aamukh katha

  • Sep 16 2019 1:18PM

बापू का संदेश, स्वच्छता अपनाये देश

बापू का संदेश, स्वच्छता अपनाये देश

समीर रंजन

बेहतर साफ-सफाई से ही देश के गांवों को आदर्श बनाया जा सकता है.

यदि कोई व्यक्ति स्वच्छ नहीं है, तो वह स्वस्थ नहीं रह सकता.

स्वच्छता को लेकर महात्मा गांधी के कई संदेश हैं, जिसे लोग धीरे-धीरे अपनाने लगे हैं. खासकर बापू के अनुनायी टानाभगत सादगी व स्वच्छता के जीते-जागते मिसाल हैं. 10 दिसंबर 1925 को यंग इंडिया के अंक में बापू ने लिखा था 'आंतरिक स्वच्छता पहली वस्तु है, जिसे पढ़ाया जाना चाहिए. बाकी बातें इसे पढ़ाने के बाद ही लागू की जानी चाहिए'. स्वच्छता को एक अभियान के तौर पर केंद्र सरकार ने भी लिया. दो अक्तूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की गयी. घर-घर शौचालय निर्माण पर जोर दिया गया. इस कार्य में गांव की महिलाओं ने रानी मिस्त्री बन कर शौचालयों के निर्माण में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, ताकि झारखंड खुले में शौच से मुक्त हो सके.

तन-मन साफ रखना टानाभगतों का मूलमंत्र
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अनुयायी टानाभगत के जीवन में स्वच्छता सर्वोपरि है. तन और मन को साफ रखना उनका मूलमंत्र है. इसके लिए टानाभगत कई विशेष नियमों का पालन भी करते हैं. टानाभगत बेहद ही सादा जीवन जीते हैं और साफ रहना पसंद करते हैं.

खुले में शौच से मुक्त हुआ झारखंड
स्वच्छता का मतलब सिर्फ अपने घर व आसपास की साफ-सफाई ही नहीं है, बल्कि गांव-पंचायत को गंदगी से मुक्त करना व खुले में शौच से मुक्त करना भी है. स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत होने से पहले झारखंड के गांवों में महज 16.25 फीसदी घरों में ही शौचालय था. बड़ी आबादी खुले में असुरक्षित शौच करने को मजबूर थी. स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत के महज साढ़े चार सालों में ही झारखंड खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित हो गया.

यह भी पढ़ें: दुनिया को स्वच्छता का पाठ पढ़ा रहे झारखंड के टानाभगत

वर्षवार शौचालय निर्माण की स्थिति
वित्तीय वर्ष                 शौचालय निर्माण (फीसदी में)
2014                             16.25
2015-16                        25.78
2016-17                        46.60
2017-18                        76.74
2018-19                         100

स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम
स्वच्छ भारत अभियान के तहत पूरे देश में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम का आयोजन हुआ. 15 सितंबर से दो अक्तूबर, 2018 तक पूरे देश में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसका उद्देश्य हर किसी को किसी न किसी क्षेत्र में सफाई अभियान में सहयोग देना है. झारखंड में भी यह कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस दौरान जागरूकता को लेकर कई बीमारियों से बचने के उपाय भी बताये गये.

स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2019 लांच
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2019 लॉन्च किया. 45 दिनों तक चलनेवाले इस सर्वेक्षण का उद्देश्य ग्रामीणों को स्वच्छता की स्थिति में सुधार के लिए प्रेरित करना है. यह सर्वेक्षण 698 जिलों के 18 हजार से अधिक गांवों में किया जायेगा.

स्वच्छ भारत मिशन
दो अक्तूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हुई. इस मिशन का उद्देश्य महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर देश को स्वच्छ बनाना है, ताकि उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सके. शौचालय पहुंच और इसके उपयोग के संबंध में लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाने का लक्ष्य रखनेवाला यह विश्व का सबसे बड़ा स्वच्छता कार्यक्रम है. इसमें दो उप-मिशन शामिल हैं. पहला, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) ग्रामीण इलाकों में लागू करने के लिए और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) शहरी क्षेत्रों में लागू करने के लिए है.

