aamukh katha

  • May 10 2017 1:04PM

अधिकार संपन्न पंचायत की दूसरी पारी, अपने अधिकारों को जाने पंचायत जनप्रतिनिधि

अधिकार संपन्न पंचायत की दूसरी पारी, अपने अधिकारों को जाने पंचायत जनप्रतिनिधि
 डॉ.विष्णु राजगढ़िया
झारखंड में पंचायती राज के लिए दूसरी बार चुनाव दिसंबर 2015 में संपन्न हुए. पहली बार दिसंबर 2010 में हुए चुनावों के बाद पंचायती राज प्रतिनिधियों को अधिकारों एवं दायित्वों के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ी थी, लेकिन पिछले पांच साल में 14 विभागों द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को सौंपे गये महत्वपूर्ण अधिकारों के कारण इस बार पंचायत की दूसरी पारी में जीत कर आये प्रतिनिधियों के लिए काफी संभावनाएं हैं. हालांकि, हाल के दिनों में कतिपय प्रतिनिधियों द्वारा यह भ्रम फैलाया गया है कि पंचायतों को अधिकार नहीं मिले हैं. ऐसा कहनेवाले या तो पंचायतों को मिले अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं रखते या फिर जान-बूझकर पंचायतों को कमजोर करने के लिए भ्रम फैला रहे हैं. उल्लेखनीय है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा प्रारंभ में ही पंचायत प्रतिनिधियों को महत्वपूर्ण कार्य सौंप दिये गये थे. पंचायती राज लागू होने के बाद पंचायतों को फंड, फंक्शन एवं फंक्शनरीज की शक्तियां देना एक आवश्यक कदम है. संविधान के अनुच्छेद 243 (जी) में पंचायतों को 29 विषयों की शक्ति देने का उल्लेख किया गया है. इस अनुच्छेद की कंडिका-बी में सामाजिक न्याय एवं आर्थिक विकास के लिए 11वीं अनुसूची से संदर्भित शक्तियां देने की बात कही गयी है. संविधान के उक्त प्रावधान एवं 11वीं अनुसूची के तहत 29 विषयों की सूची दी गयी है. उपरोक्त प्रावधानों के अंतर्गत झारखंड पंचायत राज अधिनियम की धारा 75, 76 एवं 77 में क्रमशः ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद को इन विषयों से संबंधित कार्य करने की शक्ति का प्रावधान है. 
 

