aamukh katha

  • Aug 21 2017 2:29PM

हर किसी को कानूनी सहायता लेने का है अधिकार

हर किसी को कानूनी सहायता लेने का है अधिकार
न्याय सभी के लिए समान. इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए कानूनविदों ने सहज, सुलभ और सस्ता न्याय दिलाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं. खासकर दूर-दराज के ग्रामीणों के लिए आसानी से न्याय मिले, इसके तहत कई योजनाओं को भी सामने लाने का प्रयास किया गया है. बच्चों से लेकर बूढ़े सभी को न्याय मिले, इसी पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया है. आमुख कथा के इस अंक में सहज, सुलभ और नि:शुल्क कानूनी सहायता के साथ-साथ उसका उपाय भी बताने की कोशिश की गयी है, ताकि ग्रामीणों समेत अन्य लोगों को भी कानूनी सहायता अच्छी तरह से मिल सके. पेश है समीर रंजन व पवन कुमार की यह रिपोर्ट.
 
कानूनी सहायता लेना हर किसी का अधिकार है. अनुच्छेद 19 (क) में कहा गया है कि सबको समान रूप से न्याय मिले, उचित कानून व योजनाओं द्वारा या अन्य किसी भी तरीके से नि:शुल्क कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था करे, जिससे सभी नागरिकों को न्याय प्राप्त कराने का अवसर मिल सके. वहीं अनुच्छेद 21 के तहत किसी भी व्यक्ति को उसके प्राण तथा दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित ना रखा जाये, सिवाय उस हालत के, जो कानूनी प्रक्रियाओं द्वारा स्थापित किये गये हों.
 
उच्चतम न्यायालय के आदेश के तहत जहां गरीबों को नि:शुल्क कानूनी सहायता मिल सकती है, वहीं अभियुक्तों के लिए कई अधिकार भी दिये गये हैं.
 
राज्य ऐसे अभियुक्त को, जो गरीबी के कारण कानूनी सेवाएं प्राप्त नहीं कर सकता है, उसे नि:शुल्क विधिक सेवाएं उपलब्ध करा सकती है
अभियुक्त के लिए वकील नियुक्त हो सकता है, पर यह तभी हो सकता है, जब अभियुक्त को वकील की नियुक्ति पर आपत्ति ना हो
वकील की नियुक्ति के लिए अभियुक्त को आवेदन देने की आवश्यकता नहीं है
मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त को उसके अधिकार से अवगत कराते हुए वकील की नियुक्ति के लिए पूछा जायेगा
सरकार का यह कर्तव्य है कि वह कैदियों को निर्णय की कॉपी उपलब्ध कराये
गिरफ्तार व्यक्ति अपनी पसंद के वकील से परामर्श ले सकता है
 
वकील से परामर्श लेने का अधिकार हर व्यक्ति को है
 
कानूनी सहायता लेने के लिए नहीं लगता कोई शुल्क
 
भारतीय संविधान में गरीबों तथा समाज के कमजोर वर्गों के लिए नि:शुल्क कानूनी सहायता का प्रावधान है. संविधान के अनुच्छेद 39 (ए) में सभी के लिए न्याय सुनिश्चित किया गया है. वहीं अनुच्छेद 14 और 22 (1) के तहत राज्य का यह उत्तरदायित्व है कि वह सबके लिए समान अवसर सुनिश्चित करे. समानता के आधार पर समाज के कमजोर वर्गों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम को पास किया गया. इसी के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण यानी नालसा का गठन हुआ. इसका काम कानूनी सहायता कार्यक्रम लागू करना और उसका मूल्यांकन एवं निगरानी करना है.
साथ ही इस अधिनियम के अंतर्गत कानूनी सेवाएं भी उपलब्ध कराना है. कानूनी सहायता प्राप्त लाभार्थियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है. देश भर में कानूनी सहायता कार्यक्रम और स्कीम लागू करने के लिए राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी करता है. इन्हें कार्य नियमित करते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है.
नि:शुल्क कानूनी सहायता पाने के लिए पात्रता
महिलाएं और बच्चे
अनुसूचित जाति व जनजाति 
औद्योगिक श्रमिक
बड़ी आपदाओं, हिंसा, बाढ़, सूखा, भूकंप और औद्योगिक आपदाओं के शिकार लोग
विकलांग व्यक्ति
हिरासत में रखे गये लोग
ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय 50,000 रुपये से अधिक नहीं हो
बेगार या अवैध मानव व्यापार के शिकार लोग
मुफ्त कानूनी सेवाएं
किसी कानूनी कार्यवाही में कोर्ट फीस और देय अन्य सभी प्रभार अदा करना
कानूनी कार्यवाही में वकील उपलब्ध कराना
कानूनी कार्यवाही में आदेशों आदि की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करना
कानूनी कार्यवाही में अपील और दस्तावेज का अनुवाद और छपाई सहित पेपर बुक तैयार करना
 
फ्री विधिक सहायता
 
हर नागरिक को समान अवसर के साथ-साथ आसानी से न्याय उपलब्ध होना चाहिए. इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के अंतर्गत केंद्र, राज्य एवं जिला स्तर पर विधिक सेवा प्राधिकार एवं उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति या उप समिति तथा तहसील विधिक सेवा समिति का गठन हुआ है.
 
