aamukh katha

  • Apr 16 2018 1:34PM

पंचायत प्रतिनिधियों की पीड़ा, नहीं मिलता सहयोग

पंचायत प्रतिनिधियों की पीड़ा, नहीं मिलता सहयोग

पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनधियों की अपनी पीड़ा है. मंत्री और विधायकों के सहयोग के लिए

आइएएस अधिकारी हैं, तकनीकी एक्सपर्ट की फौज है, बावजूद इसके शत प्रतिशत परिणाम सामने नहीं

आते, वहीं तीसरी सरकार के प्रतिनिधियों के सहयोग के लिए कोई नहीं है. पंचायत सचिव व पंचायत

स्वयं सेवकों की बहाली हुई है, लेकिन एक साथ कई पंचायतों का प्रभार होने के कारण इनसे भी

अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता है

सरकार साथ दे, तभी साकार होगा बापू के ग्राम स्वराज का सपना : अजय कुमार सिंह

बोकारो की बुंडू पंचायत के मुखिया अजय कुमार सिंह कहते हैं कि तीन दशक बाद झारखंड में वर्ष 2010 में पंचायत चुनाव हुए. सात साल की छोटी अवधि में भी राज्य की कुछ पंचायतों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनायी है. ग्रामीणों की सहभागिता से गांवों की सूरत बदलने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है. मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, मिशन अंत्योदय समेत अन्य कई क्षेत्रों में कई पंचायतें अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर कार्य कर रही हैं. सरकार सही सोच के साथ पंचायतों को सहयोग और साधन उपलब्ध कराएं, तो पंचायतों की तस्वीर बदल जायेगी और बापू के ग्राम स्वराज का सपना भी साकार होगा.

 

सरकार की उदासीनता से पंचायतें नहीं हो पा रहीं मजबूत
मुखिया अजय सिंह कहते हैं कि झारखंड में पंचायतें उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण पंचायतें मजबूत नहीं हो पा रही हैं. कभी पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए कमेटी गठित कर दी जाती है, तो कभी आदिवासी विकास समिति व ग्राम विकास समिति का गठन कर दिया जाता है. कार्यपालिका व पंचायत प्रतिनिधियों के बीच समन्वय का अभाव के कारण भी विकास कार्य प्रभावित हो रहा है. पदाधिकारियों के असहयोग की वजह से राज्य की पंचायतों की आय अन्य राज्यों की तुलना में पांच फीसदी भी नहीं है.

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उचित प्रशिक्षण की व्यवस्था हो
बुंडू पंचायत के मुखिया कहते हैं कि पंचायत जनप्रतिनिधियों को उचित प्रशिक्षण देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
सरकार का निर्देश समय पर पंचायतों को मुहैया कराया जाए. इसमें घोर लापरवाही का खामियाजा जन प्रतिनिधियों को भुगतना पड़ता है.

 पंचायत जनप्रतिनिधियों की स्थिति

पद कुल पद पुरुष निर्वाचित महिला निर्वाचित
1.
मुखिया 4402 (वर्तमान में 4398) 2113 2289
2.
पंचायत समिति सदस्य 5423 2603 2820
3.
ग्राम पंचायत समिति सदस्य 54,330 25,698 28,632
4.
जिला परिषद 545 264 281

पंचायतों को मिली हैं 14 विभागों के 29 विषयों की शक्तियां
संविधान के अनुच्छेद 243 (जी) में पंचायतों को 29 विषयों की शक्तियां देने का उल्लेख किया गया है. झारखंड में अब तक पंचायती राज संस्थाओं को 14 विभागों के 29 विषयों के अधिकार व शक्तियां सौंपी गयी हैं.
1.
कृषि एवं गन्ना विकास विभाग
2.
मानव संसाधन विकास विभाग
3.
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग
4.
समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग
5.
पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग
6.
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग
7.
जल संसाधन विभाग
8.
उद्योग विभाग
9.
खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग
10.
खान एवं भूतत्व विभाग
11.
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग
12.
ग्रामीण विकास विभाग
13.
कल्याण विभाग एवं
14.
कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग

देश के पांच राज्यों में पंचायतों को मिला शत प्रतिशत अधिकार
पंचायती राज व्यवस्था के तहत पंचायतों को पूर्ण अधिकार देने की बात हर समय उठती है. देश के मात्र पांच राज्य ही ऐसे हैं, जिन्हें 73वें संविधान संशोधन के प्रावधानों के अनुरूप पंचायती राज संस्थाओं को शत-प्रतिशत अधिकार और शक्तियां सौंपी गयी हैं. ये राज्य हैं हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल व सिक्किम, हालांकि इस मामले में झारखंड की स्थिति तुलनात्मक तौर पर बेहतर है.

इन विभागों का मिला अधिकार
राज्य में कृषि, पशुपालन, डेयरी व पॉल्ट्री, मत्स्य पालन, भूमि सुधार, लघु वन उत्पाद, लघु सिंचाई, जल प्रबंधन, जलछाजन विकास, सामाजिक व कृषि वानिकी, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सहित लघु उद्योग, सांस्कृतिक गतिविधियों, पेयजल, शिक्षा, परिवार कल्याण, स्वास्थ्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सामाजिक कल्याण, अनुसूचित जाति व जनजाति सहित कमजोर वर्गों के कल्याण तथा महिला बाल विकास से संबंधित मामलों के अधिकार पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित कर दिये गये हैं. इनमें से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सहित लघु उद्योग, एससी-एसटी सहित कमजोर वर्गों के कल्याण और महिला बाल विकास से संबंधित मामलों के अधिकार बिहार ने अब तक पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित नहीं किये हैं.

अब भी कई विभागों का नहीं मिला अधिकार
ग्रामीण आवासन, बिजली वितरण सहित ग्रामीण विद्युतीकरण, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोत तथा खादी, ग्रामीण और कुटीर उद्योग आदि ऐसे विभाग हैं, जिनका अधिकार पंचायती राज संस्थाओं को नहीं मिला है.