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  • Nov 19 2018 1:02PM

चुनाैती स्वीकार करें

चुनाैती स्वीकार करें

अनुज कुमार सिन्हा

दूसरे विश्वयुद्ध में जापान बर्बाद हाे गया था. एक नया जापान बनाने की चुनाैती थी. तब जापान सरकार ने युवाआें से आह्वान किया कि वे नया जापान बनाने के लिए अपना जीवन राष्ट्र काे समर्पित कर दें. लाखाें देशभक्त युवक गांवाें से निकल कर आगे आये आैर उन्हाेंने जाे ताकतवर जापान बनाया, वह आज दुनिया के सामने है. यह काेई एक दिन में नहीं बना, किसी एक युवक ने नहीं बनाया, कई सालाें की लगातार कठिन मेहनत आैर लाखाें युवकाें के जज्बे ने असंभव काे संभव कर दिखाया है.

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यह काम जापान के बाहर भी हाे सकता है, भारत में भी हाे सकता है, झारखंड में भी. लेकिन, इसके लिए वैसी ही राष्ट्रभक्ति चाहिए, जाे जापानियाें ने दिखायी, वैसा ही जज्बा दिखाना हाेगा, जैसा जापानियाें ने दिखाया है. हम झारखंड काे भी आदर्श राज्य बना सकते हैं, लेकिन सिर्फ कहने से नहीं, करने से हाेगा. 18 साल का झारखंड हाेनेवाला है. यानी बच्चा नहीं रहा. अब झारखंड वयस्क हाे गया है. अब मूल्यांकन ताे हाेना ही चाहिए कि 18 साल में हम कहां पहुंचे. किसी एक सरकार की बात नहीं हाे रही है. हर दल काे माैका मिला. किसी काे कम, ताे किसी काे ज्यादा. इसमें काेई दाे राय नहीं कि झारखंड आज उस स्थिति से काफी अच्छी स्थिति में है, जब यह बिहार का हिस्सा हुआ करता था.

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18-20 साल पहले की बात याद कर लीजिए. सड़कें कैसी थीं, पुल कैसे थे आैर बिजली की क्या स्थिति थी? प्रति व्यक्ति आय सब कुछ बता देता है. हर क्षेत्र में झारखंड आगे बढ़ा है. शिकायत है ताे सिर्फ इतनी कि इसे आैर तेज गति से आगे बढ़ना चाहिए था. ऐसी बात तब दिमाग में आती है जब साथ बने उत्तराखंड आैर छत्तीसगढ़ काे देखते हैं. लेकिन, निराश हाेने की बात नहीं है. संकल्प लेना हाेगा. अब ताे राज्य में स्थायी सरकार है. रघुवर दास ने कई बड़े फैसले किये हैं. सरकार की मंशा पर काेई शक नहीं है. रघुवर दास खुद कठिन मेहनत करते हैं. 18-20 घंटे काम करते हैं, सीधे जनता से मिलते हैं. लेकिन, इस बात काे नहीं भूलना चाहिए कि सरकार की घाेषणा अाैर याेजनाआें काे लागू अधिकारी करते हैं. अधिकारी जितना सक्रिय हाेंगे, अपने राज्य के प्रति जितना लगाव हाेगा, काम के प्रति जितना जुनून हाेगा, राज्य उतना ही आगे बढ़ेगा. काम हाे, तेजी से हाे आैर समयबद्ध हाे. झारखंड में एम्स का आना काेई छाेटा निर्णय नहीं है.

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अब सबसे बड़ी चुनाैती है इसे समय पर पूरा करना आैर जल्द से जल्द वहां इलाज आरंभ करना, ताकि झारखंड के लाेगाें काे इलाज के लिए दिल्ली-मुंबई या दक्षिण के राज्याें में लाइन नहीं लगाना पड़े. बिजली पर काम हाे रहे हैं, सुधार भी दिख रहा है, लेकिन क्वालिटी बिजली की उम्मीद लाेग करते हैं. एक बड़ी कमी है. वह है काम काे लटकाने की. रांची में एक रिंग राेड 10 साल पहले से बन रहा है. टाटा-रांची राेड पर सरकार या काेर्ट की बात भी ठेकेदार नहीं सुन रहा. ऐसे में काम कैसे चलेगा. रांची में फ्लाइआेवर बन रहा है. यह काम जल्द पूरा हाे, ताकि लाेगाें काे कम से कम तकलीफ हाे. सारी चीजाें काे सरकार के भराेसे छाेड़ने से बेहतर है कुछ काम लाेग भी करें. जनता आैर राजनीतिक दल-संगठन भी अपनी जिम्मेवारी समझे. युवक अपने राज्य काे बेहतर बनाने का संकल्प लें. ऐसा हाेगा ताे निश्चित ताैर पर झारखंड एक अव्वल राज्य बनेगा.