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  • Dec 17 2018 5:07PM

ऐसे हो सकती है किसानों की आमदनी चौगुनी

ऐसे हो सकती है किसानों की आमदनी चौगुनी

समीर रंजन

झारखंड के किसानों की आमदनी अब दोगुनी से चौगुनी करने की तैयारी की जा रही है. केंद्र सरकार ने देश के किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने की बातें कही थीं, लेकिन राजधानी रांची के खेलगांव में आयोजित ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट, 2018 में किसानों की आय चौगुनी करने की बातें उठीं. अब इस दिशा में सरकार ने प्रयास करना शुरू भी कर दिया है. किसानों की आय चौगुनी तभी होगी, जब किसान भाई-बहन जागरूक होकर वर्तमान योजनाओं का लाभ उठायेंगे.

कृषि वैज्ञानिकों के कुशल मार्गदर्शन में सफल किसानों के अनुभवों का लाभ लेते हुए आधुनिक तकनीक अपना कर खेती करेंगे. मिट्टी की जांच, गुणवत्तापूर्ण बीज, बीजोपचार, जैविक खाद व कीटनाशकों का इस्तेमाल, समुचित सिंचाई व्यवस्था, बेहतर बाजार की सुविधा हो, तो किसानों की आमदनी चौगुनी हो सकेगी. यह अंक अन्नदाता किसानों को समर्पित है. इसमें किसानों की आमदनी दोगुनी से चौगुनी करने के हर पहलू को फोकस किया गया है.

राज्य के किसानों की आय चौगुनी करने के लिए कई पहलुओं को देखना जरूरी है. राज्य में कुल 79.71 लाख हेक्टेयर भूमि है. इसमें से 38 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है यानी 48 फीसदी क्षेत्र में राज्य के किसान खेती करते हैं. राज्य में वार्षिक वर्षापात 1300 मिलीमीटर है. वहीं राज्य की प्रमुख फसलों में धान, मोटे अनाज, मक्का, गेहूं, दलहन एवं तेलहन मुख्य हैं. सब्जी व फलों की बात करें, तो राज्य में आम, अमरूद, पपीता, केला, फूलगोभी, बैंगन, फ्रेंचबीन, टमाटर, ओकरा, मटर जैसी सब्जियां एवं मिर्च प्रचुरता में उपलब्ध हैं. वन उत्पाद जैसे- इमली, चिरौंजी, शाल बीज काफी मात्रा में होते हैं. राज्य के करीब 28 लाख किसान खेती-बारी पर आश्रित हैं. अन्य फसलों की तरह रबी और खासकर दलहन व तिलहन पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

ऐसे बढ़ेगी आमदनी
किसान भाई-बहन अपने खेतों की मिट्टी की जांच जरूर करायें. बीजोपचार, जैविक खाद व कीटनाशक का प्रयोग व सिंचाई पर विशेष ध्यान दें. सिर्फ पैदावार बढ़ाने से आमदनी नहीं बढ़ेगी, बल्कि खेतों की जुताई के तरीके, शून्य जुताई तकनीक, लागत कम करना, टपक सिंचाई पद्धति पर जोर, फसल को नष्ट होने से बचाना, खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन, सामूहिक मार्केटिंग समेत अन्य पहलू पर ध्यान देना होगा, तभी राज्य के किसानों की आय बढ़ सकती है.

1.
अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी जांच कराइए
किसी भी फसल की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की जांच जरूरी है. इससे पता चल जाता है कि मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है और कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं. मिट्टी जांच कराये बगैर उर्वरकों का उपयोग करने से न सिर्फ पैसे की बर्बादी होगी, बल्कि मिट्टी का स्वास्थ्य भी खराब होगा. फसलों को भी उचित लाभ नहीं मिलेगा. हर हाल में मिट्टी की जांच करा कर ही खेती करनी चाहिए. अपने खेतों की मिट्टी की जांच आप अपने नजदीकी मिट्टी जांच प्रयोगशाला, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू, कांके), कृषि विज्ञान केंद्र, रांची के कांके स्थित मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग की मिट्टी जांच प्रयोगशाला में आकर करा सकते हैं. सॉयल हेल्थ कार्ड योजना के तहत करीब आठ लाख किसानों के बीच सॉयल हेल्थ कार्ड का वितरण किया जा चुका है.

