aamukh katha

  • Apr 3 2018 11:12AM

इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ पाकुड़ के युवा दंपती ने दूध व्यवसाय को अपनाया

इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ पाकुड़ के युवा दंपती ने दूध व्यवसाय को अपनाया

 अमित झा


अपने गांव व माटी से जुड़ कर बेहतर करने का अलग सुकून है. ऐसे में अगर वो काम पहचान बन जाये, तो इससे बड़ी उपलब्धि क्या होगी. कुछ ऐसी ही कहानी इंजीनियर युवा दंपती अंशु सिंह व अभिनव किशोर की है, जिन्होंने कॉरपोरेट करियर को अलविदा कह कर पाकुड़ के समसेरा गांव में गौ पालन कर दूध उत्पादन के क्षेत्र में नयी कहानी लिख दी. पाकुड़ के ये युवा दंपती न सिर्फ आज खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी प्रेरित कर आर्थिक मजबूती प्रदान कर रहे हैं.

स्टार्टअप इंडिया से प्रेरित हो कर लौटे गांव
अभिनव किशोर और उनकी पत्नी अंशु सिंह की दूध का सफर नौ साल पहले शुरू होती है. वर्ष 2009 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद पांच साल तक विभिन्न कॉरपोरेट हाउस और कंपनियों में सेवा दी, लेकिन उन्हें यह नौकरी रास नहीं आ रही थी. कड़ी मेहनत के बावजूद वो जिंदगी का आनंद नहीं ले पा रहे थे. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्टार्टअप इंडिया की मुहिम से प्रेरित होकर उन्होंने जॉब क्रिएटर बनने का निश्चय किया. अपने छह साल के सफल कॉरपोरेट करियर को अलविदा कहा और वो अपने गृह क्षेत्र पाकुड़ लौट आये. आज गौ पालन के क्षेत्र में उनकी अपनी पहचान है.

धीरे-धीरे बढ़ा कारवां
पाकुड़ लौटने के बाद वर्ष 2016 में अभिनव ने दो गाय खरीदी और गौ पालन शुरू किया. इस दौरान लोगों ने उनका मजाक तक उड़ाया, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर वे अपने काम में लगे रहे. माता-पिता और ससुराल के लोगों ने उनका उत्साहवर्द्धन और मार्गदर्शन किया. दो गाय से प्रतिमाह लगभग 8000 रुपये की आमदनी शुरू हो गयी. इसके बाद पाकुड़ शहर से छह किलोमीटर दूर सोनाजोड़ी पंचायत के समसेरा गांव में पांच एकड़ जमीन लेकर एक डेयरी शुरू किया. डेयरी उद्योग के जरिये लोगों को शुद्ध व ताजा दूध उपलब्ध कराना तथा आत्मनिर्भर बनना ही इसका लक्ष्य रखा गया. चूंकि इस पेशे से उनका कोई पारंपरिक नाता नहीं था, फिर भी हिम्मत बनाये रखी. दोनों ने अपनी मेहनत, लगन और सूझबूझ के साथ काम की शुरुआत की. सबसे पहले युवा दंपती ने अत्याधुनिक पशु शेड का  निर्माण कराया. चार गायों के साथ काम शुरू हुआ. जब काम में रुचि बढ़ी और भरोसा बढ़ने लगा, तो उन्होंने जिला गव्य विकास कार्यालय, पाकुड़ से मदद ली. गव्य विकास निदेशालय, रांची के उपनिदेशक मुकुल सिंह का भी मार्गदर्शन मिला. इसके बाद बड़े स्तर पर कारोबार बढ़ाने की शुरुआत की गयी. इनकी मेहनत देख इलाहाबाद बैंक, पाकुड़ ने भी इनके प्रोजेक्ट में दिलचस्पी दिखायी और करीब 20 लाख रुपये का निवेश किया.

ढाई सौ से ज्यादा घरों में पहुंचता है दूध
गौ धाम डेयरी में गायों की संख्या बढ़ायी गयी. आज 40 गाय व 10 भैंसें हैं. इसका दूध पाकुड़ के ढाई सौ से ज्यादा घरों में पहुंचता है. अभी प्रतिदिन लगभग 500 लीटर दूध का उत्पादन होता है. इसके बेहतर संचालन के लिए लगभग 15 कर्मचारी हैं. गौ धाम डेयरी में गायों के साथ-साथ बछिया पालन पर भी फोकस किया गया है. अभी तक इनकी चार बछिया गाय बनकर दूध दे रही है. साथ ही अन्य 12 बछिया बड़े हो गये हैं. युवा दंपती के पास उन्नत नस्ल का सांड़ भी है.

