aamukh katha

  • Oct 3 2019 5:04PM

देशभर के बाजारों में खनक रहीं लाह की चूड़ियां

देशभर के बाजारों में खनक रहीं लाह की चूड़ियां

पंचायतनामा टीम
प्रखंड: खूंटी
जिला: खूंटी

खूंटी जिला अंतर्गत सिलादोन पंचायत के ग्रामीण लाह उत्पादन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में जुटे हैं. वन क्षेत्र होने के कारण यहां बेर व कुसुम के पेड़ों में लाह का अच्छा उत्पादन होता है. वर्ष 2011 में झास्कोलैम्प के सहयोग से लाह प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गयी. झारक्राफ्ट और विकास आयुक्त, हस्तशिल्प मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से यहां के कारीगरों को लाह प्रसंस्करण और ग्रामीण महिलाओं को लाह चूड़ी बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. अब इन ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनायी गयी चूड़ियां अन्य राज्यों के बाजारों की रौनक बन गयी हैं.

सिलादोन लाह उत्पादन सहयोग समिति से हुई शुरुआत
वर्ष 2011 में सिलादोन लाह उत्पादन समिति का गठन हुआ. वर्ष 2016 में सिलादोन लाह उत्पादन समिति के कारीगरों को अपग्रेड किया गया. सिलादोन के आसपास के 700 कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया. इनमें से 50 फीसदी कारीगरों को आर्टिजन कार्ड मिल चुका है. 10 लोग अभी मुद्रा योजना के तहत लोन लेकर अपना कार्य कर रहे हैं. सभी 10 लाभार्थियों को 6.06 फीसदी ब्याज दर पर लोन मिला है. आर्टिजन कार्ड मिलने के बाद 20 कारीगर मास्टर ट्रेनर के तौर पर कार्य कर रहे हैं, जो झारखंड के विभिन्न जिलों में जाकर प्रशिक्षण देते हैं. लाह चूड़ी निर्माण के लिए 10 गांवों में समिति की ओर से केंद्र बनाये गये हैं.

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बाजार मूल्य पर किसानों से लाह खरीदती है समिति
लाह उत्पादन समिति किसानों से बाजार मूल्य पर लाह की खरीदारी कर अपनी प्रसंस्करण इकाई में लाह का बटन तैयार करती है. बटन का उपयोग लाह के विभिन्न उत्पादों को बनाने के लिए किया जाता है. समिति द्वारा बनायी गयी चूड़ियां झारखंड समेत दिल्ली, शिमला, गंगटोक, कोलकाता, भोपाल, जयपुर, गोवा व गुवाहटी के बाजारों में बेची जाती हैं. उद्योग विभाग कारीगरों द्वारा बनाये गये उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री फ्लिपकार्ट पर करता है. इसके साथ ही ट्राइफेड संस्था को भी लाह उत्पाद की आपूर्ति करता है.

समिति कर रही है बेहतर कार्य : बिशेश्वर सिंह
झारक्राफ्ट खूंटी के कलस्टर मैनेजर बिशेश्वर सिंह ने बताया कि समिति के बेहतर कार्य को देखते हुए सिलोदन में झारक्राफ्ट की ओर से 55 लाख रुपये की लागत से लाह प्रोसेसिंग यूनिट लगायी गयी है, जिसके माध्यम से लाह की चूड़ियों के डिब्बे बनाये जायेंगे.

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लाह उत्पादकों को मिला फायदा : महावीर उरांव
सिलादोन उत्पादक लाह समिति के सचिव महावीर उरांव कहते हैं कि वर्ष 2011 में जब समिति की शुरुआत हुई, तो सिर्फ 21 लोग थे, अब समिति से 703 लोग जुड़े हुए हैं. चूड़ी बनाने के लिए महिलाओं को पूरी सामग्री समिति द्वारा दी जाती है. लाह प्रोसेसिंग में हुए खर्च को काटकर उन्हें मुनाफा दिया जाता है.

गांव में मिला रोजगार : सुकरा तिर्की
सुकरा तिर्की बताते हैं कि घर बैठे उन्हें अच्छा काम मिल गया है. हर दिन उन्हें 200 रुपये मिलते हैं. वो लाह प्रोसेसिंग का काम करते हैं. इसके लिए उन्हें नामकुम के सिदरोल में प्रशिक्षण मिला था. दो साल से वो इस काम को कर रहेे हैं.

महिलाओं के लिए बेहतर रोजगार का मौका : चांदनी मुंडा
चांदनी मुंडा चूड़़ी बनाने का काम करती हैं. कहती हैं कि समय-समय पर उन्हें प्रशिक्षण मिलता है, जिससे उनके काम में और निखार आता है. गांव की दूसरी महिलाएं भी इस कार्य से जुड़ी हैं. अब घर बैठे रोजगार मिल गया है. अपना काम करते हुए वह आसानी से काम कर लेती हैं.