 पंचायतों को महत्वपूर्ण िवभागों में मिली शक्तियां
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग
मुखिया उप-स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष होंगे. उप मुखिया इसके उपाध्यक्ष तथा एएनएम को सदस्य सचिव का दायित्व होगा.
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के क्रियान्वयन के लिए हर प्रखंड में प्रखंड स्वास्थ्य मिशन बनाया जायेगा. प्रखंड प्रमुख इसके अध्यक्ष होंगे. अन्य पंचायत प्रतिनिधि भी इस समिति में होंगे.
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रोगी कल्याण समिति तथा अस्पताल प्रबंधन समिति में पंचायतों का प्रतिनिधित्व होगा.
सदर अस्पताल की रोगी कल्याण समिति तथा अस्पताल प्रबंधन समिति में जिला परिषद सदस्यों का प्रतिनिधित्व रहेगा.
पंचायत में स्वास्थ्य संबंधी सभी विषयों का सर्वेक्षण करके ग्राम पंचायत सभी आंकड़ों का डाटाबेस बना कर पंचायत समिति को भेजेगी.
ग्राम पंचायत डाटाबेस के आधार पर पंचायत समिति द्वारा प्रखंड स्तरीय डाटाबेस तैयार किया जायेगा.
प्रखंड स्तरीय डाटाबेस के आधार पर जिला परिषद द्वारा जिला स्तरीय डाटाबेस बनाया जायेगा.
ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति तथा एचएससी स्वास्थ्य समिति के सहयोग से ग्राम पंचायत द्वारा एक स्वास्थ्य योजना बनायी जायेगी.
प्रखंड प्रमुख की अध्यक्षता में सेमिनार एवं कार्यशाला करके ग्राम स्वास्थ्य योजनाओं पर विचार किया जायेगा .
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक ऐसे आयोजन का समन्वयक होगा. इस क्रम में प्रखंड हेल्थ एक्शन प्लान बनाया जायेगा.
सभी प्रखंडों के ब्लॉक हेल्थ एक्शन प्लान के आधार पर जिला परिषद द्वारा जिला हेल्थ एक्शन प्लान बनाया जायेगा. जिला कार्यक्रम प्रबंधक इसका समन्वयक होगा. जिला परिषद द्वारा अनुमोदन के बाद इस प्लान को सिविल सर्जन के माध्यम से राज्य स्तर पर एनआरएचएम को भेजा जायेगा.
पंचायत, प्रखंड तथा जिला स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी किसी अधिसंरचना के निर्माण हेतु उपयुक्त जमीन का चयन क्रमशः ग्राम पंचायत, प्रखंड समिति तथा जिला परिषद द्वारा किया जायेगा. इन कार्यों में स्थानीय राजस्व एवं स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग मिलेगा.
स्वास्थ्य अधिसंरचनाओं के रख-रखाव, मरम्मत एवं संरक्षण में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका होगी.
जिले के समुचित क्षेत्र में नया अस्पताल खोलने के संबंध में जिला परिषद द्वारा अनुशंसा की जायेगी.
पंचायत समिति तथा जिला परिषद को यह अधिकार होगा कि स्वास्थ्य विभाग संबंधी किसी निर्माण कार्य या किसी परिसंपत्ति के संबंध में किसी शिकायत की जांच करे. इसके लिए उनके द्वारा सक्षम तकनीकी लोगों की सहायता ली जायेगी. इस संबंध में पंचायत समिति अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन या जिला प्राधिकार को देगी. जिला परिषद अपनी रिपोर्ट उपायुक्त अथवा राज्य सरकार को देगी.
स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न कार्यक्रमों की योजना बनाने, प्रचार-प्रसार तथा क्रियान्वयन में पंचायत राज संस्थाओं की भागीदारी होगी. लाभुकों के चयन में भी उनकी भूमिका होगी.
स्वास्थ्य संबंधी सामग्रियों के वितरण, स्कूलों में स्वास्थ्य कार्यक्रम, ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस इत्यादि में समन्वय में पंचायतों की अहम भूमिका होगी.
स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों, एएनएम, नर्स, सहिया इत्यादि के कार्यों का पर्यवेक्षण ग्राम पंचायत द्वारा किया जायेगा.
प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य कर्मियों, डाॅक्टर, एएनएम, नर्स, पारा मेडिकल कर्मी इत्यादि के कार्यों का पर्यवेक्षण पंचायत समिति द्वारा किया जायेगा.
जिला स्तरीय स्वास्थ्य कर्मियों, डाॅक्टर, एएनएम, नर्स, पारा मेडिकल कर्मी, जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई इत्यादि के कार्यों का पर्यवेक्षण जिला परिषद द्वारा किया जायेगा.
ग्रामसभा के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की समुदाय आधारित निगरानी, सोशल ऑडिट तथा जनसंवाद करके ग्राम पंचायत द्वारा इसकी रिपोर्ट पंचायत समिति को भेजी जायेगी. पंचायत समिति भी इन आयोजनों का पर्यवेक्षण करेगी तथा पंचायतों की रिपोर्ट के आधार पर प्रखंड स्तरीय अनुशंसा रिपोर्ट तैयार करेगी. पंचायत समिति द्वारा ऐसे मामलों में सुधार संबंधी समुचित कदम भी उठायें जायेंगे.
सोशल ऑडिट के लिए जिला परिषद योजना बनायेगी तथा इसका पर्यवेक्षण करेगी.
जिला स्तरीय समुदाय आधारित निगरानी एवं जन सुनवाई की अध्यक्षता जिला परिषद अध्यक्ष द्वारा की जायेगी. इसमें आये मामलों पर समुचित सुधार संबंधी कदम उठाने तथा सरकार को अनुशंसा भेजने का दायित्व भी जिला परिषद को होगा.
तीनों स्तर की पंचायतों द्वारा 12 लाख रुपये से कम वार्षिक बिक्रीवाले छोटे खाद्य विक्रेताओं का निबंधन किया जायेगा. यह कार्य एफएसएसए लाइसेंस एवं निबंधन नियमावली के तहत किया जायेगा.
जिला स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी कर्मियों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में जिला परिषद अध्यक्ष को सदस्य बनाया जायेगा.
स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण संबंधी कार्यक्रमों में पंचायतों द्वारा पर्यवेक्षण एवं सहयोग किया जायेगा.
स्वास्थ्य उपकेंद्र के सभी कर्मियों का वेतन मुखिया द्वारा निर्गत उपस्थिति प्रमाण पत्र के आधार पर मिलेगा.
स्वास्थ्य उपकेंद्र के सभी कर्मियों के आकस्मिक अवकाश के लिए चिकित्सा पदाधिकारी की अनुशंसा के आधार पर ग्राम पंचायत द्वारा मंजूरी दी जायेगी. 
 
