाने के लिए आैर कृृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हाेने के प्रयास में सत्तर के दशक में हरित क्रांति हुई. इससे अनाज का उत्पादन ताे बढ़ गया, लेकिन इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी. उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक खाद आैर कीटनाशकाें का प्रयाेग भारी मात्रा में किया गया. पंजाब ताे इस पूरे अभियान में सबसे आगे रहा. इसलिए आज जाे दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं, उसमें सबसे ज्यादा प्रभावित काेई राज्य है, ताे वह है पंजाब. कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियाें काे अगर तेजी से पैर पसारने का माैका मिला है, ताे इसका बड़ा कारण अनाज आैर सब्जियाें की खेती के दाैरान किया गया रासायनिक खाद आैर कीटनाशक का प्रयाेग है. किसान उत्पादन बढ़ाने के चक्कर में इसके दुष्परिणाम काे भूल गये. अब चेतने का वक्त है. ऐसी बात नहीं है कि इसका काेई विकल्प नहीं है. विकल्प है जैविक खेती, लेकिन इसे भी वैसे ही जुनून-समर्पण से लेना हाेगा जैसा हरित क्रांति के दाैर में लिया गया था. सरकार भले ही जैविक खेती काे बढ़ाने की बात करती है, लेकिन आंकड़ा बताता है कि लाेग नहीं के बराबर जैविक खेती कर रहे हैं. नेशनल आर्गेनिक फार्मिंग प्राेजेक्ट पीकेवीआइ के तहत सिर्फ 23.02 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती हाेती है, जाे देश में कुल हाे रही खेती का सिर्फ 1.27 फीसदी है. सरकार अभी बड़ी संख्या में रासायनिक खेती उद्याेग काे लगभग 75 हजार कराेड़ की सब्सिडी दे रही है. यह बहुत बड़ी राशि है. ठीक है सरकार ने कई घातक कीटनाशक (ग्रेड वन) पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है.

हर हाल में जैविक खेती काे प्रमुखता देनी हाेगी. ठीक है आबादी बढ़ रही है. खेती लायक जमीन सीमित है. इसलिए कम जमीन पर अधिक उत्पादन का फार्मूला अपनाया जाता है. यह सही भी है, लेकिन देखना यह हाेगा कि यह उत्पादन जैविक खेती के उपयाेग से भी बढ़ाया जा सकता है. गांवाें में काैन सा ऐसा परिवार-घर हाेगा जहां गाय-बैल नहीं हाेगा. लगभग हर घर में. गाेबर से बेहतर खाद क्या हाे सकता है. पहले किसान गाेबर का ही प्रयाेग करते थे. अब सीमित प्रयाेग करते हैं. उन्हें लगता है कि गाेबर के प्रयाेग से उतना उत्पादन नहीं हाेगा, जितना रासायनिक खाद के प्रयाेग से. इसी लिए कर्ज लेकर भी किसान रासायनिक खाद खरीदते हैं, कीटनाशक खरीदते हैं. बाद में आर्थिक संकट में फंस जाते हैं. बाजाराें में आज जाे सब्जियां आ रही हैं, उनके उत्पादन में रासायनिक खादाें कीटनाशकाें का ही उपयाेग किया जाता है. आज लाेग जैविक खादाें से उत्पादित अनाज-सब्जी का महत्व समझ गये हैं आैर वे अधिक कीमत देने काे तैयार हैं. यह हर तरह से एक आम आदमी के लिए फायदेमंद हाेगा. इसलिए जैविक खेती काे सरकार प्राथमिकता के आधार पर ले. अगर अब भी नहीं चेते, ताे ये घातक बीमारियां हर घर में घुस सकती हैं.