aamukh katha

  • Jul 4 2019 11:26AM

पीवीटीजी डाकिया योजना, राशन आपके द्वार

पीवीटीजी डाकिया योजना, राशन आपके द्वार

जंगलों व पहाड़ों पर रहनेवाले विलुप्तप्राय आदिम जनजाति परिवारों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर रघुवर सरकार ने वर्ष 2017 में पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) डाकिया योजना की शुरुआत की थी, ताकि कोई भी परिवार अनाज के अभाव में भूखा सोने पर मजबूर नहीं हो. राशन के लिए उसे डीलर का चक्कर नहीं लगाना पड़े. पॉश मशीन में अंगूठा लगाने समेत अन्य प्रक्रियाओं से मुक्ति दिलाते हुए उन्हें द्वार पर हर माह पैकेटयुक्त 35 किलोग्राम चावल उपलब्ध कराना है. जमीनी हकीकत ये है कि डाकिया योजना का चावल इनके लिए संजीवनी साबित हो रहा है. आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन झारखंड में यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर काफी हद तक सफल साबित हो रही है. ऊंचे पहाड़ों पर बसे आदिम जनजाति परिवारों को हर माह चावल मिल रहा है. पंचायतनामा के इस अंक में आदिम जनजातियों की स्थिति, संख्या, जीवन संघर्ष और डाकिया योजना की जमीनी हकीकत बताने की कोशिश की गयी है. कल्याण विभाग और खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से मॉनिटरिंग पर और जोर दिया जाये, तो राज्य में मील का पत्थर साबित होगी राशन आपके द्वार वाली पीवीटीजी डाकिया योजना.