aamukh katha

  • Mar 9 2018 7:51PM

सामाजिक बदलाव का वाहक बनतीं ग्रामीण महिलाएं

सामाजिक बदलाव का वाहक बनतीं ग्रामीण महिलाएं


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजधानी रांची के धुर्वा स्थित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में ग्रामीण महिलाओं की एकजुटता देखते ही बनी. मौका था झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की ओर से आयोजित तीसरे आजीविका महिला महासम्मेलन 2018 के आयोजन का. इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री रघुवर दास उपस्थित थे. ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा व जेएसएलपीएस के सीइओ पारितोष उपाध्याय भी मौजूद थे. 
शक्ति पथ का विमोचन व झार स्वाद की लाॉन्ंचिग 
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य में सखी मंडल की सदस्यों द्वारा किये जा रहे सामाजिक बदलाव के कार्यों की सराहना की. इस दौरान सखी मंडलों से सवंरता झारखंड पर आधारित पुस्तक शक्ति पथ का विमोचन और इमली उत्पाद झार स्वाद की लाॉन्ंचिग की गयी. इस अवसर पर राज्य में सखी मंडलों द्वारा किये जा रहे सामाजिक बदलाव के कार्यक्रम, शौचालय निर्माण में महिलाओं की भागीदारी और उनके बेहतर कार्य व काफी कम समय में एक लाख सत्तर हजार शौचालयों का निर्माण कराने में अहम भूमिका निभाने को लेकर सराहना की गयी. महिला महासम्मेलन में जेएसएलपीएस द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों के लगे स्टॉलों का मुख्यमंत्री रघुवर दास ने निरीक्षण भी किया. इस दौरान सखी मंडल की सदस्य सीमा देवी ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को एक मांग पत्र सौंपा. मुख्यमंत्री ने उन मांगों को पूरा करने का आश्वासन देते हुए सीमा देवी को सम्मानित भी किया. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से जेएसएलपीएस द्वारा किये जा रहे पांच कार्यों को बेस्ट प्रैक्टिस के लिए चुने जाने पर बधाई दी गयी. इस अवसर पर स्टेडियम में सखी मंडल की महिलाओं के द्वारा नाटकों का मंचन भी किया गया, इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त सामाजिक बुराइयों को दिखाते हुए उसके प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया. 
सखी मंडल के सदस्यों को मिला तोहफा
- 70 हजार सखी मंडलों को वित्तीय समावेशन के लिए 1100 करोड़ रुपये
- 52 हजार सखी मंडलों को 670 करोड़ रुपये 

- प्रखंड स्तर पर बनेंगे कोल्ड रूम, जहां किसान एवं महिला सखी मंडलों द्वारा उत्पादित सामग्रियों का भंडारण किया जा सकता है.
- महिला सखी मंडलों को आसानी से मिले मुद्रा लोन
- मधुमक्खी पालन से जुड़ी महिला सखी मंडलों को मिलेगा नि:शुल्क मधुबॉक्स, ढाई लाख मधुबॉक्स होंगे वितरित
- मछली पालन के क्षेत्र से जुड़ी महिला सखी मंडलों को एक रुपये शुल्क पर तालाब लीज पर मिलेगा
- अब रेडी टू इट कार्यक्रम को महिला सखी मंडल की बहनें भी चलायेंगी
- अंडा उत्पादन से जुड़ी महिला समूहों को अब चार लाख रुपये तक का ऋण मिलेगा
 सखी मंडलों का प्रशंसनीय कार्य
- स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत झारखंड में लगभग 15 लाख महिलाओं ने संगठित होकर एक माह तक स्वच्छता अभियान चलाया.
- यहां की महिलाओं ने 1.70 लाख शौचालय निर्माण का कार्य कराया.
 झारखंड में सखी मंडल की स्थिति
- 24 जिलों के 200 प्रखंडों में कार्यरत है सखी मंडल
- 6000 गांवों में सखी मंडल का ग्राम संगठन
- क्लस्टर लेवल की 200 शाखाएं
- सखी मंडल से 15.50 लाख परिवार जुड़ा
- 15 हजार महिलाएं अपने ही गांव में कार्य कर आमदनी करती हैं
- पूरे राज्य में दो लाख महिला सखी मंडल का गठन करने का लक्ष्य निर्धारित
नारी शक्ति के सम्मान का लें संकल्प : रघुवर दास, मुख्यमंत्री
महिला महासम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि देश में प्राचीन काल से ही नारी शक्ति का काफी ऊंचा स्थान रहा है. भारत विश्व का एकमात्र देश है, जहां नारी शक्ति की पूजा होती है. उन्होंने कहा कि महिला दिवस के दिन हम सभी को नारी शक्ति के सम्मान का संकल्प लेना चाहिए. देश व राज्य में महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है. स्वच्छ भारत अभियान में नारी शक्ति एक ऐसी शक्ति है, जो सामान्य जीवन में स्वच्छता के अभियान व स्वच्छता संस्कार को प्रभावी ठंग से जन-सामान्य के स्वभाव में परिवर्तित कर रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला संगठनों के प्रयास से यह तय है कि वर्ष 2018 तक झारखंड खुले में शौच से मुक्त हो जायेगा. 
