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  • Jun 5 2019 5:00PM

हरिहरपुर जामटोली पंचायत के हर घर में पहुंच रहा सप्लाई पानी

हरिहरपुर जामटोली पंचायत के हर घर में पहुंच रहा सप्लाई पानी

पवन कुमार
प्रखंड:
 बेड़ो
जिला: रांची 

राजधानी रांची के दो प्रखंड हैं बेड़ो और लापुंग. इन दोनों प्रखंड की दो पंचायतों की स्थिति एक-दूसरे से बिल्कुल उलट है. बेड़ो प्रखंड के हरिहरपुर जामटोली पंचायत के ग्रामीणों को पाइपलाइन के माध्यम से घरों में पानी पहुंच रहा है, वहीं पास के लापुंग प्रखंड के ककरिया पंचायत के ग्रामीण आज भी पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं.

राजधानी रांची अंतर्गत बेड़ो प्रखंड की हरिहरपुर जामटोली पंचायत आज खुद को बेहतर पंचायत के तौर पर स्थापित करने में लगी है. पंचायत के सभी नौ गांवों में विकास हो रहा है और ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का बखूबी लाभ भी मिल रहा है. आवास योजना के तहत 423 लाभुकों को आवास मिल चुका है. शौचालय भी लगभग हर घर में है और ग्रामीण उसका इस्तेमाल भी करते हैं. वर्ष 2016 में यह पंचायत ओडीएफ घोषित हुई थी. इसके बाद इस पंचायत में पेयजलापूर्ति को लेकर सराहनीय कार्य हुआ है. घर-घर में पाइपलाइन के जरिये पानी पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीणों को काफी राहत मिली है. नियमित जलापूर्ति होने के कारण शौचालय का इस्तेमाल भी बढ़ा है. अब ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता है.

ऊंची जगहों पर है बसावट
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पहले सभी ग्रामीण कच्चे मकान बनाते थे. बारिश के दिनों में परेशानी होती थी, तो ग्रामीण ऊंची जगहों पर घर बनाने लगे. नतीजा यह हुआ कि पंचायत के सभी गांव व टोले-मोहल्ले ऊंची जगहों पर बन गये. पहले जनसंख्या कम थी, तो पानी की कमी नहीं होती थी, पर जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ने लगी, जलस्तर कम होता गया. इससे पानी की किल्लत होने लगी. आलम यह हो गया कि पानी लाने के लिए ग्रामीण महिलाओं को दो से ढाई किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता था, तब जाकर पानी नसीब होता था. बारिश के दिनों में तो परेशानी और बढ़ जाती थी. हालांकि, यह समस्या सिर्फ बसावट वाली जगहों पर ही थी. निचली जमीन पर खेती करने के लिए पर्याप्त पानी है. पानीवाले बाबा पद्मश्री सिमोन उरांव का घर भी इसी पंचायत में है. मुखिया सुनील कच्छप बताते हैं कि जामटोली पंचायत के हुटाल बनटोली गांव में आजादी के बाद से एक चापानल तक नहीं था, लेकिन अब उस गांव में भी पाइपलाइन के जरिये पानी घर-घर तक पानी पहुंच रहा है.

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तीन करोड़ 45 लाख रुपये की योजना से बदली तस्वीर
जामटोली पंचायत में घर-घर पानी पहुंचाने के लिए लिए तीन करोड़ 45 लाख रुपये की योजना को धरातल पर उतारा गया. पंचायत के सभी नौ गांवों में जलापूर्ति के लिए सौर ऊर्जा संचालित नौ बड़ी जलमीनार लगायी गयी. पानी पहुंचाने के लिए पाइप बिछायी गयी. जो छोटे टोले थे या फिर जहां पर 10-12 घरों के लिए पानी पहुंचाना संभव नहीं था, वहां भी सौर ऊर्जा संचालित छोटी जलमीनार बनायी गयी. कुल 11 छोटी जलमीनार बनायी गयी है. नायक टोला की भी यही कहानी थी. ऊंचाई पर बसे इस टोले में 10-12 घर हैं, जहां बड़ी जलमीनार से जलापूर्ति कठिन था. वहां, छोटी जलमीनार बनाकर जलापूर्ति की जा रही है.