प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य कर्मियों के कार्यों एवं उपस्थिति की निगरानी प्रखंड प्रमुख द्वारा करके जिला स्तर पर रिपोर्ट भेजी जायेगी.
प्रखंड स्तर के अराजपत्रित स्वास्थ्य कर्मियों के आकस्मिक अवकाश के लिए चिकित्सा पदाधिकारी की अनुशंसा के आधार पर प्रखंड प्रमुख द्वारा मंजूरी दी जायेगी.
 
जिला स्तरीय स्वास्थ्य कर्मियों के कार्यों एवं उपस्थिति की निगरानी जिला परिषद द्वारा करके उपायुक्त एवं सिविल सर्जन को रिपोर्ट भेजी जायेगी .
 
जिला स्वास्थ्य सोसाइटी के तहत कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों के समुचित नियोजन के संबंध में जिला परिषद सुझाव दे सकेगी.
स्वास्थ्य कर्मियों का जिले के अंदर स्थानांतरण के संबंध में जिला परिषद अपना सुझाव जिला स्वास्थ्य सोसाइटी को दे सकेगी.
उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर मुखिया की अध्यक्षता में गठित स्वास्थ्य समिति को दस हजार रुपये का अनटाइड फंड तथा उप स्वास्थ्य केंद्र की रख-रखाव के लिए अनुदान की राशि प्राप्त होगी.
 
ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति के व्यय की निगरानी तथा ग्राम हेल्थ एक्शन प्लान बनाने का अधिकार ग्राम पंचायत को होगा.
प्रखंड स्तर अनटाइड फंड तथा अस्पताल प्रबंधन समिति के फंड का सदुपयोग ब्लॉक मिशन के पर्यवेक्षण में होगा.
 
जिला अस्पताल प्रबंधन सोसाइटी तथा जिला स्वास्थ्य सोसाइटी के खर्च की निगरानी जिला परिषद द्वारा की जायेगी.
पंचायत, प्रखंड एवं जिला स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी सभी केंद्रों के खर्च एवं लेखा की निगरानी संबंधित स्तर की पंचायत संस्था द्वारा की जायेगी. व्यय संबंधी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जायेगा. सभी स्तरों पर वित्तीय समीक्षा, अंकेक्षण, उपयोगिता प्रमाण पत्र इत्यादि ससमय उपलब्ध कराने में भी पंचायतों की अहम भूमिका होगी.
 
