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  • Jul 17 2019 2:11PM

सखी मंडल से समृद्धि ला रहीं दीदियां

सखी मंडल से समृद्धि ला रहीं दीदियां

गुरुस्वरूप मिश्रा

सखी मंडल यानी दीदियों की ताकत. झारखंड के गांवों की सखियों का समूह. यूं कहिए महिला समूह. चूल्हा-चौका संभालते हुए घर की दहलीज से बाहर निकालकर उन्हें अपनी पहचान बनाने व आत्मनिर्भर बनाने वाला संगठन. कभी घर की देहरी तक सीमित रहकर पति पर आश्रित रहने वाली महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि ग्रामीण विकास की धुरी बन गयी हैं. दीदियां सखी मंडल की ताकत से गांव-गिरांव में समृद्धि ला रही हैं. जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) इनके सपनों को नयी उड़ान दे रहा है. महिला सशक्तीकरण की दिशा में सखी मंडल की दीदियां अपनी कामयाबी से ग्रामीण भारत के विकास की नई गाथा लिख रही हैं

झारखंड के गांव-जवारों में सामान्य सी दिखने वाली सखी मंडल की असाधारण महिलाओं की ताकत जान आप चौंक जायेंगे. आपको इनकी उपलब्धियों पर सहसा यकीन नहीं होगा, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद इन गरीब महिलाओं ने अपनी जिद से न सिर्फ अपने घर-परिवार की दुनिया बदल दी, बल्कि गांव की मॉडल बनकर अन्य महिलाओं को प्रेरित करते हुए सामाजिक बदलाव की वाहक बन रही हैं. ये हैं गांव की मॉडल दीदियां. राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गांव की महिलाओं के जरिए नया आयाम देने में जुटा जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) को क्रियान्वित कर रहा है. आप गांवों में चले जाइए. बदलाव की बयार बहाते महिला समूहों का रंग देख आप प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेंगे.

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अबला को बनाया सबला
अमूमन अबला समझी जाने वाली महिलाएं, खासकर सुदूरवर्ती गांव की महिलाएं सखी मंडल से जुड़कर ताकतवर बन रही हैं. न सिर्फ आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि आत्मविश्वास से लबरेज ऐसा कि अब कोई भी काम उनके लिए मुश्किल नहीं रहा. घर की देहरी से बाहर निकल रही हैं. इससे उनकी अपनी पहचान बन रही है. सरकार की विभिन्न योजनाओं को धरातल पर उताकर गांव की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा रही हैं. सच कहिए, तो यही सखी मंडल की ताकत है. दीदियां खुद गरीबी से बाहर निकल रही हैं और दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं. स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन एवं क्लस्टर लेवल फेडरेशन के माध्यम से गांव-पंचायत की सूरत बदल रही है.

आत्मविश्वास से मिली पहचान
सखी मंडल ने गुमशुम रहने वाली महिलाओं को आवाज दी. पहचान दी. सम्मान दिया. आत्मविश्वास बढ़ाकर दुनिया देखने का जज्बा भरा. उनका हौसला देख आप सखी मंडल की ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं. महाजनों के कर्ज से दबे गरीब परिवारों को महिला समूह ने नयी ताकत दी है. उनके चंगुल से मुक्ति दिलाई. अब स्वरोजगार करना हो या मुर्गी पालन, बत्तख पालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन समेत अन्य कोई कार्य करना हो. घर की जरूरतों के लिए मामूली रकम की जरूरत हो, तो महिलाएं न तो पति से पैसे मांगती हैं और न ही महाजनों से कर्ज लेने की अब मजबूरी है. उनका अपना महिला समूह है न. परिवार चलाने में भी पति को भी मदद करती हैं और रोजगार करने में आर्थिक सहायता करती हैं. हर काम के लिए पति या परिवार पर निर्भर रहने वाली महिलाएं आत्मनिर्भर होने लगी हैं. घर-परिवार के साथ-साथ गांव के विकास में भी अहम योगदान दे रही हैं. अबला को सबला बनाने की ताकत रखने वाला समूह है सखी मंडल.

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दीदियों को जानिए
सखी मंडल की दीदियां सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभा रही हैं. बैंक सखी, बीसी (बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट) सखी, पशु सखी, रानी मिस्त्री, टैबलेट दीदी, सोलर दीदी, बिजली दीदी, आजीविका दीदी, आजीविका कृषक मित्र, सीएलएफ लीडर्स, सामुदायिक रिसोर्स पर्सन, सेतु दीदी, आजीविका कैफे दीदी, संवाददाता सखी समेत अन्य सखियों के रूप में दीदियां सेवा दे रही हैं. स्वच्छ भारत अभियान की सफलता में रानी मिस्त्री के रूप में महिला समूह की दीदियों ने अहम योगदान दिया है. खेती-बारी में आजीविका कृषक मित्र, पशुधन की सेवा में पशु सखी, बैंकिंग क्षेत्र की सेवाओं को गांव-पंचायत में घर-घर तक पहुंचाने में लगीं बैंक सखी और बीसी सखी जैसी कई दीदियां अपने-अपने क्षेत्र में लगी हुई हैं.

दीदियों के हैं कई रूप
दीदियों के कई रूप हैं. कोई पशु सखी, तो कोई रानी मिस्त्री, तो कोई बैंक सखी बनकर न सिर्फ अपनी जिंदगी बदल रही हैं, बल्कि खामोशी से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रही हैं. कभी मोबाइल तक नहीं देखने वाली महिलाएं आज धड़ल्ले से टैबलेट चलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने साकार कर रही हैं. टैबलेट में महिला समूह की उपस्थिति से लेकर लेन-देन तक के आंकड़े भरती हैं, जिससे रियल टाइम में यह आंकड़ा एमआइएस पर अपडेट हो जाता है. इतना ही नहीं, खाली समय में टैबलेट दीदी गांव की महिलाओं को जागरूक करने के लिए फिल्में भी दिखाती हैं.

