aamukh katha

  • Sep 18 2019 2:43PM

बालपन से ही स्वच्छता की सीख देते हैं टानाभगत

बालपन से ही स्वच्छता की सीख देते हैं टानाभगत

पवन कुमार
प्रखंड: कुड़ू
जिला: लोहरदगा

साफ-सुथरा घर और आंगन. स्वतंत्रता सेनानी आशीर्वाद टानाभगत के गांव बंदुवा की यही पहचान है. लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड अतंर्गत बड़कीचांपी पंचायत का बंदुवा टानाभगत बाहुल्य गांव है. यहां करीब 45 परिवार रहते हैं, जबकि तीन गैर टानाभगत परिवार हैं. गांव में दूर से ही स्वच्छता दिखाई देती है. अधिकतर परिवारों के घर और आंगन साफ और सुंदर दिखाई पड़ते हैं. बारिश का मौसम और मिट्टी का आंगन होने के बावजूद साफ-सफाई में कोई कमी नहीं दिखाई देती है, हालांकि जब गांव पहुंचे, तो अधिकतर परिवार खेती-बारी में लगे हुए थे. घर के आस-पास गंदगी का नामोनिशान नहीं था. मोटी-चौड़ी सफेद व साफ दीवारें और खपरैल मकान बंदुवा गांव की पहचान है.

80 फीसदी लोग जाते हैं शौचालय
बंदुवा गांव में लगभग सभी घरों में शौचालय है. जिन घरों में स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय नहीं बन पाया, उनलोगों ने अपने खर्चें से शौचालय का निर्माण किया है, हालांकि ग्रामीणों की शिकायत है कि शौचालय का निर्माण सही तरीके से नहीं किया गया है. इसके कारण शौचालय इस्तेमाल होने से पहले जर्जर हो गया है. कई शौचालय जर्जर दिखे, जिनका इस्तेमाल कर पाना संभव नहीं था. अभी भी गांव में कुछ परिवार ऐसे हैं, जो खुद से शौचालय बनाने में असमर्थ हैं. वो खुले में शौच जाने को मजबूर हैं. इनकी संख्या करीब 20 फीसदी है.

यह भी पढ़ें: दुनिया को स्वच्छता का पाठ पढ़ा रहे झारखंड के टानाभगत

आजादी की लड़ाई में बंदुवा गांव का योगदान
कुड़ू प्रखंड के बंदुवा गांव का आजादी की लड़ाई में खासा योगदान रहा है. गांव में चार स्वतंत्रता सेनानियों का घर है. चारों टानाभगत हैं और इन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाने के लिए ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया गया है. पूरन टानाभगत, चंदा टानाभगत, आशीर्वाद टानाभगत और गुदरी टानाभगत को ताम्रपत्र दिया गया है. फिलहाल इस गांव में कई ऐसे टानाभगत परिवार हैं, जिनकी सरकारी नौकरी है. टानाभगत परिवार के युवक-युवतियां विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. ऐसे भी परिवार हैं, जो आजीविका के लिए पलायन करते हैं.

आशीर्वाद टानाभगत की रग-रग में बसी थी स्वच्छता
बंदुवा गांव तक पहुंचने वाले चौराहे पर आशीर्वाद टानाभगत की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गयी है. प्रतिमा पर लगे शिलापट्ट के मुताबिक उनका जन्म एक जनवरी 1920 में बंदुवा गांव में हुआ था. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने कुड़ू थाने का घेराव किया था. आजादी से पूर्व कांग्रेस के रामगढ़ अधिवेशन में शामिल होने के लिए वे पैदल चलकर गये थे. वहां महात्मा गांधी से मुलाकात की थी. आंदोलन के दौरान फूलवारी शरीफ, पटना की जेल में भी रहे थे. उनकी बड़ी बहू हीरामणि देवी बताती हैं कि उनके ससुर हर रोज सुबह सबसे पहले उठते थे. सुबह की सैर के बाद नहा-धोकर पूजा-पाठ करते थे, तब कहीं बाहर जाते थे. घर में गंदगी रहने पर खुद से साफ कर देते थे. हमेशा घर के आस-पास भी साफ रखने के लिए कहते थे.

यह भी पढ़ें: खेलगांव में हरिवंश टानाभगत के नाम से है स्टेडियम, एक शौचालय के लिए भी तरस रहे हैं इनके वंशज

बच्चों को देते हैं स्वच्छता की शिक्षा
गांधी के अादर्श को टानाभगत आज भी जिंदा रखे हुए हैं. खासकर साफ-सफाई और सादगी इनकी विशेष पहचान है. इसी पहचान को टानाभगत आज भी जिंदा रखे हुए हैं. अपने बच्चों को बचपन से ही साफ-सुथरा रखने पर जोर देते हैं. इसके अलावा उन्हें बुरी चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है.

स्वच्छता हमारी पहचान है : अंबिका टानाभगत
आशीर्वाद टानाभगत के बड़े बेटे अंबिका टानाभगत ने कहा कि पिताजी ने उन्हें बचपन में सीख दी थी कि स्वच्छता ही टानाभगतों की पहचान है. इसे आगे बढ़ाना है. 17 वर्ष भारतीय सेना में सेवा देने के बाद अंबिका टानाभगत सेवानिवृत्त हो गये हैं. अब गांव में रहकर खेती-बारी करते हैं. उन्होंने कहा कि अब की पीढ़ी रोजगार के लिए घर से बाहर जा रही है. इसलिए सभी नियमों का पालन सही तरीके से नहीं हो पाता है. स्वच्छता का ख्याल लोग रखते हैं.

बिना नहाये खाना नहीं बनाते हैं : हीरामणि देवी
आशीर्वाद टानाभगत की बड़ी बहू हीरामणि देवी बताती हैं कि उन्हें स्वच्छता की सीख सास और ससुर से मिली. गैर टानाभगत परिवार की बेटी होने के कारण पूरी जानकारी नहीं थी. धीरे-धीरे सब सीख गयी और इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं. सुबह वो बिना नहाये खाना नहीं बनाती हैं. रसोई में झाड़ू-पोछा लगाने के बाद ही खाना बनाती हैं.

यह भी पढ़ें: टानाभगतों की गांधीगीरी में आज भी जिंदा हैं बापू

घर की सफाई का विशेष ध्यान : विद्यावती देवी
विद्यावती देवी ने कहा कि घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है. प्रत्येक दिन घर की लिपाई की जाती है. अगर पक्का मकान हो, तो पोछा लगाना जरूरी है. प्रत्येक सप्ताह घर की छत को भी झाड़ते हैं, ताकि उसमें मकड़ी अपना जाल नहीं बना पाये. घर के फर्श पर धूल का एक भी कण नहीं दिखता है.

साफ रहेंगे, तो बीमारी से दूर रहेंगे : ललिता कुमारी
अपने घर में झाड़ू लगा रही ललिता कुमारी ने कहा कि घर और आस-पास को साफ रखने के बहुत फायदे हैं. फायदा भी हमें ही मिलता है, क्योंकि अगर हम स्वच्छ रहेंगे और अपने-आस पास साफ रखेंगे, तो बीमारियों से दूर रहेंगे. बीमारी से दूर रहेंगे, तो दवा के पैसे बचेंगे. हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा. हम अपने काम अच्छे तरीके से कर पायेंगे.