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  • Dec 5 2018 12:09PM

लालटेन युग से मिलने लगी है मुक्ति

लालटेन युग से मिलने लगी है मुक्ति

 गुरुस्वरूप मिश्रा

बिजली से झारखंड की तस्वीर बदलने लगी है. शहर के साथ-साथ गांव भी जगमगाने लगे हैं. वैसे सुदूरवर्ती इलाकों में भी बिजली से अंधियारा दूर होने लगा है, जहां बिजली कभी सपना हुआ करती थी. बिजली से न सिर्फ घर रोशन हो रहे हैं, बल्कि जिंदगी की राह भी आसान होने लगी है. स्कूलों में बिजली उपलब्ध होने से पढ़ाई समेत अन्य कार्यों में आसानी हो गयी है. किसानों को सिंचाई कार्य में सुविधा हो गयी है. ढिबरी-लालटेन युग से ग्रामीणों को मुक्ति मिलने लगी है. बिजली की उपलब्धता संतोषजनक नहीं होने के कारण लोगों में नाराजगी भी रहती है. पर्याप्त बिजली उपलब्ध करा कर लोगों के चेहरे पर खुशियां बिखेरी जा सकती हैं. तमाम दावे-वादों के बीच कड़वा सच ये है कि आजादी के सात दशक बाद भी राज्य के कई गांवों को आज भी बिजली का इंतजार है.

झारखंड के शहरी इलाके तो बिजली से कमोबेश रोशन थे, लेकिन कई ऐसे गांव थे, जहां बिजली कभी सपना हुआ करती थी. वहां के लोगों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके गांव में कभी बिजली भी आयेगी. शहरी चकाचौंध से कोसों दूर इन गांवों की हालत बरसात के दिनों में काफी बदतर हो जाती थी. टॉर्च, लालटेन या ढिबरी से ही रोशनी की व्यवस्था हो पाती थी. आजादी के छह दशक तक उनके गांव-जवार में अंधियारा ही था. रात काटने को दौड़ती थी. बिजली नहीं होने के कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था. आज उन गांवों के सपने हकीकत में बदल रहे हैं. रात भी रोशन होने लगी है, लेकिन कई गांवों को आज भी बिजली का सपना पूरा होने का इंतजार है.

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रांची समेत सात जिले हुए पूर्ण विद्युतीकृत

झारखंड के 24 जिलों में सात जिले पूर्ण विद्युतीकृत घोषित किये गये हैं. रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, देवघर, हजारीबाग और लोहरदगा जिले को पूर्ण विद्युतीकृत घोषित कर दिया गया है. शेष 17 जिलों को पूर्ण विद्युतीकृत करने के लिए बिजली विभाग द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है. सरकार ने दिसंबर 2018 तक राज्य का हर घर बिजली से रोशन करने का लक्ष्य रखा है. सरकार की मानें, तो 2019 तक 257 स्टेशन व 60 नये ग्रिड के माध्यम से 24 घंटे बिजली उपलब्ध करायी जायेगी.

91 फीसदी घरों तक पहुंची बिजली

झारखंड में कुल 65 लाख सात हजार 278 घर हैं. इनमें 91 फीसदी घरों में बिजली पहुंच गयी है. बिजली विभाग की मानें, तो आठ नवंबर तक 58 लाख 91 हजार 654 घरों में बिजली पहुंचा दी गयी है. 20 जिलों के छह लाख 15 हजार 624 घरों में जल्द बिजली पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. केंद्र सरकार ने हर घर को बिजली देने के लिए 10 अक्तूबर, 2017 को सौभाग्य योजना की शुरुआत की थी. उस दौरान झारखंड में 47 लाख 40 हजार 939 घरों में ही बिजली का कनेक्शन था. 10 अक्तूबर, 2017 से लेकर चार अक्तूबर 2018 तक नौ लाख 46 हजार 167 घरों में बिजली कनेक्शन दे दिया गया है. अब सात लाख 93 हजार 135 घरों में कनेक्शन देने का काम किया जा रहा है.

रांची का हर घर हुआ रोशन

67 साल में रांची के केवल चार लाख घरों तक ही बिजली पहुंची थी, लेकिन रघुवर सरकार ने चार साल में बिजली से वंचित दो लाख 13 हजार 374 घरों को बिजली से रोशन कर दिया. अब राजधानी के सभी घर रोशन हो गये. सरकार का दावा है कि वर्ष 2019 तक राजधानी के शहरी और ग्रामीण क्षत्रों में 24 घंटे बिजली सुनिश्चित कर दी जायेगी. मुख्यमंत्री ने अनगड़ा में रांची जिले के शत- प्रतिशत घरों में पूर्ण विद्युतीकरण की घोषणा की. रांची को पूर्ण विद्युतीकृत करने के लिए चार हजार 679 नये ट्रांसफार्मर, तीन हजार किमी एलटी लाइन, 33 केवी लाइन का सुदृढ़ीकरण, 770 किमी नयी 33 केवी लाइन समेत अन्य जरूरतों को पूरा किया गया. 22 नये सब स्टेशन बन रहे हैं. चार हजार से अधिक नया ट्रांसफॉर्मर लगाये जायेंगे. 25 नये फीडर व ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बिल भुगतान के लिए पंचायत भवन में बिल भुगतान केंद्र स्थापित किये जा रहे हैं.

