aamukh katha

  • Nov 20 2017 12:29PM

झारखंड की जलवायु फूल की खेती के लिए फिट

झारखंड की जलवायु फूल की खेती के लिए फिट
झारखंड की जलवायु फूलों की खेती के अनुकूल है. आप साल के सिर्फ दो महीने मई-जून को छोड़ कर कभी भी फूल की खेती कर सकते हैं. राज्य के 1.6 हजार हेक्टेयर में फूलों की खेती होती है. देश में फूलों की खेती 317 हजार हेक्टेयर में होती है. कृषि वैज्ञानिक फूलों की अच्छी पैदावार के लिए आधुनिक व व्यावसायिक तकनीक से खेती करने की सलाह देते हैं. कारोबार के लिहाज से राज्य में पांच तरह के फूलों की खेती पर विशेष जोर दिया जाता है. बाजार उपलब्ध होने के कारण गुलाब, गेंदा, जरबेरा, ग्लेडियोलस व रजनीगंधा की खेती पर किसान ज्यादा ध्यान देते हैं. राजधानी रांची की आबोहवा गुलाब के फूल के लिए उत्तम है. यही कारण है कि रांची के खेतों में लहलहाते गुलाब के फूलों की सुंदरता एवं खुशबू न्यूजीलैंड के गुलाब की तरह है.
 
पंचायतनामा डेस्क
फूलों की खेती के अनुकूल जलवायु होने के कारण राज्य के किसान इस ओर आकर्षित हो रहे हैं. खास कर बारिश के मौसम में जब कोलकाता में फूलों का उत्पादन बंद हो जाता है, उस समय झारखंड के किसान फूलों का बंपर उत्पादन करते हैं. राज्य की जमीन सीढ़ीनुमा है, जिसके कारण यहां खेतों में पानी नहीं ठहरता है. इसके साथ ही मिट्टी भी फूल के लिए उपयुक्त है. फूल की खेती से छोटे और मंझोले किसान फायदा उठा सकते हैं. यह इन किसानों के लिए वरदान है.
 
दो प्रकार से होती  है फूलों की खेती
राज्य में मूल रूप से दो प्रकार से फूलों की खेती की जाती है. एक खुले खेत में और दूसरा पॉली हाउस में, जिसे साधारण बोलचाल की भाषा में हम हाइब्रिड फूल कहते हैं. पॉली हाउस के माध्यम से किसान छोटी जगहों पर भी फूल की खेती कर सकते हैं. पॉली हाउस में उत्पादित फूल कई मायने मेें खुले खेत में उत्पादित फूल से बेहतर व उच्च गुणवत्ता वाला होता है. किसानों को इसके अधिक दाम भी मिलते हैं. नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन की ओर से गुलाब और जरबेरा की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई कारगर कदम उठाये जा रहे हैं.
 
1500 से अधिक फूलों की प्रजातियां
झारखंड में 1500 से अधिक फूलों की प्रजातियां हैं. गुलाब की कई प्रजातियां झारखंड में मिलती हैं. अगर व्यापार की दृष्टि से देखें, तो राज्य में मुख्य रूप से गुलाब, जरबेरा, ग्लेडियोलस, गेंदा और रजनीगंधा फूल की खेती की जाती है. रजनीगंधा को छोड़ दें, तो किसान बाकी फूलों की खेती सालों भर कर सकते हैं.
 
झारखंड राज्य बागवानी मिशन
राज्य की जलवायु एवं मिट्टी बागवानी फसलों के लिए अत्यंत उपयोगी है. इस मिशन का उद्देश्य बागवानी फसलों के क्षेत्रफल एवं उत्पादन को बढ़ाने के लिए नयी तकनीकी का प्रयोग मल्टी लेयर क्रॉपिंग, सूक्ष्म सिंचाई, इंटरक्रॉपिंग, छाया में उगनेवाले बागवानी फसल आदि के उपयोग व उसको बढ़ावा देना मुख्य है. राज्य के भूमिहीन किसानों को भी अन्य स्त्रोतों से आय बढ़ाने में मिशन मददगार साबित होता है. वर्ष 2014-15 के तहत राज्य के 1.6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 22 हजार मिट्रिक टन खुला फूल और 9506 लाख मिट्रिक टन कट फूल का उत्पादन हुआ. 

