aamukh katha

  • Mar 6 2018 1:45PM

स्कूली बच्चों को हॉकी का गुर सिखातीं नौरी मुंडू

स्कूली बच्चों को हॉकी का गुर सिखातीं नौरी मुंडू

 पंचायत : हांसा

प्रखंड : मुरहू
जिला : खूंटी
पवन कुमार


हॉकी की नर्सरी कहे जानेवाले खूंटी जिले ने भारतीय हॉकी को कई अच्छे खिलाड़ी दिये हैं. हांसा पंचायत के हेसेल गांव की निक्की प्रधान भारतीय हॉकी टीम का आज भी हिस्सा हैं और बेहतर प्रदर्शन करते हुए राज्य और देश का नाम रोशन कर रही हैं. इसी पंचायत में एक और गांव है माहिल. झारखंड की राजनीति में माहिल गांव की अपनी एक अलग पहचान है, क्योंकि राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा इसी गांव के हैं. इस गांव में एक और महिला हॉकी खिलाड़ी हैं, जिनका जीवन संघर्ष के साथ शुरू हुआ और आज भी जीवन-यापन के लिए संघर्ष कर रही हैं. इस महिला हॉकी खिलाड़ी का नाम है नौरी मुंडू. 15 से अधिक नेशनल गेम्स खेल चुकीं नौरी वर्तमान में मुरहू प्रखंड के सरकारी स्कूलों के बच्चों को हॉकी सीखा कर अपना गुजारा कर रही हैं.

दशरथ सर ने किया प्रोत्साहित
पहले से ही खूंटी जिले में हॉकी सिर चढ़ कर बोलता था. नौरी मुंडू को भी हॉकी खेलने का शौक था. स्कूल में दशरथ सर ने उन्हें हॉकी खेलने के लिए प्रोत्साहित किया. उनकी देखरेख में नौरी ने हॉकी स्टिक थामी और खेलना शुरू किया. उस वक्त नौरी के सामने आगे पढ़ाई करने और प्रशिक्षण लेने के लिए पैसे की समस्या थी. नौरी की छोटी बहन मजदूरी पर महीने में 50 रुपये देती थी, जिससे किसी तरह हॉकी खेलते रही. इसी बीच वर्ष 1992 में रांची में हॉकी प्रशिक्षण के लिए उसका चयन हुआ.

कांस्य पदक के साथ सफर की हुई शुरुआत
वर्ष 1996 में नौरी ने नेहरू गर्ल्स हॉकी टूर्नामेंट में कांस्य पदक के साथ सफर की शुरुआत की. 1997 में उन्होंने राष्ट्रीय सीनियर खेल चैंपियनशिप में रजत और 19 मौकों पर राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व भी किया. 2006 में अंतिम बार एयर इंडिया के लिए खेलीं. इससे करार खत्म होने के बाद वो वापस रांची लौट आयीं.

टूट गये सपने
देश और राज्य के लिए हॉकी खेलनेवाली नौरी को उम्मीद थी कि कोई नौकरी उन्हें अवश्य मिल जायेगी, जिससे उनका गुजारा आसानी से हो सकेगा. पुलिस में नौकरी के लिए कई बार आवेदन दिया, पर हर बार उम्मीद टूटी. फिलहाल नौरी अपनी छोटी बहन और उनके बच्चे के साथ अपने घर में रहकर जीवन-यापन कर रही हैं. उनकी छोटी बहन के पति की मौत हो गयी है. नौरी उन दोनों का भी खर्च उठाती हैं.

सीनी का मिला साथ, तो चल रही जिंदगी
नौरी के अंदर खेलने की जिद ने उन्हें खिलाड़ी बना दिया. वह बताती हैं कि उन्हें सीनी संस्था का साथ मिला. जिससे जिंदगी चल रही है. फिलहाल मुरहू प्रखंड के चार गांव ओसकेया, बम्हनी, पोड़ाकेल और डुडरी के सरकारी स्कूलों के बच्चों को हॉकी सीखाती हैं. वह स्थानीय संत मेरी स्कूल में भी बच्चों को हॉकी सीखा रही हैं.

पहले ही सर से उठ गया था माता-पिता का साया
नौरी गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं. बचपन में ही कुएं में डूबने से उनकी मां की मौत हो गयी थी और फिर बीमारी ने पिता को छीन लिया. इसके बाद उनके परिवार में सिर्फ चार बहनें ही बचीं. घर चलाने के लिए बहनों को मजदूरी तक करनी पड़ी.

मैंने जो सीखा, वो बच्चों को दे रही हूं : नौरी मुंडू
राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी नौरी मुंडू कहती हैं कि चार गांवों में जाकर हॉकी सीखाना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि सभी गांव दूर-दूर हैं, लेकिन बच्चों को सीखाना अच्छा लगता है. हॉकी स्टिक पकड़ने से लेकर हिट मारने तक की बेसिक स्किल के बारे में उन्हें जानकारी देती हैं. वह चाहती हैं कि बच्चे बेहतर प्रदर्शन करें, ताकि खूंटी का नाम रोशन हो और हॉकी की विरासत खूंटी में संरक्षित रहे.

इन खेलों में शामिल हुईं नौरी मुंडू
वर्ष खेल
1995-1996
नेहरू गर्ल्स हॉकी टूर्नामेंट
1997
स्कूल नेशनल गेम्स
1997
2000 स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया
1998 49
वें सीनियर वीमेंस हॉकी चैंपियनशिप
1999
नेशनल गेम्स मणिपुर
2000 50
वें सीनियर वीमेंस हॉकी चैंपियशिप
2001
फर्स्ट रेगुलेशवन वीमेंस हॉकी चैंपियनशिप
2001 19
वें नेशनल गेम्स पंजाब
2002 51
वें सीनियर वीमेंस हॉकी चैंपियनशिप
2003 52
वें सीनियर वीमेंस हॉकी चैंपियनशिप