झारखंड की बहनें देश का रोल मॉडल बन रही हैं : नीलकंठ सिंह मुंडा, ग्रामीण विकास मंत्री
ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि राज्य के 15 हजार महिलाएं जेएसएलपीएस से जुड़ कर गांवों में अपनी सेवा देकर रोजगार पा रही हैं. सखी मंडल कृषि, पशुपालन के साथ-साथ अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं. महिला समूह की सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण के साथ-साथ आर्थिक सहायता भी दी गयी है, जिसका लाभ महिलाओं को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि झारखंड की महिलाएं शिक्षा, खेल और रोजगार सृजन, किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. महिलाओं को और अधिक जागरूक होकर कार्य करने की जरूरत है. सशक्त नारी से ही सशक्त राज्य का निर्माण होगा. मंत्री ने कहा कि महिला सशक्तीकरण को लेकर सरकार काफी गंभीर है और इस दिशा में कार्य कर रही है. महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं. महिलाओं को आगे आकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए. स्वच्छ भारत मिशन के क्षेत्र में सखी मंडल की महिलाओं ने सराहनीय कार्य किया है. झारखंड की बहनें पूरे देश में रोल मॉडल बनकर उभरी हैं. सखी मंडल की महिलाओं को समय पर ऋण की सुविधा भी मिल रही है. 
ग्रामीण महिलाओं की आवाज बन रहा पंचायतनामा : रूबी खातून
राजधानी रांची के अनगड़ा कलस्टर के बरकत सखी मंडल की बुक कीपर रूबी खातून को आजीविका महिला महासम्मेलन में अनुभव साझा करने का मौका मिला. उन्होंने सखी मंडल में बुक कीपर से कम्युनिटी जर्नलिस्ट तक के सफर की जानकारी दी. वह कहती हैं जेएसएसपीएस ने उन्हें खड़ा किया और पंचायतनामा व आजीविका मिशन के ट्रेनिंग प्रोगाम से कम्युनिटी जर्नलिस्ट बनने पर एक नयी पहचान मिली. आज लोग उसे पत्रकार दीदी के नाम से भी जानते हैं. अपने सफर के बारे में रूबी कहती हैं कि समूह में बुककीपर का काम करते हुए उन्हें कम्युनिटी जर्नलिस्ट के लिए चुना गया. जिसके बाद प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया. प्रशिक्षण में उन्हें कई जानकारी दी गयी. इसमें स्टोरी लिखने,  इंटरव्यू लेने, किसी से बातचीत करने व तस्वीर लेने समेत हर एक पहलू को विस्तार से बताया गया. प्रशिक्षण प्राप्त कर पंचायतनामा में स्टोरी लिखना शुरू किया. अब तक लगभग 20 स्टोरी पंचायतनामा में छप चुकी है. इसमें नशाबंदी, गांव में विकास, सखी मंडल से जुड़ी दीदियों की सफलता की कहानी आदि मुख्य हैं. रूबी खातून कहती हैं कि प्रभात खबर के पंचायतनामा में जो स्टोरी आती है, वो काफी मायने रखती है, क्योंकि इसमें गांव की दीदियों की सफलता की कहानी होती है. इसमें गांव की दीदियों के कार्यों को सराहा जाता है. पंयातनामा उन महिलाओं को आवाज दे रहा है, जो कभी सपने में भी नहीं सोची होंगी कि उनकी लिखी हुई खबरें भी अखबार में छपेंगी. इससे दूसरी महिलाओं में भी आत्मविश्वास बढ़ रहा है. कहती हैं कि अब कहीं भी जाती हूं, तो हमेशा स्टोरी पर ध्यान रहता है. इस कारण अधिकारियों से भी बेझिझक बात कर लेती हैं. आज उनकी पहचान पत्रकार के रूप में हो गयी है.  
