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  • Feb 18 2019 12:35PM

स्वस्थ बुजुर्गों में देखिए गांवों की मिट्टी का दम

स्वस्थ बुजुर्गों में देखिए गांवों की मिट्टी का दम

समीर रंजन

बुढ़ापा यानी उम्र का तीसरा पड़ाव. 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के व्यक्ति को बुजुर्ग की श्रेणी में माना जाता है. इस पड़ाव में बुजुर्गों को एक साथ कई कठिनाइयां झेलनी पड़ती हैं, लेकिन कई बुजुर्ग अपनी मेहनत से खुद को तंदुरुस्त रखते हैं. खासकर ग्रामीण इलाकों के बुजुर्ग आज भी अपना काम खुद ही करते हैं. स्वस्थ बुजुर्गों में गांवों की मिट्टी का दम दिखता है. झारखंड में कई ऐसे बुजुर्ग हैं, जिनकी मेहनत व लगन से आज अपनी पहचान है. पद्मश्री सिमोन उरांव की बात हो या गांव के अन्य बुजुर्ग, सभी अपने- अपने क्षेत्र में परचम लहरा रहे हैं. आमुख कथा में देश व झारखंड में बुजुर्गों की स्थिति, निर्भरता, बीमारी व समस्याएं समेत ऐसे कई बुजुर्गों की भी कहानी पेश है, जो आज भी अपने जज्बे से युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं.

सफेद बाल, चेहरे पर झुर्रियां और सादा जीवन व्यतीत करते हमारे बुजुर्ग तंदुुरुस्त दिखते हैं. ग्रामीण इलाकों के बुजुर्ग शहरी इलाकों की अपेक्षा अधिक स्वस्थ दिखते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों के कई बुजुर्ग आज भी आपको साइकिल चलाते, खुद काम करते, बिना चश्मे के अखबार पढ़ते, खुद अपने हाथों से खेतों की सिंचाई करते मिल जायेंगे. बुजुर्गों का मानना है कि अगर खान-पान पर ध्यान दें और नशापान से दूर रहें, तो कई बीमारियों से यूं ही छूटकारा पाया जा सकता है. 2011 की जनगणना के अनुसार, 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग देश में करीब 10.4 करोड़ हैं. झारखंड की बात करें, तो यहां 23 लाख 57 हजार बुजुर्ग हैं. 1991 की जनगणना तक वृद्ध पुरुषों की संख्या वृद्ध स्त्रियों से अधिक थी. 2011 की जनगणना में वृद्ध पुरुषों के मुकाबले वृद्ध स्त्रियों की संख्या अधिक हो गयी है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के संदर्भ में देखें, तो 73 मिलियन बुजुर्ग यानी 71 फीसदी वृद्धजनों की आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है, जबकि 31 मिलियन यानी 29 फीसदी वृद्धजन शहरी इलाकों में निवास करते हैं. अच्छी आर्थिक स्थिति, बेहतर स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था और अच्छी दवाओं के कारण बुजुर्गों की मृत्यु दर में काफी कमी आयी है.

देश में 5.3 करोड़ महिलाएं हैं बुजुर्ग
देश के 10.4 करोड़ बुजुर्गों में 5.3 करोड़ महिलाएं और 5.1 करोड़ पुरुष बुजुर्ग हैं. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों की संख्या 73.3 मिलियन यानी 7.33 करोड़ और शहरी क्षेत्र में 30.6 मिलियन यानी 3.06 करोड़ है. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनपीएफ) ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2050 तक देश में बुजुर्गों की तादाद बढ़ कर तीन गुनी हो जायेगी. गैर-सरकारी संगठन हेल्पएज इंडिया ने 23 शहरों में किये अपने अध्ययन रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में कुल आबादी में बुजुर्ग यानी 60 साल से ज्यादा उम्र वालों की तादाद लगभग आठ फीसदी थी, जिसके 2026 में 12.5 फीसदी और 2050 तक 20 फीसदी पहुंचने का अनुमान है. यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (यूएनपीएफ) ने भी हाल में अपनी एक रिपोर्ट में देश में बुजुर्गों की बढ़ती तादाद और उनसे होने वाले दुर्व्यवहार पर गहरी चिंता जतायी. उसका कहना है कि वर्ष 2050 तक बुजुर्गों की आबादी बढ़ कर 30 करोड़ तक पहुंच जायेगी.

झारखंड में 23 लाख 57 हजार हैं बुजुर्ग
झारखंड में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के बुजुर्गों की संख्या 23 लाख 57 हजार है. इसमें महिलाओं की संख्या 11 लाख 75 हजार और पुरुषों की संख्या 11 लाख 82 हजार है. ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें, तो यहां 18 लाख 33 हजार बुजुर्ग निवास करते हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में बुजुर्गों की संख्या 5 लाख 24 हजार है.

