aamukh katha

  • Dec 1 2017 1:56PM

झारखंड में सबसे ऊंचा और देश में छठे स्थान पर है लोध

झारखंड में सबसे ऊंचा और देश में छठे स्थान पर है लोध
झारखंड में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जिन्हें आप बखूबी जानते हैं. जहां खूबसूरत वादियों की सैर करने के लिए हमेशा पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है, लेकिन कई पर्यटन स्थल ऐसे भी हैं, जो आकर्षक तो हैं, लेकिन सैलानियों की नजरों से दूर हैं. उन्हें आज भी पर्यटकों का इंतजार है. आमुख कथा के इस अंक में उन अनछुए पर्यटन स्थलों की जानकारी देने की कोशिश की गयी है, जिन्हें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाये, तो न सिर्फ ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा, बल्कि पलायन पर भी अंकुश लग सकेगा. आप भी इन पर्यटन स्थलों के प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठाइए और मनोरंजन कीजिए.
 
समीर रंजन
अपनी कोख में खनिज संपदाओं का अकूत भंडार छिपाए झारखंड में अनगिनत पर्यटन स्थल हैं, जहां पर्यटन के विकास की काफी संभावनाएं हैं. राज्य में रमणीक स्थलों की भरमार है, जहां सालोंभर देशी व विदेशी पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है. कई ऐसे अविकसित पर्यटन स्थल भी हैं, जिन्हें विकसित किया जाये, तो पर्यटकों को वे काफी आकर्षित करेंगे. इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा. झारखंड में पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. वर्ष 2013 से तुलना करें, तो वर्ष 2016 में पर्यटकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. 

वर्ष 2013 में जहां देशी पर्यटकों की संख्या 2.05करोड़ थी, वहीं वर्ष 2016में इसकी संख्या बढ़ कर 3.33करोड़ हो गयी. इसी तरह विदेशी पर्यटकों की बात करें, तो वर्ष 2013 में इसकी संख्या 45,995 थी, जो बढ़ कर वर्ष 2016 में 1,69,442 हो गयी. इस आंकड़े से साफ पता चलता है कि राज्य में पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं. जरूरत है सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रचार-प्रसार एवं रख-रखाव की उचित व्यवस्था करने की.
 
राज्य में कम नहीं पर्यटन स्थल
झारखंड में पर्यटन स्थल की कमी नहीं है. सिर्फ जरूरत है उसका सौंदर्यीकरण कर उसे निखारने की. राज्य में ग्रामीण पर्यटन के साथ-साथ, प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, पुरातात्विक या ऐतिहासिक, रोमांचक पर्यटन स्थल, वन एवं वन्यप्राणी, खनन पर्यटन, औद्योगिक पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन, पर्यावरण व स्पोर्ट्स पर्यटन स्थल हैं.
 
दशम. देखते रह जायेंगे दशम जलप्रपात के नजारे को
रांची-टाटा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-33 पर रांची से 30 किलोमीटर दक्षिण में एक गांव है तैमारा. यहां से 10 किलोमीटर की दूरी पर है दशम जलप्रपात. यह बेहद सुंदर जलप्रपात है. यहां 144 फीट की ऊंचाई से पानी कांची नदी में गिरता है. यह दृश्य सचमुच देखते ही बनता है. स्वर्णरेखा की सहायक नदी कांची जब दक्षिणी छोटानागपुर पठार या रांची के पठारी हिस्से से बहती हुई 144 फीट की ऊंचाई से गिरती है, तब इस दशम जलप्रपात का निर्माण होता है. इसका पानी इतना ठंडा व साफ है कि पीने से शरीर को राहत महसूस होती है. झरने के काफी ऊंचाई से गिरने के कारण इसकी आवाज यहां गूंजती रहती है. प्रकृति ने इस जलप्रपात को असीम सुंदरता प्रदान की है. 
 
हुंडरू जलप्रपात. देखते बनती है इसकी छटा
रांची जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर रांची-रामगढ़ सीमा पर है हुंडरू जलप्रपात. स्वर्णरेखा नदी का यह जलप्रपात 322 फीट की ऊंचाई से पहाड़ों को चीरते हुए गिरता है. लोध जलप्रपात के बाद यह राज्य का सबसे ऊंचा जलप्रपात है, वहीं देश में सबसे ऊंचाई से गिरनेवाले जलप्रपातों में 34वें स्थान पर आता है. अधिक ऊंचाई से गिरने के कारण इसका लाभ पनबिजली के रूप में भी मिल रहा है. चारों तरफ से पहाड़ों से घिरे इस झरने को देखने के लिए दूर-दराज से काफी संख्या में पर्यटक आते हैं. यहां आने के लिए मार्च से सितंबर का समय उपयुक्त है. रांची जिले के ओरमांझी ब्लॉक चौक से पूर्व दिशा की ओर जानेवाली पक्की सड़क से सिकिदिरी होते हुए हुंडरू जलप्रपात पहुंचा जा सकता है.