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  • Aug 17 2018 2:23PM

जंगल बचाने को ग्रामीण एकजुट, नहीं काटते पेड़

जंगल बचाने को ग्रामीण एकजुट, नहीं काटते पेड़

 शैलेश सिंह

जिला : पश्चिमी सिंहभूम

पर्यावरण के दुश्मन और लकड़ी माफिया आज भी सारंडा जंगल की खूबसूरती बिगाड़ने में लगे हैं. कुछ लोग लकड़ी काट कर बेचने में लगे हैं, तो कुछ वनाधिकार पट्टा के लालच में किसी भी तरह का हथकंडा अपनाने से नहीं हिचक रहे. पट्टा के लालच में सारंडा के दुईया एवं रोआम गांव के बीच संगम पहाड़ी के जंगल को पिछले साल रातों रात लोगों ने काट दिया था. उन्हें पट्टा नहीं मिला. ग्रामीणों की एकजुटता ने उन्हें सफल नहीं होने दिया. इसमें से कुछ असामाजिक तत्व व बाहरी लोग शामिल थे. दुईया, रोआम, अगरवा, बियुबेड़ा गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर जंगल बचाने का संकल्प लिया. इसके साथ ही उन माफियाओं को क्षेत्र से खदेड़ कर भगा भी दिया. ग्रामीणों का कहना है कि जंगल व पर्यावरण को बचाने तथा पर्यावरण के ऐसे दुश्मनों के खिलाफ हमेशा संगठित होकर लड़ाई लड़ी जायेगी.

काटे हुए जंगल पर ग्रामीणों ने दोबारा लगाये पौधे
ग्रामीणों ने माफियाओं के द्वारा काटे गये जंगल पर दोबारा वृक्ष लगाया है. इसके साथ ही उसकी सुरक्षा में लग गये हैं. अब लकड़ी माफिया तो दूर, लोग घर के जलावन के लिए लकड़ी भी नहीं लेते हैं. ग्रामीणों ने संकल्प लिया है कि गांव से जंगल का एक पेड़ नहीं कटेगा. अब ग्रामीण जलावन के लिये सालभर का इंतजार करते हैं. जब लकड़ी सूख कर जमीन पर गिर जाती है, तो उसको चुन कर जलावन का उपयोग करते हैं. जंगल बचाने के लिए लगे ग्रामीणों की एकजुटता देखकर अब अन्य गांव के ग्रामीण भी प्रभावित हो रहे हैं.

ग्रामीणों की एकजुटता से वन विभाग भी प्रभावित
पर्यावरण प्रेमी ग्रामीणों से प्रभावित होकर वन विभाग भी सक्रिय हो गया है. लकड़ी माफियाओं के खिलाफ सख्ती होने लगी है. जंगल कटाई के आरोप में बुंडू गांव के दर्जनों लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गयी है.

कटे जंगल में फिर आयी हरियाली
ग्रामीणों के प्रयास पर काटे गये जंगल में फिर से पौधे व झाड़ियां उगने लगी हैं. फिर से हरियाली आ गयी है. एक बार फिर जंगल हरा-भरा होने की ओर अग्रसर है, जिससे क्षेत्र के दर्जनों गांव के ग्रामीणों में काफी खुशी देखी जा रही है.