2.
बीजोपचार जरूरी
किसान भाई-बहन अगर आप धान की खेती करते हैं, तो बाजार से बीज खरीद कर लाने के बाद सबसे पहले उसका बीजोपचार जरूर कर लें. बीजोपचार के बाद ही बीज को खेत में बोएं. ऐसा करने से धान की फसलों को बीजजनित रोगों से बचाया जा सकता है और उत्पादन भी बेहतर होगा. आप एनएससी का बीज या सरकारी संस्था से ही बीज की खरीदारी करें.

राज्य में 1055 बीज ग्राम
बीज खरीद में तेजी लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार बीज ग्राम बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है. पहले से गठित 516 बीज ग्राम के अलावा 539 यानी कुल 1055 बीज ग्राम का गठन हुआ है. इससे तीन लाख क्विंटल धान बीज का उत्पादन हुआ है.

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साढ़े 72 लाख मीट्रिक टन धान उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित
कृषि विभाग ने खरीफ वर्ष 2018-19 में 7255 हजार मीट्रिक टन यानी साढ़े 72 लाख मीट्रिक टन धान उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके लिए करीब 18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती करने का लक्ष्य है. करीब नौ लाख हेक्टेयर में अधिक उपजवाले धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है. इससे करीब 31 लाख 50 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है.

धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1750 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित
झारखंड कैबिनेट ने धान खरीद का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1750 रुपये रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है. किसानों को अधिकतम 15 दिनों में राशि का भुगतान हो जायेगा, हालांकि वित्तीय वर्ष 2017-18 में धान खरीद का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1600 रुपये प्रति क्विंटल और 150 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बोनस दिया गया था, लेकिन वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए फिलहाल बोनस देने के मुद्दे पर कोई फैसला नहीं किया गया. सरकार किसानों से सीधे धान खरीदेगी. इसके लिए पलामू प्रमंडल में फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के माध्यम से और शेष चार प्रमंडलों में झारखंड स्टेट फूड कॉरपोरेशन के माध्यम से धान की खरीद की जायेगी. धान खरीद के लिए फिलहाल 239 केंद्र चिह्नित किये गये हैं. इस बार धान क्रय केंद्र पर ही खरीद से संबंधित डाटा ऑनलाइन करने की व्यवस्था की गयी है, वहीं यह व्यवस्था भी की गयी है कि मिल के पास धान पहुंचते ही वह उसके बदले चावल उपलब्ध करा देंगे.

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न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी
किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से जरूरी कृषि नीति में बदलाव किया गया है. इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में सभी 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है. सबसे अधिक मूंग के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में प्रति क्विंटल 1400 रुपये की वृद्धि की है, वहीं सामान्य धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में दो सौ रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए धान में 180 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है.

3.
जैविक खेती से लागत कम, मुनाफा अधिक
राज्य में 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है. जैविक खेती-बारी में राज्य के करीब 15,138 किसान जुड़े हैं. राज्य में जैविक खेती से कुल उत्पादन 2.395 मीट्रिक टन है. वर्ष 2028 तक पूरे राज्य को जैविक बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. राज्य के 14 जिले, जिसमें रांची, गुमला, पाकुड़, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम, लातेहार, सरायकेला-खरसावां, दुमका, हजारीबाग, देवघर, धनबाद, गिरिडीह व बोकारो में जैविक खेती की जाती है. ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट, 2018 में मुख्यमंत्री ने झारखंड को जैविक हब बनाने की बात कही है. इसके लिए राज्य सरकार सभी जिलों में जैविक उत्पाद कलस्टर सेंटर का निर्माण करायेगी. उसकी ब्रैंडिंग झारखंड जैविक के तहत की जायेगी, वहीं जैविक उत्पादों के लिए बाजार मुहैया कराने के उद्देश्य से पतंजलि के साथ करार भी किया गया है. बीज ग्राम की तर्ज पर जैविक ग्राम का भी गठन किया जा रहा है, ताकि पूरी तरह से रासायनिक खाद का प्रयोग बंद हो सके.

