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  • Feb 1 2019 1:56PM

कलंक है बाल विवाह

कलंक है बाल विवाह

अनुज कुमार सिन्हा

तमाम प्रयास के बावजूद झारखंड में बाल विवाह पर अंकुश नहीं लग पा रहा है. देश में बाल विवाह के मामले में झारखंड तीसरे स्थान पर है. देश भर में सिर्फ बिहार आैर राजस्थान ही दाे ऐसे राज्य हैं, जिसकी स्थिति झारखंड से भी खराब है. राज्य पर बाल विवाह एक धब्बा है. देवघर, गिरिडीह आैर हजारीबाग ये जिले हैं, जहां सबसे ज्यादा बाल विवाह हाेते हैं. ये वे जिले हैं, जहां आदिवासियाें की आबादी कम है. यानी संकेत साफ है. झारखंड में जिन जिलाें में आदिवासियाें की संख्या ज्यादा है, वहां स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है. इसलिए क्याेंकि आदिवासी समाज की अपनी खासियत है.

वहां बाल विवाह की प्रथा नहीं के बराबर है. समाज का एक बड़ा तबका आज भी मानता है कि बेटी की शादी जल्द कर जिम्मेवारी से मुक्त हाे लाे. वह यह नहीं देखता कि इसका क्या दुष्परिणाम हाे रहा है. जाे उम्र बेटियाें के हंसने-खेलने-पढ़ने के लिए है, पहले शादी कर देने से उस उम्र में उस पर परिवार की देखभाल की जिम्मेवारी आ जाती है. वह अपना जीवन जी नहीं पाती. पढ़ाई नहीं कर पाने के कारण वह अपने पैराें पर खड़ा हाे नहीं पाती. आर्थिक ताैर पर आत्मनिर्भर नहीं हाे पाती आैर जिंदगी भर उसे दूसरे पर आश्रित रहना पड़ जाता है. कम उम्र में मां बनने के कारण उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. शहराें में स्थिति कुछ सुधरी है, लेकिन गांवाें में बहुत बदलाव नहीं हाे सका है.

सरकार आैर स्वयंसेवी संस्थाएं लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं, लेकिन आंकड़ा बहुत नहीं बदला. दरअसल इस विषय पर हमारी सामाजिक व्यवस्था में भारी गड़बड़ी है. बेटियां थाेड़ी बड़ी हुई नहीं कि पड़ाेसियाें आैर परिचिताें के पेट में दर्द हाेने लगता है कि कब कर रही हैं शादी, देर मत कीजिएगा, वरना अच्छा लड़का नहीं मिलेगा. एेसे दबावाें से मुक्त हाेना पड़ेगा. पड़ाेसी अपनी चिंता करें, दूसराें की नहीं. कानून ताे कड़े हैं, लेकिन पालन नहीं हाेता. बाल विवाह करने पर, उस शादी में शामिल हाेने पर भी दंड का प्रावधान है, लेकिन मामले ही दर्ज नहीं किये जाते. किसी काे सजा नहीं हाे पाती. ऐसे भी यह मामला जागरूकता से ज्यादा जुड़ा है. पुलिस कार्रवाई करना भी चाहे ताे गांव-समाज का इतना दबाव हाेता है कि वह हिम्मत नहीं करती. समाज में मानसिकता बदलनी हाेगी कि बेटी जल्द शादी कर जिम्मेवारी से मुक्त हाे गये. अब ताे सरकार ने भी बालिकाआें के पास करने पर उसके खाते में राशि डालने की जाे याेजना चलायी है, उसका मकसद भी ताे बाल विवाह राेकना आैर बेटियाें काे अच्छी शिक्षा देना ही है.

आनेवाले दिनाें में इसका अच्छा परिणाम आयेगा ही. अभी कुछ खबरें आती हैं कि इस बच्ची ने शादी करने से इनकार कर दिया आैर आगे बढ़ने की इच्छा जतायी. कम उम्र में विवाह करने से इनकार कर आगे पढ़ाई करने के लिए जाे बेटियां आगे आ रही हैं, उनका मनाेबल बढ़ाना चाहिए. ऐसा हाे भी रहा है. एेसे ही प्रयासाें से बदलाव अायेगा. आज जिस प्रकार हर परिवार, चाहे वह गरीब हाे या अमीर, बेटा-बेटी काे हर कीमत पर पढ़ाना चाहता है. ऐसा वह ठान लेता है, प्रण कर लेता है. ऐसा ही प्रण करना हाेगा कि किसी भी कीमत पर, चाहे परिस्थिति कितना भी खराब क्याें न हाे, 18 साल से कम उम्र में बेटियाें की शादी नहीं करेंगे. यही उनका भविष्य बनायेगा.