aamukh katha

  • Apr 16 2018 3:40PM

मुखिया के घर का चक्कर लगाने से ग्रामीणों को मिली मुक्ति

मुखिया के घर का चक्कर लगाने से ग्रामीणों को मिली मुक्ति

प्रखंड : बेंगाबाद
जिला : गिरिडीह

मुन्ना प्रसाद

गिरिडीह जिला अंतर्गत बेंगाबाद प्रखंड की हरिला पंचायत में पंचायती राज का सपना साकार होता दिख रहा है. यहां पिछले सात साल में मुखिया ने पंचायत के विकास के लिए हर क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया है. चाहे वह विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की बात हो या फिर सामुदायिक विकास के लिए लोगों में समझ विकसित करने की बात. कृषि विकास के लिए लोगों को सिंचाई के साधन विकसित करने की बात हो या फिर शौचालय निर्माण कर उसका उपयोग कराने की बात. इन सभी योजनाओं में मुखिया का कार्य शत प्रतिशत धरातल पर दिखता है. ग्रामीणों को भी किसी भी कार्य के लिए मुखिया के घर का चक्कर नहीं लगाना पड़ता. वे सीधे पंचायत सचिवालय पहुंचते हैं. वहां उन्हें मुखिया के अलावा पंचायत सचिव, रोजगार सेवक और प्रज्ञा केंद्र के संचालक एक साथ आसानी से मिल जाते हैं. लोगों के सभी कार्यों का निष्पादन भी पंचायत सचिवालय में ही होता है. इस कारण इस पंचायत में लोगों की खुशहाली साफ झलकती है.

पंचायत सचिवालय में होता है विवाद का निबटारा
हरिला पंचायत में होने वाले छोटे-छोटे विवादों का निबटारा मुखिया स्थानीय लोगों के साथ बैठ कर करते हैं. पहले यहां के सभी मामले थाना पहुंचते थे, लेकिन अब उसमें कमी आयी है. पिछले सात साल में गिने-चुने मामले ही थाना पहुंचे हैं. अधिकांश का निबटारा स्थानीय स्तर पर ही हो रहा है. पंचायत में संचालित गतिविधियों में शिकायतों के लिए पंचायत सचिवालय में शिकायत पेटी रखी गयी है. यह शिकायत पेटी प्रतिदिन खुलती है. इससे शिकायतों का समाधान जल्द होता है. इस पंचायत की मात्र एक शिकायत जनसंवाद में पहुंची थी, जिसका त्वरित निष्पादन किया गया. उसके बाद से आज तक एक भी शिकायत पंचायत के बाहर नहीं गयी.

प्रज्ञा केंद्र का होता है नियमित संचालन
पंचायत सचिवालय में प्रज्ञा केंद्र का नियमित संचालन होता है. सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक प्रतिदिन कार्य किया जाता है. यहां से जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, ऑनलाइन लगान रसीद, रेलवे टिकट बुकिंग समेत ऑनलाइन सभी तरह के कार्यों का निष्पादन हो रहा है. ऑनलाइन कार्यों के लिए पंचायत के लोगों को प्रखंड मुख्यालय या जिला मुख्यालय जाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है. इस कार्य के लिए प्रतिदिन वहां ग्रामीणों की भीड़ लगी रहती है. प्रधानमंत्री डिजिटल साक्षरता अभियान में इस पंचायत ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है.

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शौचालयों का शत प्रतिशत हो रहा उपयोग
पंचायत में निर्मित शौचालयों का शत प्रतिशत उपयोग हो रहा है. कई ग्रामीणों ने तो एक से बढ़ कर एक मॉडल शौचालय बनाकर इस पंचायत का नाम जिले में रोशन किया है. टाइल्स युक्त शौचालय में पानी की व्यवस्था कर उसे नियमित उपयोग किया जा रहा है. इसी तरह प्रधानमंत्री आवास निर्माण योजना में भी लाभुक ने एक से बढ़ कर एक मॉडल भवन तैयार किया है. भवन को न केवल खूबसूरती से बनाया गया है, बल्कि उसमें टाइल्स लगाकर उसे बेहतर लुक भी दिया गया है. तीनघरवा के अयोध्या सिंह का शौचालय और मुकेश सिंह का प्रधानमंत्री आवास मॉडल आवास के रूप में है.

क्या कहते हैं आंकड़े
लाभुक द्वारा स्वयं बनाया गया प्रधानमंत्री आवास योजना का भवन
हरिला पंचायत की आबादी 6153 है. इसमें कुल 10 गांव और 12 वार्ड हैं. तीन प्राथमिक विद्यालय और चार मध्य विद्यालय संचालित हैं. आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या पांच है, जबकि जन वितरण प्रणाली दुकानों की संख्या भी पांच है. प्रधानमंत्री आवास योजना से बीते 2016-17 में 81 आवास का निर्माण हुआ है. सभी आवास का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है. लोग इसका उपयोग भी कर रहे हैं. वित्तीय वर्ष 2017-18 में 26 आवासों की स्वीकृति मिली थी, जिसका निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है. मनरेगा योजना से सिंचाई की व्यवस्था के लिए यहां 35 कूप का निर्माण किया गया है. इन कूपों से पटवन कर तैयार होने वाली फसल को किसान स्थानीय चौक-चौराहों पर बेच कर उससे अपनी आमदनी कर रहे हैं. 14वें वित्त योजना से पंचायत के विभिन्न गावों में तीन पीसीसी सड़क निर्माण का कार्य, छह नाली निर्माण का कार्य, स्कूलों में टूटे-फूटे शौचालय निर्माण का कार्य, स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में हैंडवास निर्माण का कार्य किया जा रहा है. पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन से कुल 793 शौचालय का निर्माण किया गया है.

सामाजिक कार्यों पर विशेष ध्यान : मुन्ना प्रसाद सिंह
हरिया पंचायत के मुखिया मुन्ना प्रसाद सिंह कहते हैं कि पंचायत क्षेत्र में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा जाता है. यहां विकास के साथ-साथ सामुदायिक कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. पंचायत के मामलों का निबटारा स्थानीय स्तर पर ही होता है. मनरेगा के कूप से किसान खेती कर रहे हैं. यहां निर्मित सभी शौचालयों का शत-प्रतिशत उपयोग हो रहा है. पंचायत सचिवालय से ही सभी कार्यों का निष्पादन हो रहा है.