aamukh katha

  • Nov 8 2019 1:16PM

बिटिया की पढ़ाई से लेकर शादी तक की चिंता से मुक्ति

बिटिया की पढ़ाई से लेकर शादी तक की चिंता से मुक्ति

पवन कुमार

जिला: रांची 

हमारे समय में ऐसी योजना नहीं थी. अगर ऐसी योजनाएं होतीं, तो आज हम भी पढ़े-लिखे होते. दुनिया को देखने-समझने का हमारा नजरिया कुछ और होता. रोगाडीह पतराटोली की शालमी उरांइन की इन बातों से सुकन्या योजना की अहमियत समझी जा सकती है. यह भी समझा जा सकता है कि किस प्रकार से यह योजना धरातल पर बड़े बदलाव ला रही है. महिलाओं की जिंदगी में कितना बड़ा परिवर्तन आ रहा है. राजधानी रांची के बेड़ो प्रखंड अंतर्गत रोगाडीह पतराटोली में सुकन्या योजना के लिए आवेदन जमा किये जा रहे हैं. बच्चियों में खुशी है कि उनकी पढ़ाई में पैसा बाधा नहीं बनेगा. माता-पिता भी खुश हैं कि अब बेटियों की शादी के लिए उन्हें अपने खेत गिरवी नहीं रखने पड़ेंगे. इस तरीके से यह योजना पूरे झारखंड की बेटियों की जिंदगी में उम्मीद की रोशनी लेकर आयी है. सुकन्या योजना के तहत बेटियों के जन्म से लेकर पढ़ाई और शादी तक के खर्च का वहन सरकार करेगी.

अब पढ़ेंगी बेटियां
बात-बात में रोगाडीह पतराटोली के ग्रामीण बताते हैं कि एक वक्त था जब वो खुद भी अपनी बेटियों को स्कूल नहीं भेज पाते थे. उनसे घरेलू काम लिया जाता था, क्योंकि उनका मानना था कि बेटी पराया धन है. घर में सिर्फ बेटों की शिक्षा पर ही जोर दिया जाता था. खुद उनके घर में कई ऐसी महिलाएं हैं, जो पढ़-लिख नहीं पायी हैं. अब सरकारी सहायता मिलने के कारण गांव की बेटियां अच्छी शिक्षा ग्रहण कर पायेंगी. वो भी आगे बढ़ेंगी. बेटियां अब मां-बाप के लिए बोझ नहीं रहेंगी. इसका एक और फायदा यह होगा कि अब लोग कम उम्र में बेटियों की शादी नहीं करेंगे, क्योंकि योजना का पूरा लाभ लेने के लिए लाभुक की उम्र 18 वर्ष होना जरूरी है.

संवर जायेगी 150 बच्चियों की जिंदगी
रोगाडीह पतराटोली गांव में लगभग 170 घर है. इसमें बच्चियों की संख्या लगभग 150 है. गांव की सभी बच्चियों का आवेदन आंगनबाड़ी सेविका के माध्यम से भरा जा रहा है. इसके अलावा स्कूल के शिक्षक भी इस काम में मदद करते हैं. अब तक 50-60 बच्चियों का आवेदन भरा जा चुका है. गांव से लौटने के वक्त गांव की बच्चियों से मुलाकात हुई, जो स्कूल से लौट रही थीं. सभी ने बताया कि उन्होंने आवेदन जमा कर दिया है. बैंक में खाता खोलने के बाद परेशानी हो रही है, क्योंकि सभी ने अलग-अलग बैंकों में खाता खोला है. पर्याप्त जानकारी के अभाव के कारण उन्हें यह समस्या आ रही है.