यह भी पढ़ें: शौचालय से खुले में शौच जाने की मजबूरी से मिली मुक्ति

स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण ग्रामीण पुरस्‍कार 2018 में झारखंड को तीसरा स्थान
पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा शुरू किये गये राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2018 के आधार पर अधिकतम जनभागीदारी के साथ शीर्ष स्‍थान पानेवाले राज्यों और जिलों को पुरस्कृत किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पुरस्कृत किया. स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2018 की रैंकिंग में पूर्वी क्षेत्र में झारखंड को तीसरा स्थान मिला, जबकि जिले की बात करें तो हजारीबाग को स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण रैंकिंग में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है.

सर्वेक्षण के तरीके
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने एक स्वतंत्र सर्वेक्षण एजेंसी के माध्यम से मात्रात्मक और गुणात्मक स्वच्छता (स्वच्छता) मानकों के आधार पर देश के सभी जिलों की रैंकिंग तय करने के लिए स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण- 2018 (एसएसजी 2018) की शुरुआत की थी. रैंकिंग तय करने के लिए स्कूलों,आंगनबाड़ी, पीएचसी, हाट/बाजार और पंचायत जैसे सार्वजनिक स्‍थलों और स्वच्छता के प्रति लोगों की धारणा तथा एसबीएम-जी आइएमआइएस की ओर से कार्यक्रम और डेटा सुधार के लिए दिये गये सुझावों को आधार बनाया गया था. स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण के तहत पूरे देश में 685 जिलों के 6786 गांवों को शामिल किया गया था.

केस स्टडी
टानाभगतों का मूलमंत्र है स्वच्छता
गुमला जिला अंतर्गत भरनो प्रखंड की सुपावन पंचायत के कई गांवों में टानाभगत रहते हैं. सुकुरहुट्टू, सुपा अंबाटोली, सुपा पतराटोली और जतरीटोली में रहनेवाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अनुयायी टानाभगतों के जीवन में स्वच्छता सर्वोपरि है. तन और मन को साफ रखने के लिए टानाभगत कई विशेष नियमों का पालन करते हैं. यहां के टानाभगत खेती-बारी करते हैं. सभी का खपरैल मकान है, लेकिन घर और आंगन बिल्कुल साफ रहता है. टानाभगत अपने घरों की सफाई और लिपाई-पुताई हर दिन करते हैं. घर की महिलाएं गोबर से घर को लिपती हैं. घर के आसपास भी साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है. हर दिन सुबह और शाम का खाना बनाने से पहले चूल्हा को लीपा जाता है. इसके बाद तांबे वाले बर्तन में पानी लिया जाता है. उस पानी में तुलसी, अरवा चावल, दूबी घांस, हल्दी, आम का पत्ता और दूध डाला जाता है. फिर उस पानी को पूरे घर में छिड़का जाता है और चूल्हे में छिड़क कर उसे पवित्र किया जाता है. कई टानाभगत इस पानी को नहाने के पानी में मिला कर नहाते हैं. इस नियम को तांबा-तुलसी नियम कहा जाता है. यह प्रक्रिया टानाभगतों की दिनचर्या में शामिल है. स्वच्छता को लेकर ये इतने सजग रहते हैं कि अपने घरों में मुर्गी और बकरी तक नहीं पालते हैं. टानाभगत शाकाहारी होते हैं और जीव हत्या को पाप समझते हैं. बाहर के खाने से भी परहेज करते हैं. उनका मानना है कि बाहर का खाना संक्रमित भी हो सकता है. इसलिए वो खुद से साफ-सफाई बरतते हुए खाना बनाते हैं.

यह भी पढ़ें: शौचालय : आधी आबादी का इज्जत घर

जतरीटोली में करीब 50 टानाभगत के परिवार रहते हैं. सभी साफ-सुथरा रहते हैं और अपने आस-पास के लोगों को स्वच्छता का संदेश देते हैं. सिंघा टानाभगत कहते हैं कि बापू के अनुयायी होने के कारण हमें शुरू से ही स्वच्छता का पाठ पढ़ाया गया है. आज भी हम इसे अपनाते हैं. कहते हैं कि सर्दी, गर्मी या बरसात किसी भी मौसम में बिना नहाये खाना नहीं खाते हैं. तन व मन दोनों साफ रखना बहुत जरूरी है और टानाभगत इसे बखूबी निभाते हैं. जतरीटोली के लदुआ टानाभगत कहते हैं नशापान से हम सब दूर रहते हैं. नशा करने से शरीर स्वस्थ और स्वच्छ नहीं रहता.