जैविक खेती में इन फसलों के उत्पादन पर जोर
सब्जी : पत्तागोभी, मटर, फूलगोभी, टमाटर, फ्रेंचबीन, शिमला, मिर्च, बेबीकॉर्न, ब्रोकली व भिंडी.
मसाला : मिर्च, अदरक, हल्दी, जीरा, लहसुन व मेथी.
औषधीय पौधे : ओलेविरा, सतावर, कालमेघ व तुलसी.
मोटा अनाज : रागी.
दलहन : अरहर, चना व उरद.
नकदी फसल : ईख व काजू.
तेलहन : सरसों, सोयाबीन, अलसी व तीसी.

4.
अच्छी सिंचाई व्यवस्था हो
किसान भाई-बहनों के लिए अपने खेतों में पानी पहुंचाना एक बड़ी समस्या है. बारिश पर आधारित खेती-बारी में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता व बिजली का अभाव रहने के कारण खेती बदहाल हो जाती है. कुछ किसान हैं, जो मोटर पंप के माध्यम से अपने खेतों तक पानी पहुंचाते हैं. अब सरकार की कोशिश है कि राज्य के किसान सोलर पंप के माध्यम से खेतों में सिंचाई की व्यवस्था करें. किसान भाई-बहन सौर ऊर्जा को अपनायें, ताकि कृषि क्षेत्र में उनको मदद मिले और उनकी आमदनी भी बढ़ सके. किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सोलर पंप दिया गया है. विभिन्न जिलों के किसानों के बीच 467 सोलर पंप का वितरण किया गया है. इससे किसानों को सिंचाई करने में काफी आसानी हो रही है. किसानों को सोलर पंप पर 90 फीसदी सब्सिडी दी गयी है. इसका लाभ किसान उठा रहे हैं. इसके अलावा राज्य सरकार किसानों को सोलर फार्मिंग के लिए प्रोत्साहित कर रही है. किसान भाई-बहन कृषि कार्य के साथ-साथ बागवानी, पशुपालन और सोलर फार्मिंग पर भी ध्यान दें. राज्य सरकार सोलर फार्मिंग करनेवाले किसानों की बिजली को तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदेगी. इससे भी किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकती है. सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने किसानों को अलग फीडर से बिजली देनी की घोषणा भी की है. इसके तहत किसानों को हर हाल में छह घंटे बिजली उपलब्ध करायी जायेगी. सरकार का दावा है कि अप्रैल-मई 2019 से किसानों को अलग फीडर से बिजली मिलने लगेगी.

5.
सब्जी उत्पादन में आत्मनिर्भर है झारखंड
राज्य में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों की खेती होती है. इससे हर साल करीब 3700 मीट्रिक टन सब्जी का उत्पादन होता है. राज्य से करीब 40 से 50 फीसदी सब्जियों का निर्यात होता है. यहां की सब्जियां पश्चिम बंगाल के कोलकाता, ओड़िशा के भुवनेश्वर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी समेत अन्य राज्यों में जाती हैं.

इन सब्जियों की होती है पैदावार
राज्य में बैंगन, आलू, टमाटर, मिर्च, मटर, पत्तागोभी, फूलगोभी, शिमला मिर्च, ब्रोकली, फ्रेंचबीन, कटहल, अदरक, बोदी, भिंडी, कद्दू, प्याज, सेम, सकरकंद, शलगम, धनियां समेत अन्य कई सब्जियों की अच्छी पैदावार होती है.

6.
फूलों की खेती से भी होगी आमदनी
राज्य के 1.6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हो रही है. सूबे में पांच तरह के फूल गुलाब, गेंदा, जरबेरा, ग्लेडियोलस व रजनीगंधा की खेती हो रही है. रजनीगंधा व ग्लेडियोलस फूलों की खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी कम करने की कोशिश हो रही है.

नये किसान भी कर सकते हैं फूलों की खेती
फूल की खेती करने के लिए किसानों के पास कम से कम 12 डिसमिल जमीन होनी चाहिए. सरकारी सुविधा पाने के लिए किसान को अपने जिला उद्यान पदाधिकारी से मुलाकात करनी होगी. यहां उन्हें पूरी जानकारी मिल जायेगी. सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसान को अपनी फोटो, जमीन से संबधित कागजात और एफिडेविट जमा करना होगा. इसके साथ ही पंचायत क्षेत्र में रहनेवाले लाभुकों को अपने आवेदन पत्र को मुखिया के हस्ताक्षर के बाद उसे जिला कृषि पदाधिकारी के दफ्तर में जमा करना होगा. आवेदन का प्रारूप विभागीय वेबसाइट www.nhmjharkhand.com पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं. आवेदन जमा करने के बाद किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है.

