aadhi aabadi

  • Mar 18 2019 1:12PM

औषधीय पौधों की खेती से स्वावलंबी बनतीं महिलाएं

औषधीय पौधों की खेती से स्वावलंबी बनतीं महिलाएं

दुर्जय पासवान
गुमला

गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड में आदिवासी महिलाएं औषधीय पौधों की खेती कर स्वावलंबन की राह पर हैं. विकास भारती, बिशुनपुर द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला के कृषि वैज्ञानिक महिलाओं को इस खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं. अनुपयोगी बंजर जमीन में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस परियोजना के अंतर्गत 1600 महिलाओं को 30 उत्पादक समूह के माध्यम से लेमन ग्रास एवं तुलसी की खेती करायी जा रही है.

25 एकड़ में तुलसी व 13 एकड़ में लेमन ग्रास की खेती
जिले के 1,30,834 हेक्टेयर क्षेत्र में कई औषधीय वन उत्पाद उपलब्ध हैं. इसका बेहतर उपयोग कर आदिवासी महिलाओं की आय में वृद्धि की जा सकती है. पलायन को भी रोका जा सकता है. कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला के वैज्ञानिक संजय पांडे ने कहा कि इस परियोजना से किसानों की आय बढ़ेगी. अनुपयोगी एवं बंजर जमीन भी सोना उगलेगी. 25 एकड़ में तुलसी एवं 13 एकड़ में लेमन ग्रास की खेती करायी गयी है, जिसका आसवन कर तेल निकाला जा रहा है.

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औषधीय पौधे की खेती से सफल उद्यमी बनीं अनीता
बिशुनपुर के चट्टी सेरका निवासी अनीता देवी आज एक सफल महिला उद्यमी के रूप में जानी जाती हैं. यही कारण है कि वह महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं. अनीता देवी अपने 11 अन्य महिला सदस्यों के साथ सर्वेश्वरी महिला समूह संचालित कर रही हैं. समूह द्वारा हस्तनिर्मित अचार, जामुन सिरका, जामुन बीज चूर्ण, मधुरस, आंवला सुपारी, आंवला चूर्ण व आंवला रस का उत्पादन किया जा रहा है. वर्तमान में समूह का वार्षिक टर्नओवर लगभग 12 लाख रुपये है.

उत्पादित सामग्रियों की काफी मांग
समूह द्वारा उत्पादित सामग्रियों का न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय महोत्सव व मेले में भी काफी डिमांड है. समूह को इस तरह का बाजार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, गुमला द्वारा उपलब्ध कराया जाता है. अनीता देवी ने कहा कि वर्ष 2010 में समूह का गठन हुआ और वर्ष 2014 में अचार बनाने काम शुरू किया गया.

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कई पुरस्कार बटोर चुकी हैं अनीता देवी
अनीता देवी सिर्फ अपने जिले में ही नहीं, बल्कि प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित महोत्सव व मेलों में कई पुरस्कार बटोर चुकी हैं. वर्ष 2015 में राष्ट्रीय खादी महोत्सव, रांची में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार और इसी वर्ष बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कांके द्वारा आयोजित किसान मेले में प्रथम पुरस्कार ले चुकी हैं. इसके अलावा केचप में प्रथम, जेली में द्वितीय एवं अचार के लिए प्रथम पुरस्कार मिल चुका है. वर्ष 2017 में राष्ट्रीय खादी एवं सरस महोत्सव, रांची में सफल महिला उद्यमी का प्रथम पुरस्कार मिला. वर्ष 2018 में राष्ट्रीय सरस एवं खादी महोत्सव रांची में द्वितीय पुरस्कार मिला. इस वर्ष बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कांके के किसान मेला में प्रथम पुरस्कार मिला. धनबाद में राष्ट्रीय आजीविका सरना महोत्सव में द्वितीय पुरस्कार, वर्ष 2019 में राष्ट्रीय सरस एवं खादी महोत्सव, रांची में तृतीय पुरस्कार से नवाजी जा चुकी हैं. इसके अलावा वर्ष 2017 में दिल्ली के इंडिया गेट में आयोजित वर्ल्ड फूड इंडिया में भी शामिल हो चुकी हैं. उसमें पूरे झारखंड से सिर्फ एक महिला (अनीता देवी) का ही चयन किया गया था.

ग्रामीण महिलाओं की बढ़ेगी आय
विकास भारती, बिशुनपुर के सचिव अशोक भगत ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती से ग्रामीण महिलाओं को वन उत्पादों के माध्यम से आय होगी. यह वन संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम साबित होगा. इस परियोजना के माध्यम से सेरका पंचायत के नवागढ़ में आसवन मशीन की स्थापना की है, जिससे लेमन ग्रास व तुलसी के पौधों से तेल निकाला जा रहा है.