युवा दंपती से कई किसान प्रभावित
अभिनव और अंशु ने देसी नस्ल की गायों के संरक्षण एवं संवर्धन की ओर भी कदम बढ़ाया. उन्होंने अपनी गायों में देसी नस्ल गिर, रेड सिंधी, थारपारकर जैसे सांड़ का सीमेन दिलवाना शुरू कर दियासाथ ही पशुओं को हरा चारा खिलाने के लिए तीन एकड़ में मकई लगायी गयी. इनकी कोशिश है कि आनेवाले दिनों में हरा चारा से साइलेज का निर्माण कर लंबे समय तक पशुओं को हरा चारा खिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करायी जाए. वो अजोला का भी उत्पादन कर रहे हैं. वर्मी कंपोस्ट बनाने और इंटीग्रेटेड फार्मिंग का भी काम शुरू हो चुका है. डेयरी में मशरूम की खेती भी की जाने लगी है. केवल दूध उत्पादन से वो बैंक लोन, कर्मचारी व अन्य खर्च के बाद प्रतिमाह 40,000 रुपये से अधिक कमा रहे हैं. अभिनव के मुताबिक, कुछ समय बाद बैंक लोन के रूप में दी जाने वाली 50,000 रुपये प्रतिमाह की राशि खत्म होने पर प्रतिमाह एक लाख रुपये से अधिक की कमाई करने लगेंगे. वर्मी कंपोस्ट, मशरूम उत्पादन, इंटीग्रेटेड फार्मिंग से भी आमदनी हो रही है. इनके डेयरी कारोबार से अन्य किसान भी प्रेरणा ले रहे हैं. लगभग 10 किसान परिवार दूध उत्पादन के कारोबार से जुड़ गये हैं.

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किसानी से तकनीक की दोस्ती का कमाल
अंशु और अभिनव ने अपनी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि का बखूबी इस्तेमाल अपने डेयरी फार्म में किया है. उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त दंपती ने डेयरी फॉर्म को अत्याधुनिक और उच्चस्तरीय बनाने में नवीनतम तौर-तरीकों और उपकरणों का उपयोग किया है. बिजली, पानी, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस कैटल शेड, मिल्किंग मशीन, जनरेटर समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं.

प्रशिक्षण सत्रों में संबोधन के लिए किया जाता है आमंत्रित : अंशु- अभिनव
अंशु और अभिनव कहते हैं कि उनकी मेहनत रंग लायी. गव्य विकास विभाग द्वारा उन्हें काफी सहयोग मिला. विभागीय तौर पर परिदर्शन एवं परिभ्रमण के लिए ओड़िशा, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में भेजा गया था. इसका उन्हें काफी फायदा मिला. आज पशुपालन व जिला गव्य विकास विभाग, पाकुड़ द्वारा जिला स्तर पर होने वाले प्रशिक्षण सत्रों को संबोधित करने के लिए उन्हें आमंत्रित किया जाता है. कई प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन तो उनके गौ धाम डेयरी फार्म में ही होता है.

प्रगतिशील किसानों को मिलता है सहयोग : मुकुल सिंह
गव्य विकास निदेशालय के सहायक निदेशक मुकुल सिंह कहते हैं कि अंशु और अभिनव जैसे प्रगतिशील किसान उदाहरण हैं. गौ पालन के जरिये नौकरीपेशा लोग भी खुद को स्थापित करने लगे हैं. विभागीय स्तर पर डेयरी कारोबार के लिए प्रशिक्षण से लेकर आर्थिक सहयोग तक की व्यवस्था है. इससे न सिर्फ वे स्वयं आत्मनिर्भर हो रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी आर्थिक रूप से मजबूत कर रहे हैं.

अंशु-अभिनव की सफलता की कहानी दिलचस्प है. यह इस बात को साबित करती है कि गांवों में भी व्यापक संभावनाएं हैं. दोनों ने अपनी शिक्षा का उपयोग अपने गांव परिवार में जाकर जिस तरह किया है, वह उत्साह और आशा पैदा करता है. खेती-किसानी में तकनीक के उपयोग से न सिर्फ वे आत्मनिर्भर हुए हैं, बल्कि अपने गांव समाज का हुलिया भी खामोशी से बदलने में लगे हैं. इसी बहाने झारखंड भी दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है.