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  • May 20 2019 1:30PM

शौचालय से खुले में शौच जाने की मजबूरी से मिली मुक्ति

शौचालय से खुले में शौच जाने की मजबूरी से मिली मुक्ति

पवन कुमार
प्रंखड: लापुंग
जिला: रांची 

रांची जिला अंतर्गत लापुंग प्रखंड की ककरिया पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन का असर साफ दिखाई दे रहा है. पंचायत को दो अक्तूबर 2018 को ओडीएफ घोषित कर दिया गया. आदिवासी बहुल इस पंचायत में शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया गया, हालांकि इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ी, क्योंकि ग्रामीण कुछ पानी की कमी के कारण और कुछ अपनी पुरानी आदतों के कारण शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे. शौचालय निर्माण को लेकर चलाये गये जागरूकता अभियान का असर अब पंचायत के गांवों में दिख रहा है. सड़कें साफ और सुंदर हैं. बारिश के दिनों में अब गांव की सड़कों पर चलने में परेशानी नहीं होती है. बारिश के मौसम में ग्रामीण पहले की अपेक्षा बीमार कम पड़ते हैं. मुखिया बिरसमुनी देवी बताती हैं कि लापुंग पंचायत में शौचालय निर्माण योजना काफी देर से पहुंची, जिसके कारण शौचालय बनने में देरी हुई. अब पंंचायत के गांवों में शौचालय बन चुका है. सभी ग्रामीण खासकर महिलाएं शौचालय का बखूबी इस्तेमाल कर रही हैं

आठ गांवों में बने एक हजार शौचालय
ककरिया पंचायत के कुल आठ गांवों में लगभग एक हजार शौचालय बनाये गये हैं. अब ग्रामीणों को बाहर शौच के लिए नहीं जाना पड़ता है. जंगली इलाका होने के कारण अक्सर यहां हाथी आ जाते हैं. इसके कारण ग्रामीणों को खतरा बना रहता है. पंचायत में पानी की बहुत समस्या है. ग्रामीण बताते हैं कि पानी नहीं होने के कारण कई गांव के लोग नदी का पानी पीने को मजबूर हैं. इसके कारण ग्रामीणों को शौचालय का इस्तेमाल करने में परेशानी होती है. इतना ही नहीं, आलम यह है कि इस पंचायत के कई गांव के लोग अभी भी नदी के पानी का इस्तेमाल करते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी की समस्या दूर हो जाये, तो वे कभी शौच करने के लिए बाहर नहीं जायेंगे.

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शौचालय बनने के बाद आराम मिला है : कुंवारी देवी
ककरिया पंचायत के अम्बाटोली की कुंवारी देवी बताती हैं कि शौचालय बन जाने से काफी आराम मिला है. पहले बारिश के मौसम में गांव की सड़कों पर चलना मुश्किल हो जाता था. खेत में गंदगी होने के कारण फसल लगाने में परेशानी होती थी. खासकर धान की खेती करते समय गंदगी के कारण बहुत परेशानी होती थी. इसके अलावा बारिश में बाहर जाकर शौच करने में काफी दिक्कत होती थी. गंदगी के कारण बीमारियां भी होती थीं. अब घर में शौचालय बन जाने का बाद सभी परेशानियां दूर हो गयी हैं. इसके अलावा कुंवारी देवी ने कहा कि अगर सरकार की ओर से शौचालय नहीं बनाया गया होता, तो चाहकर भी वो खुद से अपना शौचालय नहीं बना पातीं. शौचालय बन जाने से ग्रामीण महिलाओं को बहुत राहत मिली है.

पहले शौच के लिए सुबह जल्दी उठना पड़ता था : एरेन मिंज
डुरू गांव की एरेन मिंज बताती हैं कि पहले शौच जाने के लिए अहले सुबह उठना पड़ता था. महिलाओं को अंधेरे में बाहर जाना खतरे से खाली नहीं था. मजबूरी के कारण दूसरा कोई विकल्प नहीं था. बारिश और ठंड में सुबह उठना और घर से बाहर जाने का मन नहीं करता था, पर जाना पड़ता था. इसके साथ ही अगर कोई आ जाये, तो उसके जाने का इंतजार करना पड़ता था. इससे समय की काफी बर्बादी होती थी. घर में कोई महिला मेहमान आती, तो उसे भी हमारी तरह की ही समस्याओं का सामना करना पड़ता था. शर्म भी आती थी. अब घर में शौचालय बन जाने से सुबह जल्दी नहीं उठना पड़ता है. मेहमानों के घर आने पर शर्मिंदा भी नहीं होना पड़ता है.

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ससुराल में शौचालय नहीं होने कारण होना पड़ा शर्मिंदा : सुलेखा देवी
ककरिया गांव की सुलेखा देवी जल सहिया हैं और शौचालय निर्माण के साथ-साथ उसके इस्तेमाल करने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. सुलेखा बताती हैं कि पहले बाहर जाकर शौच करने में शर्म आती थी, क्योंकि वो यहां की बहू थीं. उनके मायके में शौचालय है, पर ससुराल में शौचालय नहीं होने के कारण शौच के लिए बाहर जाने में वह खुद को काफी असहज महसूस करती थीं. अब यह समस्या दूर हो गयी है. मायके से भी लोग आते हैं, तो अब शर्मिंदा नहीं होना पड़ता है. सुलेखा जल सहिया के तौर पर ग्रामीणों को शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करती हैं. वह बताती हैं कि पानी की समस्या होने के कारण शौचालय का इस्तेमाल करने में उन्हें परेशानी होती है.

जंगली जानवरों का डर रहता था : गोदावरी हेरेंज
अंबाटोली की गोदावरी हेरेंज कहती हैं कि शौचालय के लिए बाहर जाने पर सांप, बिच्छू और हाथी का डर हमेशा बना रहता था. जंगली इलाका होने के कारण यहां हमेशा हाथी गांव तक आ जाते हैं. पहले बारिश होने पर देर रात भी घर के बाहर जाना पड़ता था. ठंड के मौसम में परेशानी होती थी. गर्मी में दोपहर में परेशानी होती थी. शौचालय बन जाने से इस चिंता से मुक्ति मिल गयी है. अब राहत मिल गयी है. इसके साथ ही अब खेती-बारी करने में आसानी होती है. गोदावरी भी शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करती हैं. वो बताती हैं कि अब घर के बाहर भी किसी बच्चे को खुले में शौच करते हुए देखती हैं, तो बच्चे और उसकी मां को जाकर शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए कहती हैं. यह सच है कि पानी की समस्या इसमें आड़े आ रही है.