7.
फल उत्पादन का है बेहतर स्थान
राज्य में आम की खेती 57,474 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही है. यहां की लीची बिहार की लीची से पहले पकती है. राज्य में 5555 हेक्टेयर में लीची का पौधरोपण होता है. राज्य बागवानी मिशन के प्रयास के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा प्रखंड में 450 हेक्टेयर क्षेत्र में मेंड्रिन की खेती हो रही है. गोइलकेरा प्रखंड को मेंड्रिन हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है. काजू उत्पादन के क्षेत्र में राज्य की गिनती होने लगी है. काजू की खेती पूर्वी सिंहभूम जिले के अलावा पश्चिम सिंहभूम एवं सरायकेला में हो रही है. इसका विस्तार देवघर, दुमका, जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा, खूंटी और सिमडेगा जिले में भी किया जा रहा है.

8.
प्रसंस्करण व भंडारण पर जोर
फसल कटने के बाद उसे भंडारण करने व एक जगह से दूसरी जगह अनाज ले जाने में काफी बर्बादी होती है. इस बर्बादी को कम करने के उद्देश्य से सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण पर जोर दिया है. किसान भाई-बहन प्रसंस्करण और भंडारण के उपाय से बिना लागत व बिना उत्पादन बढ़ाये मुनाफा कमा सकते हैं. अनाज, सब्जियों व फलों को रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज का होना बहुत जरूरी है. इससे जहां अनाज खराब नहीं होगा, वहीं बिना बिके खाद्य पदार्थों का उपयोग बाद में हो सकता है. इसे इस तरह से देखा जा सकता है कि अगर टमाटर का उत्पादन अधिक हुआ, तो उसका मूल्य गिर जाता है, लेकिन अगर उसी टमाटर का सॉस बना दिया जाता है, तो वह अधिक समय तक रह सकता है और वह अधिक मूल्य पर भी बिकता है. इसी तरह के अन्य उत्पादों का भी उपाय किया जा सकता है.

फूड प्रोसेसिंग यूनिट
किसानों के बचे अनाज यूं ही बर्बाद न हो, इसके लिए सरकार ने 50 फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की शुरुआत कर दी है. पिछले चार साल में राज्य में कृषि के विकास में काफी तेजी देखने को मिल रही है. इसी के तहत पिछले चार साल में राज्य में 65 से अधिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट लग चुकी है.

टमाटर-मटर उत्पादक किसानों के लिए लगेगा प्रोसेसिंग प्लांट
सब्जी उत्पादक किसानों को बेहतर कीमत दिलाने के उद्देश्य से एक साल के अंदर टमाटर और मटर प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना होगी. यह प्लांट नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड यानी एनडीडीबी लगायेगा. बोर्ड की विपणन शाखा इन प्रसंस्कृत सब्जियों को बाजार में बेचेगी. इसके लिए राज्य के करीब 50 हजार किसानों को इससे जोड़ा जायेगा.

100
प्रखंडों में बनेगा कोल्ड रूम
राज्य के करीब 100 प्रखंडों में कोल्ड रूम बनाने पर जोर दिया जा रहा है. इन कोल्ड रूम की क्षमता 30 मीट्रिक टन की होगी. इससे किसानों को अपनी सब्जियों को रखने व जल्द खराब होने की चिंता से मुक्ति मिलेगी.

9.
सामूहिक मार्केटिंग पर जोर
फसल तैयार होने के बाद सबसे अधिक समस्या बाजार की होती है. बड़े बाजार नहीं होने के कारण किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है. बिचौलिये हावी होते हैं. मजबूरीवश वे औने-पौने दामों पर फसल को बेचने को मजबूर होते हैं. इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने जहां कई फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू कर दिया है, तो कई फसलों के मूल्य में काफी अंतर दिखता है. किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए तकनीक का भी सहारा लेना चाहिए. इसलिए अब सामूहिक मार्केटिंग पर जोर दिया जा रहा है.