हर घर पानी के बारे में क्या कहते हैं ग्रामीण
1.
अब पीने की असुविधा नहीं होती है : पीटर तिर्की
ग्रामीण पीटर तिर्की कहते हैं कि पहले गर्मियों में पानी की काफी समस्या होती थी. चापाकल भी खराब रहता था या फिर खराब पानी निकलता था. ऊंचाई पर बसे होने के कारण कुआं भी जल्दी सूख जाता था. अब पाइपलाइन के जरिये पानी मिलने से बहुत सुविधा मिली है. पीने और खाना बनाने के लिए अब समय से पानी मिल जाता है. पशुओं को चारा खिलाने के लिए भी पानी उपलब्ध रहता है. इससे फायदा यह हुआ है कि अब घर की महिलाओं को पानी लाने के लिए कड़ी धूप में नहीं जाना पड़ता है.

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2. पहले पानी लाने के लिए दूर जाना पड़ता था : दशमी देवी
जामटोली गांव की दशमी देवी बताती हैं कि पानी की बहुत समस्या होती थी. बारिश के मौसम में भी कुआं में पानी नहीं रहता था. चापाकल की भी स्थिति सही नहीं रहती थी. पानी नहीं होने के कारण भरी दोपहरी में दूर-दराज क्षेत्र से पानी लाना पड़ता था. बारिश के मौसम में भींग कर पानी लाना पड़ता था. कीचड़ और फिसलन के कारण परेशानी होती थी. अब घर में पाइप से पानी आ रहा है. इसके लिए सिर्फ 10 रुपये देने पड़ते हैं. पानी भरने और लाने की चिंता अब नहीं सताती है.

3. दरवाजे पर पानी आता है और क्या चाहिए : मनकुंवर देवी
हरहंजी गांव की मनकुंवर देवी ने कहा कि उनके घर के दरवाजे पर नल लगा हुआ है. पानी घर पर मिलता है, तो खुशी होती है. पहले जब पाइपलाइन से पानी नहीं मिलता था, तो उस समय काफी परेशानी होती थी. बुढ़ापे में दूर से पानी लाने मुश्किल था. खाना बनाना, पशुओं को पानी पिलाना, नहाना, कपड़े धोना आदि सभी काम सोच-समझ कर करना पड़ता था, क्योंकि पानी के बिना कुछ संभव नहीं है. बारिश के मौसम में पानी लाने में और समस्या होती थी. हर घर पानी की योजना ने हम ग्रामीणों को काफी राहत दी है.

4. पानी के बिना कोई काम नहीं हो सकता : मकरी देवी
मकरी देवी बताती हैं कि पहले पानी लाने के लिए स्कूल के चापाकल पर जाना पड़ता था, जहां काफी भीड़ होती थी. पानी भरने में काफी समय लगता था, जिसके कारण सही समय से कोई काम नहीं हो पाता था. हर काम के लिए पानी की जरूरत पड़ती है. कई बार तो पानी की कमी के कारण नहाना भी मुश्किल होता था. चाहकर भी हर रोज नहा नहीं पाते थे. अब घर के आंगन में पानी आ रहा है. पानी की समस्या दूर हो गयी है. अब समय से घर के सारे काम कर लेते हैं.

5. अब पानी के लिए नहीं भटकना पड़ता है : उमेश
सप्लाई पानी घर तक पहुंचने का फायदा यह हुआ है कि अब सभी ग्रामीण शौचालय का इस्तेमाल कर रहे हैं. पानी की कमी के कारण कई लोग शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर पाते थे, क्योंकि जब पीने के लिए पानी नहीं मिले, तो लोग शौचालय में कैसे इस्तेमाल करेंगे. उमेश ने यह बात कहते हुए नीचे खेत की तरफ इशारा करते हुए कहा कि देखिये वहां नीचे से पानी लाना पड़ता था. पीना, खाना बनाना, मवेशियों को पानी पिलाना सब वहां से लाकर करना पड़ता था, जो काफी थका देनेवाला काम था, पर अब राहत मिली है.

6. अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता : सरिता उरांइन
पानी के बिना कुछ काम नहीं हो पाता है. हर काम के लिए पानी चाहिए. अब घर तक पाइप के जरिये पानी पहुंच रहा है. इसका फायदा हुआ है. कुआं या चापाकल अासपास में नहीं है, जिसके कारण काफी दूर जाना पड़ता था. फरवरी महीने से ही पानी की किल्लत शुरू हो जाती थी. पानी भरने के लिए बरतन लेकर इधर-उधर भटकना पड़ता था. गर्मी की परेशानियों को याद करके अभी भी पानी को लेकर हुई परेशानी याद आ जाती है. अब घर-घर पाइनलाइन के माध्यम से पानी मिलने से काफी राहत मिली है.