aamukh katha

  • Jan 28 2018 4:09PM

आजादी के पहले से ही माको गांव में शराब बिक्री पर है रोक

आजादी के पहले से ही माको गांव में शराब बिक्री पर है रोक

 प्रखंड : पोटका

पंचायत : जानमडीह
जिला : पूर्वी सिंहभूम

वीरेंद्र कुमार सिंह

पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड का एक गांव है माको. गांव में प्रवेश करने से ही पता चल जायेगा कि इस गांव की अर्थव्यवस्था कैसी है. इस गांव की खासियत है शराब बिक्री पर रोक. गांव के बूढ़े-बुजुर्गों के मुताबिक आजादी के पहले से ही यहां शराब की बिक्री नहीं होती है.

नदी-नालों से घिरा है गांव
माको गांव जानमडीह पंचायत क्षेत्र में आता है. जमशेदपुर से करीब 35 किलोमीटर तथा हल्दीपोखर- कवाली मुख्य मार्ग से पांच किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है. इस गांव में 160 परिवार रहते हैं, जिसमें 80 प्रतिशत पिछड़ी जाति के लोग निवास करते हैं. यह गांव पहले नदी-नालों से घिरा हुआ था. बिल्कुल टापू की तरह था, क्योंकि साल में छह महीने यहां के लोगों को नदी- नाला पार कर ही गांव से बाहर जाना पड़ता था.

गांव में पहले से था समस्याओं का अंबार
गांव में मूलभूत समस्याओं का अंबार था. चाहे बिजली की समस्या हो या पानी, सड़क, चिकित्सा व्यवस्था, मकान या रोजी-रोटी की समस्या. इसके बावजूद ग्रामीणों की दृढ़ इच्छाशक्ति ने इन समस्याओं का समाधान निकल आया. अब गांव में मूलभूत समस्या नहीं के बराबर है और हर ग्रामीण खुशहाल है. गांव में एक जनवितरण प्रणाली की दुकान है. दो आंगनबाड़ी केंद्र भी है.

गांव में आया बदलाव
पहले माको गांव एक टापू के रूप में था, लेकिन पिछले कुछ समय से माको गांव में विकास दिखने लगा है. 10 वर्ष पूर्व गांव के प्रवेश मार्ग पर एक बड़ा पुलिया बनाया गया था. गांव के चारों ओर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से पहुंच पथ को जोड़ा गया है. सभी घरों में बिजली है. इस गांव के लगभग 60 घरों में मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहन भी है. हर ग्रामीण के हाथ में मोबाइल तथा हर घर में टेलीविजन है. सभी लाभुकों का राशन कार्ड है.

गांव का हर व्यक्ति साक्षर
इस गांव में एक मध्य विद्यालय और एक प्राथमिक विद्यालय है. उच्च विद्यालय यहां से नौ किलोमीटर तथा दूसरा पांच किलोमीटर दूर है. 54 फीसदी साक्षरता दर है. इस गांव में एक भी ऐसा घर नहीं है, जिसमें महिला या पुरुष कम से कम आठवीं पास नहीं हो. केवल वही साक्षर या अनपढ़ हैं, जो बहू के रूप में बाहर से आयी हैं. यहां की सभी लड़कियां आठवीं पास हैं.

नौकरी पेशा से जुड़े 35 ग्रामीण
वर्तमान में यहां नौकरी पेशेवाले लगभग 35 लोग हैं. इसमें बैंक में नौ, पांच शिक्षक, एक डॉक्टर, एक अभियंता, एक उत्पाद अधिकारी, एक रेलवे में, एक निजी कंपनी समेत अन्य चतुर्थ वर्ग में कार्यरत हैं. अवकाश प्राप्त 12 शिक्षक, एक अंचल अधिकारी, दो रेलवे विभाग एवं दो टाटा स्टील से जुड़े थे. इसके अलावा युवा पीढ़ी इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, मेडिकल एवं बीएड कर नौकरी पाने में जुटी है.

पहले की अपेक्षा अब गांवों में हुआ विकास : दुखी राम मार्डी
गांव के दुखी राम मार्डी कहते हैं कि पहले की अपेक्षा गांव में काफी विकास हुआ है. पहले खेती के लिए हल बैल सहारा था, लेकिन आज ट्रैक्टर से नयी तकनीक द्वारा खेती होती है. धान काटने के बाद धान की झराई में महीनों समय लगता था, लेकिन अब वह भी मशीन के द्वारा होता है. गांव में 12 महिला समूह है, जो रोजगार के लिए अपने आप निर्भर है.

अब गांव शहर से पीछे नहीं है : मालती मार्डी
जानमडीह पंचायत की महिला मुखिया मालती मार्डी माको गांव की ही रहनेवाली हैं. वह कहती हैं कि पहले की अपेक्षा हमारा जीवन स्तर काफी बढ़ा है. रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं. इस कारण लोगों की आमदनी भी बढ़ी है. अब गांव शहर से किसी मायने में पीछे नहीं है.

गांव में बढ़ी हैं सुविधाएं : सुशील मुर्मू
गांव के जन वितरण प्रणाली की दुकान चलानेवाले सुशील मुर्मू कहते हैं कि पहले की अपेक्षा गांव में काफी विकास हुआ है. पहले जहां गांव में बिजली नहीं थी, पेयजल की सुविधा नहीं थी, वहीं आज गांव में सुविधाएं बढ़ी हैं.

एक नजर में माको गांव की स्थिति
कुल आबादी : 881
परिवार की संख्या : 160
पुरुष की संख्या : 426
महिला की संख्या : 455
साक्षरता : 54 प्रतिशत
पुरुष साक्षरता : 69 प्रतिशत
महिला साक्षरता : 40 प्रतिशत