मानव संसाधन विभाग (शिक्षा) 
ग्राम पंचायत के कार्य 
अपनी पंचायत के सभी विद्यालयों का एक रजिस्टर तैयार करना तथा उस रजिस्टर काे लगातार अद्यतन करना.
अपनी पंचायत के सभी प्राथमिक विद्यालयों के मानव संसाधनों तथा उनमें उपलब्ध सुविधाओं का डाटाबेस तैयार करना.
विद्यालय प्रबंध समिति की भागीदारी से सर्वशिक्षा अभियान योजना सहित शिक्षा योजनाएं बनाना.
नये प्राथमिक विद्यालयों के लिए भूमि का चयन करना, विद्यालय प्रबंध समिति के सहयोग से भवन बनाना और सभी विद्यालयों का संरक्षण करना.
स्कूल में सभी बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना.
प्राथमिक शिक्षा को बीच में ही छोड़ देने को रोकने का प्रयास करना.
विद्यालय प्रबंध समिति के माध्यम से लाभुकों का चयन करना, छात्रवृत्ति बांटना, पढ़ने और सीखने की सामग्री का वितरण करना.
मध्याह्न भोजन बनाने और वितरण संबंधी काम का पर्यवेक्षण करना.
प्राथमिक स्कूलों का सोशल ऑडिट करने तथा सर्वशिक्षा अभियान एवं प्रौढ़ शिक्षा के लिए ग्रामसभा करना.
पंचायत समिति के कार्य 
ग्राम पंचायत के आंकड़ों का संकलन करना.
सर्वशिक्षा अभियान तथा प्रौढ़ शिक्षा के कार्यान्वयन का पर्यवेक्षण करना.
जहां विद्यालय नहीं है, वैसे क्षेत्रों का चयन करके वहां विद्यालय की सुविधा सुनिश्चित करना.
शिक्षा बीच में ही छोड़नेवाले छात्र-छात्राओं की पहचान कर उन्हें पुनः विद्यालय वापस लाना.
जिला परिषद के कार्य 
पंचायत समितियों के आंकड़ों को समेकित करना.
सर्वशिक्षा अभियान योजनाओं सहित जिला योजना बनाना.
सोशल ऑडिट की रिपोर्ट पर कार्रवाई करना.
जिले में प्राथमिक शिक्षा, सर्वशिक्षा अभियान तथा प्रौढ़ शिक्षा संबंधी कार्यकलापों का पर्यवेक्षण करना.
निरीक्षण का अधिकार 
ग्राम पंचायत, पंचायत समिति तथा जिला परिषद के निर्वाचित पदाधिकारी अपने क्षेत्र के प्रारंभिक विद्यालयों का निरीक्षण कर सकेंगे.
उनकी निरीक्षण टिप्पणी के आलोक में विद्यालय प्रबंध समिति के द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.
कार्मिक पर पंचायती राज संस्थाओं की शक्तियां 
शिक्षण कार्यों एवं कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए पंचायत समिति द्वारा आयोजित बैठकों में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी भाग लेंगे एवं समिति को वांछित जानकारी उपलब्ध करायेंगे.
जिला परिषद् द्वारा आयोजित ऐसी समीक्षा बैठकों में जिला शिक्षा अधीक्षक भाग लेकर वांछित जानकारी उपलब्ध करायेंगे.
जिला शिक्षा अधीक्षक एवं अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी के कार्यों के संबंध में जिला परिषद् कोई भी प्रतिवेदन राज्य सरकार को भेज सकेगी तथा आवश्यक अनुशंसा कर सकेगी.
प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक ग्राम पंचायत के अधीन रहकर अपना कार्य करेंगे.
प्राथमिक विद्यालयों के पारा शिक्षक का भी नियंत्रण प्राधिकार ग्राम पंचायत होंगी. सभी पारा शिक्षक ग्राम पंचायत के तहत कार्य करेंगे.
प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा शर्ते व लाभ पूर्व लागू नियमों के अनुसार रहेंगे.
प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने का दायित्व राज्य सरकार का होगा.
सेवानिवृति, निलंबन, त्यागपत्र आदि के कारण शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने का दायित्व राज्य सरकार का होगा.
प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों की उपस्थिति का प्रमाणन, छुट्टियों की मंजूरी और यात्रा कार्यक्रमों का अनुमोदन मुखिया करेंगे.
प्राथमिक विद्यालयों के पारा शिक्षकों की उपस्थिति का प्रमाणन मुखिया करेंगे.
ग्राम पंचायत अपने क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को लघु दंड देने की अनुशंसा जिला शिक्षा अधीक्षक से कर सकेगी.
पंचायत के कोष 
प्राथमिक विद्यालयों की प्रबंध समिति को हस्तांतरित कोष का पर्यवेक्षण पंचायती राज संस्थाएं करेंगी.
पंचायत इन शक्तियों का उपयोग करते समय झारखंड एवं भारत सरकार के वित्तीय नियमों, दिशा-निर्देशों एवं निर्णयों का पालन करेंगी.
स्थानांतरित कर्मचारियों के वेतन और भत्ते को आहरित करने संबंधी काम विभाग प्रमुख, निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी जारी रखेंगे. स्थानांतरित कर्मचारियों के वेतन तथा भत्ते पहले की तरह उसी खाते से आहरित किये जायेंगे.
प्रशासी विभाग के द्वारा अनटाइड फंड के रूप में प्राथमिक शिक्षा की राज्य प्रायोजित योजनाओं के योजना बजट की राशि का न्यूनतम पांच प्रतिशत राशि, जो निर्धारित अनुमान के अंतर्गत होगी, जिला परिषद् को उपलब्ध करायी जायेगी.
इस कोष से लिये जाने योग्य योजनाओं की रूपरेखा प्रशासी विभाग द्वारा निर्धारित की जायेगी.
इस राशि का उपबंध, आवंटन एवं निकासी आदि की प्रक्रिया वित्त विभाग के परामर्श से निर्धारित की जायेगी.
कृषि एवं गन्ना विभाग
ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद के कार्य 
कृषि कार्य जैसे-बीज की आवश्यकता का आकलन एवं वितरण, उर्वरक का आकलन एवं वितरण, खाद्यान्न अधिप्राप्ति व भंडारण, अन्य कृषि उपादानों, उपकरणों का वितरण एवं अन्य कृषि कार्यों के सफल कार्यान्वयन का अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण.
कृषि कार्यों के सफल कार्यान्वयन के लिए सुपात्र लाभान्वितों का चयन करना.
कृषकों को कृषि ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना एवं किसान क्रेडिट कार्ड वितरण. 
जिला, प्रखंड, पंचायत स्तरीय प्रचार-प्रसार, प्रदर्शनी, कार्यशाला इत्यादि का आयोजन कराना 
कृषक को फसल बीमा कराने के लिए प्रेरित करना व भुगतान सुनिश्चित कराना 
जनसेवक के संबंध में पंचायत की शक्तियां एवं कार्य 
जनसेवकों की नियुक्ति, अंतः प्रखंड स्थानांतरण तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई - जिला परिषद द्वारा.
जनसेवकों पर प्रशासनिक नियंत्रण, अंतः पंचायत स्थानांतरण तथा सभी प्रकार के अवकाश- पंचायत समिति द्वारा.
वार्षिक चारित्रिक अभियुक्ति लेखन- पंचायत समिति एवं जिला परिषद द्वारा.
प्रखंड कृषि पदाधिकारी व समकक्ष पदों के संबंध में पंचायत की शक्तियां
इन पदाधिकारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण का दायित्व जिला परिषद एवं पंचायत समिति का होगा.
इनके आकस्मिक अवकाश का दायित्व पंचायत समिति को दिया गया है.
इनके वार्षिक चारित्रिक अभियुक्ति लेखन का कार्य जिला परिषद करेगी.
 