सेवा करना अच्छा लगता है : बलमदीना तिर्की, पशु सखी
जूही महिला समूह की सदस्य बलमदीना तिर्की ने कहा कि आजीविका पशु सखी का काम करते हुए आज इस मुकाम पर पहुंची हैं. समूह से जुड़ कर पशु सखी का काम करते हुए वो अपने परिवार को अच्छे से चला रही हैं और खुद को गरीबी से बाहर निकाल चुकी हैं. महिला समूह से जुड़ने के बाद साल 2013 में उन्हें पशु सखी का प्रशिक्षण मिला. प्रशिक्षण के दौरान बकरियों में होनेवाले रोगों के बारे में बताया गया. रोकथाम के तरीके भी बताये गये. दवाओं के बारे में जानकारी दी गयी. जब वह प्रशिक्षण लेकर वापस आयीं, तो सबसे पहले उन्होंने गांव में पशुओं व परिवार की गणना की. गणना के बाद पता चला कि गांव में कुल 62 परिवार हैं और कुल 142 पशु हैं. इसके बाद पशुओं के इलाज के बारे में बताया गया, तो उससे पशुओं के इलाज कराने से कई लोगों ने साफ मना कर दिया. काफी समझाने के बाद ग्रामीण तैयार हुए और आज वो बेधड़क पशुओं का इलाज कर रही हैं. अब तो ग्रामीण महिलाएं खुद ही अपने पशुओं को कृमिनाशक दवाई और टीकाकरण के लिए उनके पास आती हैं. पशुओं की उचित देखभाल होने के कारण उनकी संख्या भी बढ़ने लगी, तो उसका भी समाधान निकाला गया. अब ग्रामीण महिलाएं अपने पशुओं की बिक्री आजीविका संसाधन केंद्र के जरिये करती हैं. पहले खुले बाजार में बेचने से बकरियों के दाम अच्छे नहीं मिल पाते थे, लेकिन संसाधन केंद्र में बकरियों को वजन करके बेचा जाता है, जिसके कारण दाम भी अच्छे मिलते हैं और ग्रामीण महिलाओं को फायदा भी हो रहा है. इसके साथ ही बकरियों का बीमा भी होता है और क्लेम भी दिया जाता है. आजीविका संसधान केंद्र में प्रशिक्षण भी दिया जाता है. बलमदीना कहती हैं कि पहले मैं साइकिल में घूमती थी. अब खुद की आमदनी से स्कूटी खरीद कर गांव-गांव घूम कर पशुओं का इलाज करती हैं. अब वह मुर्गियों का भी इलाज शुरू की हैं. 
ग्रामीण महिलाओं में बढ़ा है आत्मविश्वास : पारितोष उपाध्याय
जेएसएलपीएस के सीइओ पारितोष उपाध्याय ने कहा कि यह ग्रामीण महिलाओं का ही जुनून है कि आज पूरा स्टेडियम खचाखच भरा है. उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है. आमदनी के साथ-साथ गांव-समाज के विकास में भी महिला सखी मंडल का महत्वपूर्ण योगदान है. स्वच्छता के प्रति महिला सखी मंडल का जुनून देखते ही बनता है. यही कारण है कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में महिला सखी मंडल जी-जान से जुटीं  है. उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में महिला सखी मंडल के सदस्यों को स्वावलंबी बनाने के लिए जेएसएलपीएस की पूरी टीम बधाई का पात्र है. इसी का परिणाम है कि पिछले दिनों नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से जेएसएलपीएस द्वारा किये जा रहे पांच कार्यों को बेस्ट प्रैक्टिस के लिए चुना गया. 
