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  • Oct 1 2018 1:29PM

जनआंदोलन बना स्वच्छता अभियान

जनआंदोलन बना स्वच्छता अभियान

समीर रंजन

अपने आस-पास साफ-सफाई रखना हर किसी की जिम्मेदारी है. अगर हर व्यक्ति इसे अपना कर्तव्य समझे, तो हमारे आस-पास गंदगी नजर नहीं आयेगी. स्वच्छता को लेकर देश में व्यापक अभियान चल रहा है. झारखंड में भी 15 सितंबर से 02 अक्तूबर तक स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के जरिये पूरे राज्य में साफ-सफाई को एक आंदोलन का रूप दिया गया. स्वच्छ भारत मिशन के तहत 02 अक्तूबर, 2014 से शुरू हुआ स्वच्छता अभियान धीरे-धीरे अपने मुकाम पर पहुंचने लगा है. लोग जागरूक होने लगे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण व उसके उपयोग से होनेवाले लाभ से ग्रामीण परिचित होने लगे. इस अभियान में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं

स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम
स्वच्छ भारत अभियान के तहत पूरे देश में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम का आयोजन हुआ. 15 सितंबर से 02 अक्तूबर तक पूरे देश में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसका उद्देश्य हर सभी को किसी न किसी क्षेत्र में सफाई अभियान में सहयोग देना है. झारखंड में भी यह कार्यक्रम जोर-शोर से आयोजित हुआ. इससे न सिर्फ गंदगी साफ हुई, बल्कि जागरूकता से कई बीमारियों से बचने के उपाय भी बताये गये.

स्वच्छता सर्वेक्षण, 2018 में राज्य का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने, नियमित कचरा उठाव व उचित प्रबंधन के कारण झारखंड को बेस्ट परफॉर्मर राज्य का अवार्ड मिला है. यह अवार्ड स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर कार्य को लेकर मिला है. पिछले दो साल में स्वच्छता के प्रति गंभीरता दिखाने के कारण राज्य ने तेजी से इस मामले में छलांग लगायी है. स्वच्छता सर्वेक्षण, 2017 में राज्य को तीसरा स्थान मिला था, वहीं स्वच्छता सर्वेक्षण, 2016 में रैंकिंग के मामले में झारखंड काफी पीछे था, लेकिन साल 2018 के स्वच्छता सर्वेक्षण में राज्य सरकार ने बेहतर कार्य करते हुए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. इसके बाद महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ का स्थान रहा. इस सर्वे का मकसद शहरों में स्वच्छता के स्तर का आंकलन करना है.

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सिटीजन फीडबैक में मिला पुरस्कार
स्वच्छता के मामले में लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के कारण रांची को पहला स्थान प्राप्त हुआ. वहीं एक से तीन लाख की आबादीवाले शहरों में गिरिडीह को पहला स्थान मिला. इसके अलावा एक लाख से कम आबादी वाले मामले में क्लीनेस्ट सिटी के तौर पर बुंडू शहर को चुना गया. वहीं एक लाख से कम आबादीवाले मामले में इनोवेशन एंड बेस्ट प्रैक्टिस के तौर पर पाकुड़ का चयन हुआ.

स्वच्छता सर्वेक्षण, 2019 की तैयारी शुरू
स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 की तैयारी शुरू हो गयी है. जनवरी 2019 से देश के सभी शहरों में स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू होगा. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस सर्वेक्षण में राज्य को पहले पायदान पर लाने की अपील लोगों से की है. इससे कई फायदे होंगे. गंदगी से होनेवाले प्रति व्यक्ति द्वारा बीमारी पर प्रतिमाह खर्च होनेवाले औसतन 6500 रुपये की अतिरिक्त राशि की बचत होगी.

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स्वच्छ एवं स्वस्थ गांव के लिए पंचायतों की भूमिका
पंचायतों को गांव के संपूर्ण विकास के लिए काम करने का अधिकार है. गांव में प्रगति व खुशहाली लाने की जिम्मेदारी पंचायतों की है. गांव के विकास के लिए ग्रामीणों को साफ-सुथरा व स्वस्थ रखना जरूरी है. इसके लिए पंचायतों के पास कई अधिकार हैं. गांव-पंचायत को शौचमुक्त व स्वच्छ बनाने के लिए ग्रामसभा की बैठक जरूरी है. इस बैठक में खुले में शौच और गंदगी फैलाने से रोकने का प्रस्ताव पारित करना आवश्यक है. इसमें पंचायत प्रतिनिधियों एवं स्वच्छता समिति के सभी सदस्यों, पेयजल स्वच्छता संबंधी सभी कर्मियों, आंगनबाड़ी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी कर्मियों को शामिल होना है. ग्रामसभा बुलाने का दायित्व मुखिया का है. इसलिए स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण की विशेष ग्रामसभा बुलाने की सूचना मुखिया द्वारा जारी की जाती है. सामान्य क्षेत्र में मुखिया इसकी अध्यक्षता करेंगे. पेसा क्षेत्र में ग्राम प्रधान इस विशेष ग्रामसभा की अध्यक्षता करेंगे. इस विशेष ग्रामसभा में ग्रामीणों के साथ ही पेयजल एवं स्वच्छता, आंगनबाड़ी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं आदि से जुड़े सभी कर्मियों को बुलाया जाता है. विशेष ग्रामसभा में कई ऐजेंडों पर चर्चा की जाती है. इसके तहत स्वच्छता का महत्व, खुले में शौच एवं अशुद्ध जल से नुकसान, पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता की स्थिति, पंचायत का दायित्व, अपने गांव को स्वच्छ रखने पर विस्तार से चर्चा होती है.