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हर घर में बिजली पहुंचाने वाला राज्य का पहला जिला रामगढ़
रामगढ़ जिला झारखंड का पहला जिला है, जो पूर्ण विद्युतीकृत घोषित किया गया है. छह अक्तूबर, 2018 को रामगढ़ घर-घर बिजली पहुंचने वाला राज्य का पहला जिला बन गया है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उजाला दिवस पर रजरप्पा के डीएवी स्कूल मैदान में आयोजित समारोह में रामगढ़ को पूर्ण विद्युतीकृत जिला घोषित किया था. मुख्यमंत्री ने 10 अक्तूबर, 2018 को दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना एवं सौभाग्य योजना के अंतर्गत बोकारो जिले के शत-प्रतिशत घर पूर्ण विद्युतीकृत होने की घोषणा की. हजारीबाग जिले के सभी 3,09,038 घरों में बिजली पहुंचा दी गयी है. जिले में 1325 गांव हैं. इनमें 771 गांवों में 12वीं योजना के तहत तथा 554 गांवों में दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत विद्युतीकरण किया गया. 17 गांवों में सोलर पैनल के माध्यम से बिजली पहुंचाई गयी है.

चार साल में बिजली व्यवस्था में हुए सुधार
बिजली के क्षेत्र में पिछले चार सालों में 117 नये सब स्टेशन, 40 ग्रिड सब स्टेशन का निर्माण कराया गया है. ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सुधारने के लिए चार लाख 27 हजार किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइन और एक लाख 41 हजार 976 किलोमीटर डिस्ट्रीब्यूशन लाइन का कार्य पूरा किया गया है. बिजली उत्पादन के लिए पतरातू में एनटीपीसी के साथ 4000 मेगावाट क्षमतावाले पावर प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है.

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने की है सराहना
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने झारखंड सरकार द्वारा राज्य में चौबीस घंटे बिजली उपलब्ध कराये जाने की दिशा में किये जा रहे प्रयासों की सराहना की है. केंद्र सरकार, झारखंड सरकार व वर्ल्ड बैंक द्वारा 310 मिलियन डॉलर लोन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया गया. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार झारखंड को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत है. इसके लिए आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है. झारखंड में घर-घर बिजली पहुंचाने का कार्य अंतिम चरण में है.

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30 दिसंबर तक हर घर में होगी बिजली

16 जिलों के साढ़े पांच लाख घरों में बिजली नहीं पहुंची है. इस लक्ष्य को हर हाल में 30 दिसंबर तक पूरा

कर लेने का निर्देश दिया गया है. राज्य के 16 जिले में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का काम बाकी है. हर

घर बिजली योजना के तहत हर घर को बिजली से रोशन करने का लक्ष्य है. जेबीवीएनएल के प्रबंध

निदेशक के मुताबिक, 20 से 30 दिसंबर के बीच पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा, चाईबासा, पाकुड़,

साहिबगंज और जमशेदपुर में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का काम पूरा कर लिया जायेगा.

झारखंड का हर घर बिजली से होगा रोशन : रघुवर दास

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि दिसंबर 2018 तक झारखंड का हर घर बिजली से रोशन हो जायेगा. वर्ष 2019 तक 257 स्टेशन व 60 नये ग्रिड के माध्यम से राज्य में 24 घंटे बिजली उपलब्ध करायी जायेगी. बिजली के मामले में झारखंड वर्ष 2021 तक आत्मनिर्भर बनकर देश को प्रकाशमान करेगा. राज्य की बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सरकार 35 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है. 20 हजार करोड़ रुपये ग्रामीण विद्युतीकरण पर और 15 हजार करोड़ रुपये ग्रिड निर्माण पर खर्च हो रहे हैं. 30 लाख बिजली विहीन घरों में से 23 लाख घरों तक बिजली पहुंचा दी गयी है. 67 साल में जो कार्य नहीं हुआ, उसे चार साल से पहले ही कर दिया गया. 247 सुदूरवर्ती क्षेत्रों में निवास कर रहे अनुसूचित जाति व जनजाति के घरों तक सोलर लाइट से रोशनी की व्यवस्था कर दी गयी है. आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब आजादी के 67 साल बाद 80 ग्रिड का निर्माण जारी है, जबकि 67 साल में महज 38 ग्रिड का ही निर्माण कराया गया था.