बेहतर कार्य करनेवाली सखी मंडल, ग्राम संगठन और संकुल संगठन
क्रम सं.  जिला  सखी मंडल                                                    ग्राम संगठन                         संकुल संगठन
1.  पाकुड़    दुर्गा स्वयं सहायता समूह, करियोडीह, लिट्टीपाड़ा मिलन आजीविका महिला ग्राम संगठन  पाकुड़िया संकुल संगठन, पाकुड़िया
2. साहेबगंज आनंद आजीविका सखी मंडल, मंगल बाजार, सकरीगली एकता आजीविका महिला ग्राम संगठन हाजीपुर आजीविका महिला संकुल संगठन
3. गोड्डा पार्वती महिला मंडल, पथरगामा  मानिकपुर आजीविका महिला ग्राम संगठन, ठाकुरगंगटी रोशनी महिला संकुल संगठन, पौड़ियाहाट
4. दुमका उज्ज्वल निशक्त स्वयं सहायता समूह, नौनिगांव मसानजोर आजीविका महिला ग्राम संगठन, मसलिया नया जीवन महिला संकुल संगटन, काठीकुंड
5. जामताड़ा राधा रानी आजीविका सखी मंडल, कुंडहित मां मंसा आजीविका महिला ग्राम संगठन, फतेहपुर --
6. देवघर मां महिला शक्ति मंडल, पालोजोरी कुनजोड़ा आजीविका महिला समित, पालोजोरी --
7. सिमडेगा मां काली स्वयं सहायता समूह, नवाटोली, कोलेबिरा शिवनाथपुर आजीविका महिला ग्राम संगठन, शिवनाथपुर, कोलेबिरा थेथाईटनगर आजीविका महिला संकुल संगठन
8. कोडरमा शिवगुरु आजीविका स्वयं सहायता समूह, डुरुडीह, मथाईडीह झांसी की रानी आजीविका महिला ग्राम संगठन, पुरनानगर, मरकच्चो --
9. बोकारो ज्योति महिला समूह, कसमार कसमार आजीविका महिला ग्राम संगठन चंदनकियारी आजीविका महिला संकुल संगठन
10. धनबाद मां भवानी आजीविका सखी मंडल, दुम्मा, पूर्वी टुंडी दुम्मा आजीविका महिला ग्राम संगठन, पूर्वी टुंडी --
11. चतरा चांद आजीविका सखी मंडल, शहरजाम, इटखोरी गंगा आजीविका महिला ग्राम संगठन, इदला, सिमरिया --
12. लातेहार चांद आजीविका स्वयं सहायता समूह, बारी, सिन्जो गणेश आजीविका महिला ग्राम संगठन, बरवाडीह मोंगर आजीविका महिला संकुल संगठन
13. पलामू शीतल आजीविका स्वयं सहायता समूह, लोहरापोखरी चंद्रमा आजीविका महिला ग्राम संगठन धावाडीह आजीविका महिला संकुल संगठन
14. गढ़वा सदाबहार आजीविका सखी मंडल, कथरकलान, सगमा सितारा आजीविका महिला ग्राम संगठन, जामुती, भंडरिया --
15. गिरिडीह राधा स्वयं सहायता समूह, डुमरी गढ़ीखुर्द आजीविका महिला ग्राम संगठन, जमुआ बेंगाबाद आजीविका महिला संकुल संगठन
16. सरायकेला-खरसावां जाहेर अयो स्वयं सहायता समूह, सरायकेला झीमरी आजीविका महिला ग्राम संगठन, नीमडीह --
17. पूर्वी सिंहभूम जय मां संतोषी महिला स्वयं सहायता समूह, घाटशिला लावा आजीविका महिला ग्राम संगठन, पटमदा --
18. पश्चिमी सिंहभूम ममता स्वयं सहायता समूह, तांतनगर पर्लिपोस आजीविका महिला ग्राम संगठन, गोइलकेरा जैंतगढ़ आजीविका महिला संकुल संगठन, जगन्नाथपुर
19. गुमला विकास महिला मंडल, बड़गांव बड़टोली, सिसई बुद्धिपत आजीविका महिला ग्राम संगठन, भरनो महिला विकास मंडल, पालकोट
20. लोहरदगा अखरा महिला मंडल, किस्को बमनडीहा आजीविका महिला ग्राम संगठन, भंडरा --
21. रामगढ़ गंगा महिला समूह, गोला कुस्तेगढ़ा आजीविका महिला ग्राम संगठन, हापू नावाडीह आजीविका संकुल संगठन, गोला
22. हजारीबाग दुर्गा महिला मंडल, चौपारण जरबा आजीविका महिला ग्राम संगठन, चुरचू --
23. खूंटी महिला विकास आजीविका समिति, खूटजोड़ा लसियागढ़ आजीविका महिला ग्राम संगठन, रनिया बेखटंगा आजीविका महिला संकुल संगठन, रनिया
 
24. रांची नयी प्रतिभा महिला समिति, नगड़ी दुलमी बोंगादर आजीविका महिला ग्राम संगठन, सोनाहातू सिल्ली आजीविका महिला संकुल संगठन, सिल्ली
कार्यक्रम में 25 हजार से अधिक सखी मंडल की सदस्य थीं
आजीविका महिला महासम्मेलन में मुख्यमंत्री व मंत्री के अलावा हटिया विधायक नवीन जायसवाल, खिजरी विधायक राम कुमार पाहन, रांची की मेयर आशा लकड़ा, ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अविनाश कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील कुमार वर्णवाल, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण, जेएसएलपीएस के सभी सदस्य समेत राज्य के सभी जिलों से 25000 से अधिक सखी मंडल की सदस्य शामिल थीं.