aamukh katha

  • Mar 18 2019 6:11PM

काली खांसी से लेकर आंत रोग तक के इलाज में कारगर हैं पौधे

काली खांसी से लेकर आंत रोग तक के इलाज में कारगर हैं पौधे

पंचायतनामा डेस्क

जिला: रांची

रांची में राजभवन के ठीक सामने है नक्षत्र वन. वन विभाग द्वारा इसका संचालन किया जा रहा है. यहां झारखंड में पाये जानेवाले लगभग सभी तरह के औषधीय पौधे हैं. जिनसे गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज संभव है. अगर आप औषधीय पौधों की विस्तृत जानकारी चाहते हैं, तो नक्षत्र वन में आपका स्वागत है.

औषधीय पौधों का उपयोग जानिए
1.
सीज : इसके पत्ते और जड़ का औषधीय उपयोग होता है. यह सर्दी और कफ में इस्तेमाल किया जाता है. कान दर्द में यह दर्द निवारक का कार्य करता है.
2.
पीला भृंगराज : इसका फूल, पत्ता, जड़ और तना औषधि के लिए उपयोगी है. यह पीलिया रोग (जॉन्डिस) की अचूक दवा है. हर दिन सुबह खाली पेट पौधे को पीस कर पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है. इसके रस को तेल में पका कर उपयोग करने से बाल जड़ से मजबूत और काले हो जाते हैं. लीवर, किडनी और आंत के रोग के लिए यह हितकारी है. बच्चों की खांसी व गले की घरघराहट में यह काफी उपयोगी है.
3.
हरसिंगार : इसका पत्ता, छाल, बीज और फूल औषधि के लिए उपयोगी है. इसके पत्ते का उपयोग मलेरिया, खांसी, दमा और काले घने बाल उगाने के लिए किया जाता है.
4.
वच : यह स्मरण शक्ति बढ़ाने में कारगर है. इसके अलावा अनिद्रा, पेचिस, अतिसार जैसी कई गंभीर बीमारियों के इलाज में इसका इस्तेमाल किया जाता है.
5.
कपूर : इसके पत्ते का औषधीय उपयोग है. ब्लड प्रेशर नियंत्रण में यह उपयोगी है. सर्दी, ठंड, हैजा, टेटनस जैसी बीमारियों में इसका उपयोग किया जाता है. दांत दर्द को भी कपूर के पत्ते से ठीक किया जाता है.

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6. कल्पवृक्ष : कल्पवृक्ष के पत्ते का औषधि के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. यह स्कर्बी (त्वचा का ढीला होना) में लाभकारी है. इससे चिड़चिड़ापन भी दूर होता है. पेट के रोगों के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है.
7.
सोमराज : इसके बीज में औषधीय गुण पाये जाते हैं. इसका इस्तेमाल कृमिनाशक के तौर पर किया जाता है. चर्म रोग, बिच्छू और सांप डंसने पर उसके विष के प्रभाव को कम करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है.
8.
लाजवंती : इसे छुईमुई कहते हैं. इस पौधे के पत्ते, जड़ और तना का इस्तेमाल औषधि के लिए किया जाता है. बवासीर और बिच्छू के डंक में यह कारगर है.

जड़ी-बूटी से कई असाध्य रोगों का इलाज संभव है : आनंद तिवारी
नक्षत्र वन के औषधीय विशेषज्ञ आनंद तिवारी कहते हैं कि जड़ी-बूटी से असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं, लेकिन लोगों में इस बात को लेकर जागरूकता का अभाव है. औषधीय पौधों के मामले में झारखंड काफी समृद्ध है, पर सही देखरेख के अभाव में कई प्रजाति के पौधे विलुप्त होते जा रहे हैं, हालांकि नक्षत्र वन के माध्यम से विलुप्तप्राय हो चुके कई औषधीय पौधों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है.