जिला स्तर के कृषि पदाधिकारी के संबंध में पंचायत की शक्तियां 
जिला कृषि पदाधिकारी, जिला उद्यान पदाधिकारी एवं जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी पर प्रशासनिक नियंत्रण एवं आकस्मिक अवकाश का दायित्व जिला परिषद का होगा.
 
कृषि के संबंध में पंचायत की निधि 
सभी तरह के बीज अनुदान, कृषि यंत्र एवं उपकरण अनुदान, माइक्रो एरिगेशन उपकरण अनुदान तथा कृषि संबंधी अन्य देय अनुदान की निधि का उपयोग जिला परिषद के माध्यम से होगा.
 
प्रचार-प्रसार, कार्यशाला, सेमिनार, कृषि मेला इत्यादि आयोजन की निधि का उपयोग जिला परिषद एवं पंचायत समिति के स्तर से होगा.
किसी जिले में अनुदान या अन्य राशि की विमुक्ति में कोई समस्या हो, तो विभाग के अनुमोदन के बाद सक्षम अधिकारी द्वारा राशि की विमुक्ति के लिए निर्देश दिये जायेंगे, ताकि योजना बाधित नहीं हो.
 
समाज कल्याण महिला एवं बाल विकास विभाग 
पंचायतों के कार्य 
1. आंगनबाड़ी केंद्र भवन का अनुरक्षण, मरम्मति एवं सुसज्जीकरण : इन कार्यों की राशि जिला परिषद को उपलब्ध करायी जायेगी. इसका कार्यान्वयन पंचायती राज संस्था के द्वारा अपने नियंत्रण में सम्पादित कराया जायेगा.
 
2. आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित गतिविधियां : आंगनबाड़ी केंद्र को समय पर खोलने और नियमित संचालन में पंचायत निगरानी रखेगी और इसका नियमित अनुश्रवण करेगी. किसी अनियमितता के संदर्भ में अपनी रिपोर्ट सीडीपीओ के पास अनुशंसा सहित भेजेगी. 
 