योजना की दी जा रही जानकारी : संतोष लकड़ा
ग्रामीण संतोष लकड़ा बताते हैं कि सुकन्या योजना बच्चियों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लायेगा. सभी तक योजना का लाभ पहुंचे, इसके लिए वो खुद लोगों के घरों तक जा रहे हैं. अभिभावकों को अपनी बच्चियों को लाभुक बनाने के लिए आवेदन जमा करने को प्रेरित कर रहे हैं. इसके अलावा बच्चियों को भी योजना की जानकारी देकर लाभ लेने के लिए बता रहे हैं. इससे उन परिवारों को काफी लाभ होगा, जो पैसे के अभाव में बेटियों को शिक्षा नहीं दिला पाते थे और जल्दी शादी कर देते थे.

अब बेटी की शादी की चिंता खत्म : शालमी उरांइन
शालमी उरांइन की दो बेटियां हैं. एक बेटी की शादी हो चुकी है. छोटी बेटी को सुकन्या योजना का लाभ मिले, इसके लिए उन्होंने आवेदन जमा किया है. बड़ी बेटी की शादी के वक्त हुई आर्थिक समस्या को याद करते हुए शालमी बताती हैं कि अगर यह योजना पहले से होती, तो उन्हें अपनी बेटी की शादी के वक्त आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. वो अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा भी दिला पातीं. अब वो अपनी छोटी बेटी को अच्छी शिक्षा देना चाहती हैं. पढ़ाई पूरी होने के बाद ही इसकी शादी करेंगी.

शिक्षा पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव : सुनीता कुमारी
मध्य विद्यालय, गडरी की पांचवी कक्षा की छात्रा सुनीता कुमारी सुकन्या योजना के बारे में जानती हैं, लेकिन पूरी जानकारी नहीं है. पंचायत की मुखिया, आंगनबाड़ी सेविका और शिक्षक के बताने पर वह आवेदन जमा की हैं. इस योजना के तहत पूरी पढ़ाई के लिए सरकार की ओर से पैसे मिलेंगे. अगर ऐसा होगा, तो उन्हें बहुत फायदा होगा. वह अच्छे से पढ़ाई कर पायेंगी. पैसे की दिक्कत नहीं होगी, तो आगे तक पढ़ाई की राह आसान हो जायेगी. उनकी जैसी कई लड़कियों को इससे काफी लाभ होगा.

बेटियों को दिलायेंगे अच्छी शिक्षा : चरिया उरांव
चरिया उरांव चार बेटियों की मां हैं. एक बेटी की शादी हो चुकी है. तीन बेटियों को सुकन्या योजना का लाभ दिलाने के लिए आवेदन जमा की हैं. इन्हें योजना की पूरी जानकारी नहीं है. कहती हैं कि अगर सरकार बच्चियों के जन्म से लेकर शादी तक का खर्च दे रही है, तो यह बेहतर योजना है. पैसा नहीं होने के कारण बड़ी बेटी को अच्छी शिक्षा नहीं दिला पाये. अब तीनों बेटियों को अच्छी तरह पढ़ायेंगे. बैंक में खाता खोलने के बाद समस्या आ रही है, क्योंकि उन्हें यह नहीं पता था कि किस बैंक में खाता खोलना है.

बच्ची पढ़ेगी, तो इससे बड़ा फायदा और क्या होगा : रोज केरकेट्टा
आंगनबाड़ी सेविका रोज केरकेट्टा बताती हैं कि उन्होंने पहले 50-60 आवेदन जमा कराया था, लेकिन मात्र 20 बच्चियों का ही आवेदन सही पाया गया, क्योंकि बैंक खाता को लेकर परेशानी आ रही है. लाभुक किस बैंक में खाता खोले इसके बारे में उनके पास पर्याप्त जानकारी नहीं है. बेटी का काम चूल्हा तक ही सीमित नहीं है. लड़कियां पढ़ेंगी, तो समाज में काफी आगे बढ़ेंगी. इन्हें इस योजना से नया जीवन मिलेगा. वाकई इस योजना के आने के बाद बड़े बदलाव की उम्मीद बढ़ गयी है.