aamukh katha

  • Dec 1 2017 1:39PM

विभूति भूषण की पथेर पाचांली का प्रेरणास्त्रोत रहा है धारागिरी झरना

विभूति भूषण की पथेर पाचांली का प्रेरणास्त्रोत रहा है धारागिरी झरना
घाटशिला के दाहीगोड़ा में गौरी कुंज भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. यहां पश्चिम बंगाल के प्रख्यात उपन्यासकार विभूति भूषण बंदोपाध्याय रहते थे. यहीं रह कर बुरूडैम एवं धारागिरी झरना की प्राकृतिक छटा से प्रेरणा लेकर उन्होंने चांदेर पहाड़, वने जंगले और देव जान नामक उपन्यास की रचना की. इस आवास का नाम उनकी पत्नी के नाम पर गौरी कुंज है. अब गौरी कुंज का विकास हुआ है. एक पारिवारिक फोटो है. यहां के संग्रहालय में विभूति भूषण के वस्त्र, मेडल एवं कोट आदि रखे हुए हैं.
 
घाटशिला का स्वर्ग 
घाटशिला के फुलडुंगरी स्थित एनएच 33 से करीब आठ किमी उत्तर है बुरूडीह डैम. यहां से डैम तक जाने के लिए अब पक्की सड़क बन गयी है. यह डैम तीन दिशाओं पूर्व, पश्चिम और उत्तर में साल के घने जंगलों तथा पहाड़ों से घिरा है. इस डैम को घाटशिला का स्वर्ग कहा जाता है, हालांकि डैम के पास पर्यटकों की सुविधाओं का अभाव भी है. पेयजल और यात्री विश्रामागार की व्यवस्था नहीं है. इस कारण पर्यटक लौट आते हैं.
 
धारागिरी झरना से सालों भर बहती है जल की धारा
बुरूडीह डैम से तीन किमी दूर है बासाडेरा गांव और बासाडेरा से एक किमी दूर है धारागिरी झरना. चारों दिशाओं से पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा धारा गिरी झरना पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. पहाड़ की ऊंचाई से सालों भर अनवरत पानी गिरता रहता है. इस झरने का ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि प्रख्यात लेखक विभूति भूषण बंदोपाध्याय ने धारागिरी के झरने के पास ही बैठ कर पथेर पांचाली लिखा था.