3. लाभुकों का चयन : आंगनबाड़ी में पूरक पोषाहार के लिए सही लाभुकों का चयन करने, तीन वर्ष से छह वर्ष तक बच्चों को गर्म खाना एवं गर्भवती एवं धातृ माताओं तथा छह माह से तीन वर्ष के बच्चों को टीएचआर टेक होम राशन वितरण में पंचायत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. सही लाभुकों को ही लाभ मिले तथा आंगनबाड़ी केंद्र में उनकी शत-प्रतिशत उपस्थिति हो, इसके लिए पंचायत प्रतिनिधि सक्रिय योगदान देंगे तथा सेविका एवं सहायिका को आवश्यक दिशा-निर्देश को दे सकेंगे.
 
4. पूरक पोषाहार कार्यक्रम : भारत सरकार के निर्धारित मापदंड के अनुरूप पूरक पोषाहार की उपलब्धता व गुणवत्ता की जांच करने की जवाबदेही पंचायत की होगी. पंचायत गड़बड़ी की जांच करके सीडीपीओ को सुझाव एवं अनुशंसा भेज सकती है.
 
5. स्कूल पूर्व शिक्षा : आंगनबाड़ी केंद्र में स्कूल पूर्व शिक्षा के संचालन में पंचायत सहयोग एवं सुझाव प्रदान करेगी. सरकार द्वारा आपूर्ति की गयी स्कूल पूर्व शिक्षा किट्स के प्रयोग को बढ़ावा देंगे. 
 
6. प्रतिरक्षण : ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर पंचायत प्रतिनिधि अपनी उपस्थिति में टीकाकरण यानी प्रतिरक्षण को बढ़ावा देने में सहयोग करेंगे. टीएचआर को अपनी निगरानी में सही लाभुकों के बीच सही मात्रा में वितरण कराना तथा वितरण सूची पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना भी पंचायत प्रतिनिधियों का कर्तव्य है.
 
7. पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा : कुपोषण के खिलाफ अभियान के तहत शत-प्रतिशत बच्चों की स्क्रीनिंग एवं कुपोषित बच्चों को दोगुना पोषाहार वितरण तथा क्रिनिकल ट्रिटमेंट के लिए चिह्नित बच्चों को एमटीसी भेजने व वापस आने के बाद पहले, दूसरे व तीसरे फाॅलोअप के लिए आंगनबाड़ी केंद्र स्तर पर निगरानी पंचायत की प्रमुख भूमिका होगी. समुदाय आधारित जागरूकता में भी पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.
 
8. हेल्थ चेकअप : आंगनबाड़ी केंद्र पर एएनएम एवं स्वास्थ्य सहिया के काम की भी पंचायत द्वारा निगरानी रखी जायेगी. मेडिकल किट उपयोग के लिए लाभुकों को प्रेरित करना तथा स्टॉक की जांच भी पंचायत द्वारा की जायेगी. 
 
9. मुख्यमंत्री कन्यादान एवं लक्ष्मी लाडली योजना : इन योजनाओं में लाभुकों के चयन में पंचायत सक्रिय भागीदारी निभायेगी, ताकि योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थी को प्राप्त हो सके. सभी योग्य लाभुकों को इसका लाभ मिले, इसमें पंचायती राज संस्था की सक्रिय भूमिका जरूरी है.
 
10. स्वामी विवेकानंद निशक्त स्वावलंबन प्रोत्साहन योजना : पांच वर्ष से ऊपर के निःशक्त बच्चों को इस योजना से जोड़ने में सहयोग व लाभुकों को बैंक खाते में राशि पहुंचने की जांच पंचायत करेगी तथा संबंधित सुझाव परियोजना कार्यालय को देगी.
 
11. विकलांग छात्रवृति योजना : इस योजना में भी लाभुकों को चयन में पंचायत सक्रिय भागीदारी निभायेगी. वास्तविक लाभुक को लाभ नहीं मिलने पर उनकी अनुशंसा सीडीपीओ कार्यालय में भेजी जायेगी. लाभुकों पर निगरानी रखेगी, ताकि वास्तविक लाभुकों को योजना का लाभ नियमित रूप से प्राप्त हो सके.
 
12. डायन प्रथा उन्मूलन : इस सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में परियोजना व आंगनबाड़ी में संचालित कार्यक्रमों में पंचायत की भागीदारी व जागरूकता.
13. अंतरजातीय विवाह : अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा अनुदान राशि का वास्तविक लाभ दिलाने एवं लाभार्थियों के चयन में परामर्श देने में पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.
 