विधिक सेवा प्राप्त करने के हकदार व्यक्ति अपने संबंधित जिले के जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव या झारखंड उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के सचिव को सादे कागज या दिये गये प्रारूप में अपने मुकदमे का संक्षिप्त विवरण दे सकते हैं. अगर आवेदक की वार्षिक आमदनी एक लाख रुपये से कम है, तो ऐसे व्यक्ति को अपने आवेदन के साथ आय प्रमाण पत्र की कॉपी भी लगानी होगी. अगर आवेदक अनुसूचित जाति एवं जनजाति हैं, तो उन्हें आवेदन के साथ जाति प्रमाण पत्र लगाना आवश्यक है.
 
न्याय सहयोग
 
कानूनी मदद चाहनेवाले लोगों को एक ही छत के नीचे कानूनी मदद एवं सुविधाएं मिले, इस उद्देश्य से न्याय सहयोग का गठन हुआ है. राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के उद्देश्यों को पूरा करने में न्याय सहयोग, कानूनी सहायता चाहने वालों को उनके मामलों एवं शिकायतों के निवारण के केंद्र के रूप में कार्य करता है. 
 
न्याय सहयोग द्वारा लाभुकों से संबंधित लंबित मामलों की तुरंत जानकारी, कानूनी सहायता एवं सलाह दी जाती है. इसके तहत जरूरतमंदों जैसे-महिलाएं,बच्चे, वृद्ध, अनुसूचित जाति एवं जनजाति, सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग के सदस्य एवं पीड़ित लोगों को उचित कानूनी सहायता उपलब्ध कराया जा सकता है. इसके अलावा लोगों को उनके अधिकारों के संबंध में अवगत कराना तथा केंद्र या राज्य सरकार की योजनाओं के संबंध में जानकारी देना, लोगों को सरकारी कार्यालयों व संस्थानों से संबंधित शिकायतों के निवारण में उचित सहयोग देना और लोगों के बीच कानून संबंधी जागरूकता लाना है.
 
 न्याय सहयोग, झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा संचालित नि:शुल्क हेल्पलाइन नंबर 18003457019 से प्राप्त कर सकते हैं. इस माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए संबद्ध अधिवक्ता से संपर्क स्थापित किया जा सकता है. इस केंद्र में स्थापित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा का उपयोग आम लोग समेत झालसा/डालसा द्वारा किसी कार्य की जांच कर उचित जवाब देने के लिए किया जा सकता है.
वन स्टॉप सेंटर जैसा कार्य करता है विधिक सेवा केंद्र
ग्रामीणों को मुफ्त में मूलभूत विधिक सेवाएं मिले, इसी को ध्यान में रखते हुए विधिक सेवा केंद्र बनाया गया है. इसके तहत सरकारी खर्च पर वकील, कोर्ट फीस के लिए खर्च, अभिलेखों यानी कागजातों को तैयार करने का खर्च, गवाहों को आने-जाने का खर्च, मुकदमें से संबंधित अन्य जरूरी खर्च की सेवाएं विधिक सेवा के अंतर्गत प्रदान की जाती हैं. यहां पैनल अधिवक्ता तथा पारा लीगल वोलेंटियर की सेवाएं मिलेंगी. यह केंद्र सभी कानूनी सेवाओं के लिए एकल खिलाड़ी के रूप में काम करता है.
 
यहां लोगों को कानूनी समस्याओं के समाधान के अलावा योजनाओं का लाभ पाने में भी मदद की जाती है. यह केंद्र सातों दिन कार्य करता है. कार्य अवधि सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक है. इस केंद्र को वन स्टॉप सेंटर की तरह कार्य करना होता है. साथ ही सभी वंचित और कतार के अंतिम व्यक्ति की न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करायी जाती है. 
 
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण यानी नालसा
 
समाज के कमजोर तबकों को मुफ्त कानूनी सेवाएं उपलब्ध हों, इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण यानी नालसा का गठन हुआ है. 
इसके तहत कानूनी सहायता कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की निगरानी, मूल्यांकन तथा कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए नीतियां और सिद्धांत बनाये गये. हर राज्य में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा हर हाइकोर्ट में हाइकोर्ट विधिक सेवा समिति गठित की गयी. सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति कानूनी सेवा कार्यक्रम को लागू करने के लिए गठित की गयी, क्योंिक यह भारतीय शीर्ष अदालत से संबद्ध है. 
 
एनएएलएसए ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के लिए नीतियां, सिद्धांत और दिशा-निर्देश तय किये तथा उनके लिए प्रभावी एवं आर्थिक योजनाएं बनायी, ताकि देशभर में कानूनी सेवाएं कार्यक्रम लागू हों. इसके तहत योग्य व्यक्तियों को मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रदान करना, विवादों के सौहार्द्रपूर्ण हल के लिए लोक अदालतों का आयोजन और ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता शिविरों का आयोजन करना मुख्य है.