aamukh katha

  • May 4 2019 11:28AM

पक्का मकान, सपने हो रहे पूरे

पक्का मकान, सपने हो रहे पूरे

अपने पक्के घर की ख्वाहिश हर किसी की होती है. वह झुग्गी-झोपड़ियों में रहनेवाला गरीब-गुरबा हो, मिट्टी के कच्चे घरों में रहने को मजबूर आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति हो या मध्यमवर्गीय परिवार. अपनी छत की चाहत हर किसी की होती है. कड़ी मशक्कत के बावजूद कुछ के सपने पूरे होते हैं, तो अधिकतर के अपने घर के सपने आजीवन धरे के धरे रह जाते हैं. कई गरीब-बेबस परिवारों की तो पीढ़ियां गुजर जाती हैं, लेकिन अपना घर नसीब नहीं हो पाता. आर्थिक रूप से तंग लोगों के अपने घर के सपने अब पूरे होने लगे हैं. वर्ष 2022 तक देश को बेघरमुक्त बनाने का लक्ष्य है. हर किसी को घर उपलब्ध कराना है. इसी दिशा में झारखंड में भी बेघरों को घर दिया जा रहा है. इससे गरीब परिवारों के चेहरे खिल उठे हैं. अपना घर पक्का पाकर बेघरों के सपने पूरे हो रहे हैं.