10.
किसानों के अन्य सात सूत्री कार्यक्रमों पर जोर
उत्पादन में वृद्धि
लागत का प्रभावी उपयोग
उपज के बाद नुकसान कम करना
गुणवत्ता में वृद्धि
कृषि बाजार में सुधार
जोखिम, सुरक्षा एवं सहायता
बागवानी, एकीकृत फार्मिंग, श्‍वेत क्रांति, नीली क्रांति, कृषि वानिकी, मधुमक्खी पालन विकास एवं रूरल बैकयार्ड पोल्‍ट्री डेवलपमेंट

11.
किसानों को मिलेगा एक साल के लिए ब्याज मुक्त कर्ज
किसानों को खेती-बारी के लिए अब अधिक ब्याज दर पर लोन लेने की जरूरत नहीं है. अब राज्य सरकार किसानों को शून्य फीसदी ब्याज पर लोन उपलब्ध करायेगी. इस लोन को किसान भाई-बहनों को एक साल के अंदर लौटाना होगा. किसान भाई-बहन अगर एक साल के अंदर लोन पर ली गयी राशि बैंक को लौटा देते हैं, तो उन्हें एक पैसा भी ब्याज नहीं देना पड़ेगा. उस एक साल का ब्याज राज्य सरकार खुद भरेगी.

12.
कृषि विकास दर में 18 फीसदी की बढ़ोतरी
राज्य सरकार ने कृषि विकास में 18 फीसदी बढ़ोतरी की बात कही है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि वर्ष 2013-14 में कृषि विकास दर -4.5 फीसदी थी, वहीं वर्ष 2018-19 में 14 फीसदी हो गयी. इस तरह पिछले चार साल में कृषि विकास दर में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

13.
किसानों के लिए कई सरकारी योजनाएं
कृषि क्लिनिक योजना
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना
बीज ग्राम योजना
विशेष फसल योजना
बंजर भूमि/राइस फैलो विकास योजना
जलनिधि योजना
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
रिवराइन फिश फार्मिंग योजना
झारखंड कृषि कार्ड योजना
किसान क्रेडिट कार्ड योजना
परंपरागत कृषि विकास योजना
मेरा गांव मेरा गौरव योजना
शत-प्रतिशत बीजोपचार अभियान

14.
किसान भाई-बहन इनका उठाएं लाभ
1.
किसान विकास पत्र : कम आयवाले परिवारों की बचत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसान विकास पत्र की शुरूआत हुई. इसके तहत आपका पैसा आठ साल चार महीने यानी सौ महीने में दोगुना हो जायेगा. इसका लाभ डाकघर से लिया जा सकता है.

2.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना : किसानों की मेहनत बर्बाद न हो. फसल की सुरक्षा देने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत हुई. इसके तहत किसानों को बीमा कंपनियों द्वारा खरीफ की फसल के लिए दो प्रतिशत और रबी की फसल के लिए डेढ़ प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना है. बीमा पर भुगतान की सीमा भी हटा दी गयी है. इसमें खेत से लेकर खलिहान तक किसानों को बीमा सुरक्षा दिये जाने का प्रावधान किया गया है. वित्तीय वर्ष 2017-18 में राज्य के साढ़े 14 लाख किसानों का फसल बीमा कराया गया.

3.
श्रीविधि तकनीक : इस विधि से पौधों की जड़ों में नमी बरकरार रखना ही पर्याप्त होता है. इस तकनीक से धान की खेती में जहां भूमि, श्रम, पूंजी और पानी कम लगता है, वहीं उत्पादन तीन सौ प्रतिशत तक ज्यादा मिलता है.

4.
किसान कॉल सेंटर : किसानों को खेती-बारी करने में किसी तरह की परेशानी न हो. उन्हें ससमय सही जानकारी मिल सके, इस उद्देश्य से किसान कॉल सेंटर की शुरुआत हुई. यहां एक फोन कॉल पर आपके प्रश्नों का जवाब मिलता है. इसके तहत खेती-किसानी संबंधित समस्याएं व परामर्श उनकी क्षेत्रीय भाषा में विशेषज्ञों द्वारा उपलब्ध कराया जाता है. इसके लिए टॉल फ्री नंबर 1551 या 1800-1800-1551 पर फोन कर आप नि:शुल्क जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. झारखंड के किसान, कृषि भवन रांची स्थित किसान कॉल सेंटर की दूरभाष संख्या 0651-2230541 पर एवं बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के एटिक सेंटर स्थित किसान कॉल सेंटर दूरभाष संख्या 0561-2450698 या 0651-2450955 पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

5.
कृषि उपकरण बैंक की स्थापना : किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिए कृषि उपकरण बैंक की स्थापना की गयी है. किसान भाड़े पर आधुनिक कृषि उपकरण लेकर कृषि कार्य कर सकते हैं.