जिद से गरीबी-बेबसी को किया परास्त
गरीबी-बेबसी को अपनी जिद से परास्त कर उम्मीद की किरण बन रही हैं दीदियां. पलामू जिले के सुआ कौड़िया की मीना देवी को आज पूरा पलामू जानता है. सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर की सेतु दीदी अलका हों या खूंटी के कालामाटी की दीदी सोनामती की खट्टी इमली से सफलता की मिठास की कहानी हो. रांची के अनगड़ा के गेतलसूद की पशु सखी (डॉक्टर दीदी) बलमदीना तिर्की को मुख्यमंत्री रघुवर दास झारखंड सम्मान से सम्मानित कर चुके हैं. दुमका के बालीजोर के बाद रांची के अनगड़ा की दीदियां चप्पल बना रही हैं. लोहरदगा के सेन्हा प्रखंड की सोलर दीदी सोनम दुलारी के सोलर लाइट प्रोजेक्ट को नई दिल्ली के स्टॉल पर देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी प्रभावित हुए.

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आर्थिक आजादी से बढ़ी ताकत
महिला सशक्तीकरण की दिशा में सखी मंडल के जरिए जेएसएलपीएस बदलाव की नयी कहानी लिख रहा है. आत्मनिर्भरता की सड़क पर दीदियां सरपट दौड़ रही हैं. महिलाओं के सपनों को नयी उड़ान दी जा रही है. आर्थिक आजादी से आधी आबादी की ताकत बढ़ रही है. परिवार में उनका महत्व बढ़ रहा है. घर के महत्वपूर्ण निर्णयों में वह भागीदार बन रही हैं. ये बदलाव आसान नहीं था. इसके लिए महिलाओं ने खुद की मेहनत से परिस्थितियों को अपने अनुरूप बनाया. नतीजा आज सामने है. महिला समूह की दीदियों के परिजनों को भी आज उन पर गर्व है.

एक दशक में वटवृक्ष बना जेएसएलपीएस
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जुलाई 2009 को जिस सपने के साथ जेएसएलपीएस का बीजारोपण किया गया था. 2014 में रघुवर सरकार बनने के बाद उस मिशन को नयी उड़ान दी गयी. गठन के पहले पांच वर्षों में महज 43 हजार सखी मंडल का गठन किया गया था, जबकि वर्ष 2014 से अब तक यानी साढ़े चार वर्षों में 1 लाख 60 हजार 589 सखी मंडलों का गठन किया गया. आज सखी मंडलों की संख्या 2 लाख 3 हजार 589 हो गयी है. वर्ष 2014 तक सिर्फ 657 ग्राम संगठन थे, जबकि साढ़े चार वर्षों में 12,463 ग्राम संगठन बनाये गये. आज इनकी संख्या 13,120 है. फिलहाल 25 लाख, 59 हजार 303 परिवार लाभान्वित हैं. एक दशक में ये वटवृक्ष बन गया. अब शेष बची 300 पंचायतों में 30 सितंबर तक सखी मंडलों के गठन करने का लक्ष्य है.

अब दीदियां भी जायेंगी इजरायल
दीदियों ने अपनी कर्मठता से सरकार का भरोसा जीत लिया है. रघुवर सरकार उन पर मेहरबान है. यही वजह है कि सरकारी योजनाओं को ईमानदारी से धरातल पर उतारने में उन्हें लगाया जा रहा है. पंचायत स्तर पर संवाददाता दीदी, उज्ज्वला दीदी और डॉक्टर दीदी (मिट्टी) बनाया जा रहा है. कृषि की उन्नत तकनीक की जानकारी देकर मास्टर ट्रेनर बनाने के लिए अब सखी मंडल की दीदियों को भी इजरायल भेजा जायेगा. महिला सशक्तीकरण की इससे बड़ी मिसाल क्या होगी कि झारखंड की अधिकतर योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने में सखी मंडल की दीदियां सेतु का काम कर रही हैं.

झारखंड में सखी मंडल की ताकत
जिला-                                                                                         24

प्रखंड-                                                                                     263

पंचायत                                                                                    4398

गांव                                                                                       22,184
महिला समूह                                                                         2,03,589
परिवार                                                                               25,59,303
ग्राम संगठन                                                                             13,120
क्लस्टर लेवल फेडरेशन                                                                     441
रिवॉल्विंग फंड प्राप्त महिला समूह                                                    85,639
महिला समूहों को मिले रिवॉल्विंग फंड की राशि (लाख में)                         12,958
सीआइएफ प्राप्त महिला समूह                                                         37,074
महिला समूहों को मिले सीआइएफ की राशि (लाख में)                               20,527
बैंक लिंकेज महिला समूह                                                             1,05,000
खेती-बारी से जुड़े परिवार                                                             4,52,831
पशुधन से जुड़े परिवार                                                                 2,20,074
वनोत्पाद से जुड़े परिवार                                                                  50,505
औषधीय पौधों की खेती से जुड़े परिवार                                                  9,381
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना से प्रशिक्षित युवा                   30,972
स्वरोजगार से जुड़े युवा                                                                    11,745
व्यक्तिगत उद्यम से जुड़े लोगों की संख्या                                                 4,313

दीदियों का दम :
बैंक सखी                               1150
बीसी (बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट) सखी      800
आजीविका पशु सखी                  5300
आजीविका कृषक मित्र               5750
आजीविका वनोपज मित्र               650
आजीविका रेशम मित्र                  450
टैबलेट दीदी                              3500