स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण का संस्थागत ढांचा
1. जिला जल एवं स्वच्छता मिशन : इसके अध्यक्ष जिला परिषद के अध्यक्ष होते हैं. जिला जल एवं स्वच्छता समिति के अध्यक्ष जिले के उपायुक्त होते हैं. सदस्य सचिव कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा अन्य जिला स्तर के पदाधिकारीगण समिति के सदस्य होते हैं.
2.
प्रखंड संसाधन केन्द्र (बीआरसी) : हर जिले में एक एनजीओ का चयन होता है. वह प्रखंड संसाधन केंद्र का संचालन करता है. हर प्रखंड में एक समन्वयक तथा एक या दो संकुल समन्वयक होते हैं. इनके द्वारा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का सहयोग किया जाता है.
3.
ग्रामीण जल एवं स्वच्छता समिति : हर गांव में एक ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति बनायी गयी है. यह समिति स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण चलाती है. इसका अध्यक्ष मुखिया होते हैं. जल सहिया कोषाध्यक्ष हैं. समिति के खाते में उपलब्ध राशि की निकासी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता है.

खुले में शौचमुक्त गांव बनाने की प्रक्रिया :
अपने गांव को खुले में शौचमुक्त गांव बनाना है, तो सबसे पहले आपको ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के माध्यम से ग्राम स्तर पर बैठक करनी चाहिए. इस बैठक की अध्यक्षता मुखिया करेंगे. बैठक में गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने और हर एक घर में शौचालय का निर्माण हो, इस पर विस्तार से चर्चा होगी. इसके अलावा सभी परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय बनाने के लिए राजी करने, शौचालय निर्माण एवं तकनीक पर चर्चा कर सबकी सहमति लेने, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के रजिस्टर में बैठक की कार्यवाही लिखने, गांव का सर्वे करके सभी लाभार्थी की सूची तैयार करने, हर घर में शौचालय बनाने का प्रस्ताव तैयार करने, इसके लिए पराक्रमी राशि या अग्रिम राशि की मांग करने, प्रस्ताव की प्रति जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के कार्यालय में जमा कराने एवं मनरेगा अंतर्गत चयनित पंचायतों के प्रस्ताव की एक प्रति प्रखंड कार्यालय में मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी के पास जमा करके मनरेगा के तहत सहयोग की मांग करना मुख्य है.

कूड़ा-कचरा प्रबंधन
गांव में सफाई रहेगी, तो बीमारियां भी कम फैलेंगी. गांव को साफ रखना हम सभी की जिम्मेदारी है. गांव में कूड़ा प्रबंधन के लिए योजना बनाएं. कचरा डालने के लिए दो अलग-अलग कूड़ेदान बनाएं. उपघटित होनेवाला कचरा जैसे सब्जी, फल आदि घर के बाहर एक गड्ढे में डाल कर खाद बनाएं. इस खाद का उपयोग खेतों में सब्जी-फल उगाने के लिए किया जा सकता है.

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शौचालय निर्माण
शौचालय निर्माण को लेकर गांव-पंचायत में आधार रेखा सर्वेक्षण जरूरी है. इसमें यह पता लगाया जाता है कि गांव-पंचायत में कितने परिवार हैं, जिनके घर शौचालय का निर्माण होना है. साथ ही गरीबी रेखा से नीचे रहनेवाले लोगों की सूची बनाना जरूरी है. सर्वेक्षण के बाद तय सभी घरों में शौचालय निर्माण व गांव को साफ-सुथरा बनाने के लिए काम शुरू होता है.

गंदा पानी निकलने की व्यवस्था हो
दूषित पानी के प्रबंधन के लिए गांव में नालियां बनाना जरूरी है. इन नालियों को सोख्ता गड्ढे के माध्यम से बागीचों में भेजा जाना चाहिए.

साफ-सफाई रखना हम सभी का है कर्तव्य : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राजधानी रांची के नया टोला डिबडीह में राज्य स्तर पर सफाई अभियान का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि अपने आस-पास साफ-सफाई रखना, हम सभी का कर्तव्य है. स्वच्छता हर नागरिक के लिए जरूरी है. अगर हमारा मोहल्ला साफ-सुथरा रहेगा, तो हमारे यहां डायरिया, मलेरिया जैसी कोई बीमारी नहीं होगी. नया टोला से इस कार्यक्रम की शुरुआत से नया उत्साह मिला है, जो हमें और प्रेरणा देने का काम करेगा. राज्य को खुले में शौचमुक्त करने को लेकर भी कृतसंकल्पित हैं. इसके लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है. राज्य में बन रहे शौचालय का लोग शत-प्रतिशत उपयोग करें, इसके लिए जन जागरण अभियान चलाने पर जोर दिया जा रहा है.