14. दिव्यांगों के लिए विशेष उपकरण : दिव्यांगों के लिए विशेष उपकरण का वितरण जिला स्तर पर किया जाता है. इसके संबंध में पंचायत प्रतिनिधि अपनी अनुशंसा भेजेंगे तथा लाभुकों की निगरानी भी करेंगे. 
 
15. मूक बधिर विद्यालय, नेत्रहीन विद्यालय, वृद्धा आश्रम, विकलांग विद्यालय, महिला छात्रावास, अनाथालय : विभिन्न जिला मुख्यालय में स्थापित सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा संचालित ऐसे केंद्रों का निगरानी एवं अनुश्रवण पंचायती राज संस्था समय-समय पर करेगी. 
 
कार्मिक 
आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका का चयन : आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका का चयन ग्रामसभा के स्तर पर किया जाता है. चयन के उपरांत पंचायत समिति एवं जिला परिषद को सूचित कर दिया जायेगा. 
 
कोष 
आंगनबाड़ी केंद्र भवन का अनुरक्षण, मरम्मति व सुसज्जीकरण : इस मद में प्रावधान बजट की राशि जिला परिषद को उपलब्ध करायेगी. जिला परिषद की जिम्मेवारी होगी कि पंचायत समिति के सहयोग से वैसे आंगनबाड़ी केंद्र भवन, जिसका मरम्मत होना है, उन भवनों को चिह्नित कर इसके लिए सक्षम प्राधिकार से प्राक्कलन पर तकनीकी स्वीकृति प्राप्त कर उपलब्ध कराये गये आवंटन से मरम्मति कार्य करायेंगे. इस योजना पर खर्च राशि व भौतिक उपलब्धि की सूचना जिप द्वारा समाज कल्याण, महिला व बाल विकास विभाग, झारखंड को उपलब्ध करायी जायेगी. 
 
विभागीय समितियां 
ग्राम पंचायत, पंचायत समिति व जिला स्तर के सभी समितियों को समायोजित करना : जिला, प्रखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर गठित की गयी समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग संबंधी सभी विभागीय समितियों में यथानुसार, पंचायतों, पंचायत समिति एवं जिला परिषद के सदस्यों को शामिल किया जायेगा.
 
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में पंचायतों की भूमिका 
पेयजल व स्वच्छता विभाग की योजनाओं में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण है. इन योजनाओं के संचालन व क्रियान्वयन में जन-भागीदारी सुनिश्चित की गयी है. पंचायतों को कार्य और निधि सौंपे गये हैं. संपूर्ण स्वच्छता अभियान व राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम में योजना बनाने और क्रियान्वयन की जिम्मेवारी पंचायतों की है. 
 
1. जिला पेयजल स्वच्छता मिशन :  जिला पेयजल स्वच्छता मिशन, जिले में शासी निकाय के तौर पर कार्य करेगी. जिले में पेयजल स्वच्छता से संबंधित मामलों पर राज्य के नीति के अलावा नीतिगत फैसले लेगी. क्रियान्वयन की प्रक्रिया और वित्तीय आवंटन को संतुष्ट करेगी तथा मिशन के प्रतिवेदन पर विचार करेगी. जिप अध्यक्ष इस मिशन के अध्यक्ष होंगे. बैठक करना व एजेंडा पेश करना मिशन अध्यक्ष की जिम्मेवारी होगी. उपायुक्त इस मिशन के कार्यकारी अध्यक्ष होंगे. मिशन जिले में पेयजल एवं स्वच्छता संबंधी कार्यक्रमों को लागू करनेवाला निकाय है. राज्य सरकार द्वारा पेयजल एवं स्वच्छता कार्यक्रमों की राशि मिशन को दी जाती है. 
 
2. ग्राम पेयजल स्वच्छता समिति :  हर गांव में एक ग्राम पेयजल स्वच्छता समिति (वीडब्लूएससी) का गठन होना है. इसमें नौ अथवा ग्यारह सदस्य होंगे. इसके सदस्यों का चयन ग्रामसभा की विशेष बैठक में होगा. ग्रामसभा एक जल सहिया का भी चयन करेगी. जल सहिया महिला होगी और ग्राम पेयजल स्वच्छता समिति की कोषाध्यक्ष के तौर पर कार्य करेगी. पानी भरक समुदाय की महिला को सहिया चयन में प्राथमिकता दी गयी है. इस समिति के सदस्यों में कम-से-कम 50 फीसदी महिला सदस्यों का होना अनिवार्य है.