विशिष्ट मृत्यु दर झारखंड में अधिक
2013 की प्रतिदर्श पंजीकरण प्रणाली रिपोर्ट के अनुसार, 85 वर्ष से ऊपर की आयु के लोगों में विशिष्ट मृत्यु दर झारखंड में सबसे अधिक है. यहां विशिष्ट मृत्यु दर प्रति एक हजार में 324 है. सबसे कम जम्मू और कश्मीर में 108 है, जबकि देश में विशिष्ट मृत्यु दर 213 है.


केरल में सबसे अधिक बुजुर्ग
बुजुर्गों की आबादी की बात करें, तो केरल में आबादी का अनुपात सबसे अधिक 12.6 फीसदी है और उससे कम गोवा में 11.2 फीसदी और फिर तमिलनाडु में 10.2 फीसदी है. इसकी वजह इन राज्यों में बेहतर जीवनशैली और चिकित्सा सुविधा है. सबसे कम अनुपात दादर और नगर हवेली चार फीसदी, उससे अधिक अरुणाचल प्रदेश 4.6 फीसदी तथा दमन व दीव और मेघालय दोनों में 4.7 फीसदी है.

बुजुर्ग लिंगानुपात
1951
में देश में प्रति एक हजार बुजुर्ग पुरुषों के मुकाबले बुजुर्ग महिलाओं की संख्या 1028 थी. बाद में इसमें गिरावट आयी और 2011 में बुजुर्ग लिंगानुपात 1033 तक पहुंच गया.

आयु संभाविता बढ़ी
देश में आयु संभाविता ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी बढ़ गयी है. किसी खास आयु पर जीवन के शेष बचे वर्षों की संभावित संख्या आयु संभावित कहलाती है. 2009-13 में ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म के समय आयु संभाविता 1970-75 के 48 साल से बढ़ कर 2009-13 में 66.3 हो गयी, जबकि शहरी क्षेत्र में 1970-75 में यह 58.9 से बढ़ कर वर्ष 2009-13 में 71.2 पर पहुंच गयी. ग्रामीण क्षेत्रों में 60 वर्ष की आयु के लोगों की आयु संभाविता 1970-75 में 13.5 से बढ़ कर वर्ष 2009-13 में 17.5 हो गयी, वहीं शहरी इलाकों में 15.7 से बढ़ कर 19.1 हो गयी. केरल में जन्म के समय आयु संभाविता सबसे अधिक है, जबकि उससे कम महाराष्ट्र और फिर पंजाब में है.

देश में वृद्धावस्था निर्भरता
देश में वृद्धावस्था निर्भरता अनुपात 1961 में 10.9 प्रतिशत था, जो बढ़ कर 2011 में 14.2 प्रतिशत हो गया. 2011 में वृद्ध स्त्री निर्भरता 15 प्रतिशत है, वहीं पुरुष निर्भरता 13.6 प्रतिशत है. वहीं ग्रामीण और शहरी इलाकों में वृद्धावस्था निर्भरता आश्रितता अनुपात क्रमश: 15.1 और 12.4 रहा. समग्र वृद्धावस्था आश्रितता अनुपात पर नजर डालें, तो दिल्ली में जहां 10.4 फीसदी दर्ज हुआ, वहीं केरल में 19.6 फीसदी रहा.

झारखंड में 13.7 फीसदी वृद्धावस्था निर्भरता
लिंग और निवास स्थान के अनुसार वृद्धावस्था आश्रितता, 2011 के तहत झारखंड में 12.7 फीसदी है. इसमें महिला 13 फीसदी और पुरुष 12.3 फीसदी है. राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में वृद्धावस्था आश्रितता अनुपात 13.4 फीसदी और शहरी क्षेत्र में 10.5 फीसदी रहा. राज्य में 60 साल या उससे ऊपर के बुजुर्गों में 3.7 फीसदी बुजुर्ग अकेले रहते हैं. वहीं 9.7 फीसदी बुजुर्ग पुरुष अपनी पत्नी के साथ रहते हैं. 48 फीसदी बुजुर्ग अपनी पत्नी और अन्य सदस्यों के साथ, 33.8 फीसदी संतान के साथ तथा 2.4 फीसदी अन्य रिश्तेदारों व अन्य लोगों के साथ रहते हैं.

