aamukh katha

  • May 20 2019 1:25PM

शौचालय से महिलाओं को मिला सम्मान

शौचालय से महिलाओं को मिला सम्मान

पवन कुमार
प्रंखड: बुढ़मू
जिला: रांची 

शौचालय बनने से क्या फायदा हुआ? एक फायदा हो, तब तो बतायें. यहां तो अनेक फायदे हुए हैं. सबसे बड़ी बात हम महिलाओं को सम्मान से जीने का अधिकार मिल गया. नेवदाटोली की महिलाएं शौचालय के मुद्दे पर सवाल पूछने पर सबसे पहले यही जवाब देती हैं. राजधानी रांची के बुढ़मू प्रखंड अंतर्गत उमेडंडा पंचायत स्थित उमेडंडा गांव का नेवदाटोली जंगलों और झाड़ियों के बीच बसा हुआ है. यह एक सुदूरवर्ती गांव है. आजीविका के लिए यहां के ग्रामीण कृषि, वनोत्पाद और पशुुपालन पर निर्भर हैं. यहां लगभग 95 घर है, जिनमें मात्र 14 घरों में शौचालय नहीं बन पाया है. पहले यहां के ग्रामीण घर के बाहर जंगल और खेतों में शौच के लिए जाते थे, लेकिन अब घर में ही शौचालय का इस्तेमाल करते हैं. घर में शौचालय बन जाने से इनके जीवन में काफी बदलाव आया है.

बीमारियों से मिली निजात
ग्रामीण सेनापति किस्पोट्टा बताते हैं कि गांव में शौचालय बन जाने से ग्रामीणों को बीमारियों से मुक्ति मिली है. जब से शौचालय बना है, ग्रामीण स्वच्छता के नियमों का पालन कर रहे हैं. इसके परिणामस्वरूप ग्रामीणों को डायरिया और मलेरिया से मुक्ति मिल गयी है. पिछले दो वर्षों से डायरिया और मलेरिया की शिकायत गांव से नहीं मिल रही है, जबकि पहले हर बारिश के मौसम में ग्रामीण डायरिया की चपेट में आ जाते थे. अब स्वच्छता के प्रति ग्रामीण जागरूक हो गये हैं.

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गर्भवती महिलाओं को मिली राहत : भूलिया देवी
ग्रामीण भूलिया देवी बताती हैं कि घर में शौचालय नहीं होने के कारण महिलाओं को खासकर गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी होती थी. उन महिलाओं को भी घर से दूर शौच के लिए जाना पड़ता था, जो काफी कष्टदायी था. खासकर बारिश के मौसम में तो परेशानी और भी अधिक बढ़ जाती थी, क्योंकि कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से पार होकर जाना पड़ता था. तबीयत खराब होने पर भी शौच के लिए बाहर जाना पड़ता था. अब राहत मिली है. घर में शौचालय बन गया है. भूलिया देवी ग्रामीणों को भी शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करती हैं.

सम्मान से जीने का अधिकार मिला : शीला देवी
शौचालय से हम महिलाओं को सम्मान से जीने का अधिकार मिला है. शीला बताती हैं कि जब वो इस गांव में पहली बार ब्याह कर आयी थीं, उस वक्त उन्हें बहुत परेशानी होती थी. गांव में नयी-नवेली बहू को खुले में जाकर शौच करना पड़ता था, जो बहुत बुरा लगता था. दूसरा कोई उपाय भी नहीं था. अब कोई भी मेहमान आते हैं, तो समस्या नहीं होती है. इसके साथ ही हमें खेतों के आस-पास की गंदगी से राहत मिली है. अब गांव के बाहर की सड़क के किनारे आराम से सांस लेते हुए चल सकते हैं.

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अब दवा का खर्च बच रहा है : सावित्री देवी
सावित्री देवी बताती हैं कि पहले गांव के घरों और खेतों में गंदगी होने के कारण बारिश के मौसम में कई प्रकार की बीमारियां होती थीं, जिससे इलाज में पैसे खर्च होते थे. अब इलाज का खर्च बच रहा है. इसके अलावा पहले बारिश के मौसम में धान के खेतों में गंदगी के कारण काम करना मुश्किल होता था. अब आराम से काम कर सकते हैं. शौचालय का एक और बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब सब्जी के खेत में सूकर परेशान नहीं करते हैं. पहले खेत के आस-पास ग्रामीण शौच करते थे, जिसके कारण सूकर खेतों तक पहुंच जाते थे और सब्जियों को खाते थे, पर अब इससे राहत मिली है. अब सब्जी के खेतों के आस-पास गंदगी भी नहीं होती है और सब्जी बर्बाद भी नहीं होती है.