6.
नीम लेपित यूरिया की व्यवस्था : सरकार ने किसानों के लिए नीम लेपित यूरिया की व्यवस्था की है. इसके उपयोग से किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ इसकी कम मात्रा के इस्तेमाल से भी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है.

7.
किसानों के लिए कई उपयोगी एप : किसानों को सही समय पर सूचना देने के कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय के कई पोर्टल हैं. इसके जरिये किसान भाई खेती संबंधी सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं. केंद्र सरकार का किसान पोर्टल- http://farmer.gov.in, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की वेबसाइट http://www.icar.org.in, केवीके की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्रदान करने एवं उसकी उच्च स्तर पर निगरानी एवं प्रबंधन के लिए बनाये गये पोर्टल http://kvk.icar.gov.in/ पर किसानों के लिए योजनाओं की जानकारी उपलब्ध है. इसके अलावा विभिन्न तरह के मोबाइल एप जैसे- किसान सुविधा एप, पूसा कृषि एप, भुवन ओलावृष्टि एप, फसल बीमा एप, एग्री मार्केट एप, पशु पोषण एप आदि मुख्य हैं. ये सभी एप्‍स www.mkisan.gov.in के अलावा गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किये जा सकते हैं.

15.
-नाम योजना से उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री
किसानों को अपने उत्पादित फसलों को औने-पौन दाम पर नहीं बेचना पड़े और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से सरकार ने राष्ट्रीय कृषि बाजार पोर्टल की शुरुआत की है. इसे ई-मंडी या ई-नाम भी कहा जाता है. इससे न केवल किसानों को लाभ मिलेगा, बल्कि थोक कारोबार व उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलेगा. इस प्लेटफॉर्म पर देशभर के किसी भी कोने के थोक कारोबारी गुणवत्तापूर्ण माल खरीद सकेंगे. इस ऑनलाइन कारोबार के लिए आलू- प्याज के अलावा गेहूं, सेब, दलहन, मोटे अनाज, कपास सहित अन्य की बिक्री कर सकते हैं.

राज्य के कीर्तिमान
लीची, भिंडी व मटर के उत्पादन में देशभर में झारखंड का 5वां स्थान
चना, गोभी व फ्रेंचबीन के उत्पादन में 6ठा स्थान
कटहल के उत्पादन में 8वां स्थान
बागवानी क्षेत्र में राज्यभर में 11 प्रोसेसिंग यूनिट लगायी गयी
राज्य में काजू के अलावा अदरक, हल्दी, शहद, लेमनग्रास की प्रोसेसिंग यूनिट लगायी गयी
केला, आम, पपीता आदि फलों को पकाने के लिए रिपेइंग चैंबर का निर्माण हुआ
रांची, हजारीबाग व पूर्वी सिंहभूम में एक-एक रिपेइंग चैंबर का निर्माण
मशरूम उत्पादन के लिए किसानों के प्रशिक्षण के चार इकाइयों की स्थापना

कृषि क्षेत्र में बढ़ते कदम
2022
तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
टमाटर, प्याज, मटर आदि के उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास
मत्स्य उत्पादन क्षेत्र में 83 फीसदी की बढ़ोतरी
अगले वित्तीय वर्ष 2019-20 में जैविक खेती पर 65 करोड़ रुपये होंगे खर्च. इसमें 50 फीसदी अन्नदाता को बांटा जायेगा
राज्य में जल्द खुलेगा इजराइल का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

किसानों के लिए सरकार की घोषणाएं
2019
से 2021 तक राज्य के 28 लाख किसानों को मिलेगा मोबाइल
एक साल के भीतर ब्याज चुकाने पर मिलेगा ब्याजरहित लोन
अप्रैल-मई 2019 से किसानों को अलग फीडर से मिलेगी छह घंटे बिजली
50
फूड प्रोसेसिंग प्लांट का शिलान्यास
2019
से किसानों को बीमा का प्रीमियम नहीं लगेगा