झारखंड में बुजुर्ग साक्षरता दर 35.2 फीसदी
राज्य में 60 साल या उससे ऊपर की आयु के बुजुर्ग व्यक्तियों में समग्र साक्षरता दर 35.2 फीसदी है. इसमें पुरुषों की साक्षरता दर 52.5 फीसदी और महिलाओं की मात्र 17.8 फीसदी है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में साक्षरता दर काफी कम है. यहां 27.2 फीसदी और शहरी क्षेत्र में 63.2 फीसदी साक्षरता दर है, जबकि देश में साक्षरता दर देखें, तो सबसे अधिक मिजोरम में 84 फीसदी और सबसे कम अरुणाचल प्रदेश में 19.4 फीसदी है.

झारखंड की बुजुर्ग महिलाओं में बीमारी की है कम शिकायत
राज्य की बुजुर्ग महिलाओं में बीमारी की शिकायत कम देखने को मिलती है. राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण, 2004 के मुताबिक राज्य की आठ फीसदी बुजुर्ग महिलाओं में बीमारी की कम शिकायत है, जबकि पुरुषों में 12 फीसदी है.

देश के शहरी बुजुर्गों में अधिक हृदय रोग
नेशनल सैंपल सर्वे 2004 की रिपोर्ट के मुताबिक, बुजुर्गों में हृदय रोगों की व्यापकता ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी इलाकों में अधिक है. बुजुर्ग पुरुषों में मूत्र संबंधी समस्याएं ज्यादा थीं, जबकि महिलाओं में जोड़ों की समस्या ज्यादा मिली.

बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों की संख्या( प्रति हजार व्यक्ति में)
                                       ग्रामीण                                           शहरी
बीमारी                              पुरुष        महिला                               पुरुष             महिला
काली खांसी                          8            6                                     4                2
अल्सर                               37          54                                  30               24
जोंड़ों की समस्या                  30          40                                  26               45
हाइपरटेंशन                         23          53                                 50                59
हृदय रोग                            95           59                               165               162
मूत्र संबंधी समस्या               78           28                                 89                 33
डायबीटिज                         30            52                                 68                 36
कैंसर                                18             36                               25                  25

60 फीसदी महिलाएं होती हैं विधवा
2011 जनगणना के अनुसार, वर्तमान में विवाहित बुजुर्ग महिलाओं का प्रतिशत विवाहित बुजुर्ग पुरुषों की तुलना में बहुत कम है. 70 साल की आयु के बाद करीब 60 फीसदी महिलाएं विधवा हो जाती हैं.

देश में 52.4 फीसदी बुजुर्ग उत्पीड़न के शिकार
बुजुर्गों के लिए काम करने वाली संस्था एजवेल रिसर्च एंड एडवोकेसी सेंटर के मुताबिक, देश के 52.4 फीसदी वृद्धजनों का उत्पीड़न होता है. इससे उबरने के लिए वृद्धजनों को आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत पर बल दिया गया है.

बुजुर्गों के लिए योजनाएं

 

1. वृद्धावस्‍था पेंशन योजना
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करनेवाले बुजुर्गों के लिए सरकार ने पेंशन की व्यवस्था की है. झारखंड के बुजुर्गों को अब छह सौ रुपये प्रतिमाह की जगह एक हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन की राशि मिलेगी. यह पेंशन की राशि लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा होगी.

2. मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना
राज्य सरकार ने बुजुर्गों के लिए मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की शुरुआत की है. इसके तहत अधिक उम्र के निर्धन, पिछड़े व वरिष्ठ नागरिक दो बार तीर्थयात्रा कर सकेंगे. एक बार राज्य में स्थित चयनित तीर्थ स्थल और एक बार राज्य के बाहर के चयनित तीर्थ स्थलों की यात्रा कर सकेंगे. इस योजना का एक बार लाभ उठाने के बाद दूसरी बार दो वर्ष की अवधि के बाद ही इसका लाभ मिलेगा. वर्ष 2016 में शुरू हुई इस योजना से गरीब बुजुर्गों को धार्मिक स्थलों पर भेजा जा रहा है. इस योजना से गरीब बुजुर्गों के तीर्थ स्थलों पर जाने का सपना भी पूरा हो रहा है. इस योजना के तहत वर्ष 2019 के शुरुआती माह में आठ सौ लोगों को कुंभ स्नान के लिए भेजा गया.

3. अनुदान सहायता योजनाएं
वयोवृद्ध लोगों के लिए एकीकृत कार्यक्रम योजना के तहत गैर-सरकारी संगठनों को वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाती है, ताकि वे वृद्धजनों के लिए सदन, दिन के समय देखभाल के लिए केन्‍द्र, चलते-फिरते चिकित्‍सा यूनिट की स्‍थापना और गैर-संस्‍थागत सेवाएं उपलब्‍ध करा सकें. इसके अलावा हेल्‍पलाइन, फिजियो‍थेरेपी केंद्र व मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल सुविधाएं प्रदान की जाती हैं.