नये किसान कैसे शुरू करें फूल की खेती 
फूल की खेती के फायदे तो किसान समझ चुके हैं, लेकिन बहुत से किसान ऐसे भी हैं, जो चाहते हुए भी जानकारी के अभाव में फूल की खेती नहीं कर पाते हैं. ऐसे किसानों के लिए यह जानकारी काफी लाभप्रद हो सकती है. फूल की खेती करने के लिए सबसे पहले किसानों के पास कम से कम 12 डिसमिल जमीन होनी चाहिए, जिस पर किसान खेती कर सकते हैं. फूल की खेती के लिए सरकारी सुविधा पाने के लिए किसान को अपने-अपने जिले के जिला उद्यान पदाधिकारी से मुलाकात करनी होगी. यहां उन्हें पूरी जानकारी मिल जायेगी. 

सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसान को अपना फोटो, जमीन से संबधित कागजात और एफिडेविट जमा करना होगा. इसके साथ ही पंचायत क्षेत्र में रहनेवाले लाभुकों को अपने आवेदन पत्र को मुखिया के हस्ताक्षर के बाद उसे जिला कृषि पदाधिकारी के दफ्तर में जमा करना होगा. आवेदन का प्रारूप किसान विभाग की वेबसाइट www.nhmjharkhand.com पर जाकर निकाल सकते हैं. आवेदन जमा करने के बाद किसानों को प्रशिक्षण दिया जायेगा. किसानों को जिस जगह पर फूल की अच्छी खेती हुई है, उन जगहों पर भ्रमण के लिए भी ले जाया जायेगा, जिसका खर्च विभाग वहन करेगी. 

अधिक जानकारी के लिए किसान उद्यान विभाग के अधिकारी विद्याधर सिंह मुंडा से या उनके मोबाइल नंबर 7261092234 पर संपर्क कर सकते हैं. फूल की खेती के लिए एक और महत्वपूर्ण चीज यह है कि किसानों को सही मौसम के बारे में समझना होगा. साथ ही यह समझना होगा कि बाजार में फूलों की मांग किस वक्त सबसे ज्यादा है. इसी सभी चीजों के लिए कृषि व उद्यान विशेषज्ञों से हमेशा संपर्क में रहने पर आप फूल की खेती कर बंपर उत्पादन कर सकते हैं और अपनी आमदनी भी अच्छी कर सकते हैं.
 
फूल की खेती की ओर बढ़ता किसानों का रुझान : डॉ पूनम
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के उद्यान विभाग के प्रोफेसर डॉ पूनम होरो कहती हैं कि फूल की खेती कर किसान बेहतर लाभ कमा सकते हैं. वैकल्पिक खेती में किसानों को नुकसान की संभावना भी कम होती है और बाजार भाव कम ज्यादा होने का खतरा भी कम होता है. फूल की खेती भी इन दिनों वैकल्पिक खेती के तौर पर किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प बन कर सामने आ रही है. किसानों का रुझान भी धीरे-धीरे फूलों की खेती की ओर बढ़ रहा है. झारखंड के किसानों के लिए फूलों की खेती बेहतर इसलिए भी है, क्योंकि यहां की जलवायु फूलों की खेती के लिए सर्वोत्तम है. हालांकि जिस पैमाने पर फूलों का उत्पादन होना चाहिए और जिस तरह से स्थानीय व विदेशी बाजारों में बेहतर किस्म के फूलों की मांग बढ़ती जा रही है, उसके अनुरूप किसानों का रुझान अभी तक फूलों की खेती की ओर नहीं बढ़ा है. अगर सिंचाई की उचित व्यवस्था हो, तो राज्य के किसान सालों भर फूलों की खेती कर सकते हैं. हां, ज्यादा गर्मी होने पर थोड़ी समस्या आ जाती है, लेकिन बाकी दिनों के लिए फूल की खेती एक अच्छा विकल्प है. 
 
कैसे करें संपर्क
फूल की खेती से जुड़े किसानों को अगर किसी समस्या का समाधान चाहिए, तो आप बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, जिले के जिला कृषि पदाधिकारी व कृषि मित्र से भी सलाह ले सकते हैं. 
 
राज्य बागवानी मिशन, कृषि भवन परिसर, कांके रोड, रांची. फोन नंबर- 0651-2230789.
ई-मेल : nhmjharkhand@rediffmail.com  वेबसाइट : www.nhmjharkhand.org
डॉ पूनम होरो, वैज्ञानिक, उद्यान विभाग एवं प्रभारी, अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (पुष्प), बीएयू, कांके, रांची-6. फोन नंबर: 9631098472. 
ई-मेल : horopunam@rediffmail.com