aadhi aabadi

  • Nov 2 2018 3:35PM

महिलाएं हमारी शक्ति, हमारा अभिमान

महिलाएं हमारी शक्ति, हमारा अभिमान

आजीविका डेस्क

महिलाओं की शक्ति, संवेदनशीलता एवं उद्यम से कई राष्ट्रों ने सफलता के कीर्तिमान स्थापित किये हैं. आत्मविश्वास से ओतप्रोत महिलाएं व बेटियों को देख कर कोई भी समाज खुद पर गर्व कर सकता है. झारखंड में भी महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं. राज्य सरकार का मानना है कि राज्य की आधी आबादी जितनी सशक्त होगी, राज्य उतना ही आगे बढ़ेगा.
झारखंड में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए जब योजनाओं की शुरुआत हुई थी, तब स्थिति वास्तव में निराशाजनक थी, लेकिन आज राज्य की महिलाओं में व्यापक बदलाव आया है.

जिन क्षेत्रों में पहले महिलाओं की उपस्थिति नहीं के बराबर थी, वहां वे अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर बदलाव की वाहक बन रही हैं. पिछले चार साल में राज्य में सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और उद्योग के क्षेत्र में जो विकास हुए हैं, उससे महिलाओं में भी आत्मविश्वास बढ़ा है. आज तक जो महिलाएं घरों में चूल्हा-चौका तक ही सीमित थीं, वे आज घर के बाहर निकलकर काम करने को तत्पर हुई हैं. इसके लिए उन्हें विभिन्न योजनाओं के जरिये आर्थिक रूप से सबल बनाकर उनकी जिंदगी में खुशहाली लाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

जेंडर बजट से महिलाओं में बढ़ा उत्साह
इस योजना की शुरुआत दो साल पहले हुई थी. राज्य सरकार ने जेंडर बजट लाकर महिलाओं के सशक्तीकरण का नजरिया सामने रखा था. पहली बार लाये गये जेंडर बजट को लेकर महिलाओं में अधिक उत्साह था. इसमें उनके विकास को ध्यान में रखते हुए नयी योजनाएं लायी गयीं. नये लक्ष्य बनाये गये. पैसों का आवंटन किया गया. विकास की रूपरेखा तय की गयी. आर्थिक सुरक्षा के लिए पेंशन योजनाएं लायी गयीं. इसके अलावे पूरे राज्य में एक रुपये में महिलाओं के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री ने पूरा परिदृश्य बदल दिया. अब तक लाखों महिलाएं जमीन की मालकिन बन चुकी हैं. महिलाओं के विकास का निश्चित रूप से यह एक नया युग है.

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महिलाओं के हर पहलू पर विशेष ध्यान
जहां तक कामकाजी महिलाओं की बात है, उनके बच्चों के लिए भी सरकार ने पालना घर की व्यवस्था की है. इसमें उनके छह साल तक के बच्चों को संभालने की व्यवस्था की गयी है. इसका लाभ अनेक कामकाजी माताओं को मिल रहा है. कई बार महिलाओं को घर से दूर जाकर काम करना पड़ता है, जहां उन्हें रहने की समस्या आती है. इस समस्या को दूर करने के लिए महिला छात्रावास बनाये गये हैं.

महिलाओं में बढ़ने लगा आत्मविश्वास
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें सरकारी सेवाओं में भी अवसर दिये जा रहे हैं. आरक्षी सेवाओं में उनकी नियुक्ति की जा रही है. उन्हें नागरिक सुरक्षा के मोर्चे पर लगाया जा रहा है. राज्य में महिलाओं को एक तरफ जमीन रजिस्ट्री में छूट देकर उनकी आर्थिक सुरक्षा बढ़ायी गयी है, तो दूसरी ओर स्वरोजगार को प्रोत्साहित करते हुए ऑटो रिक्शा चलाने का लाइसेंस देकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाया जा रहा है. आज सड़कों पर ऑटो चलाती महिला ड्राइवरों को देखा जा रहा है. यह वाहन महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर भी चलाया गया था. इसका फायदा भी साफ नजर आ रहा है. एक तरफ तो ऑटो में जानेवाली महिलाएं सुरक्षित महसूस कर रही हैं, तो दूसरी ओर उन्हें रोजगार भी मिल रहा है.

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उड़ान स्कॉलरशिप से बेटियों में आगे बढ़ने का जज्बा
राज्य में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना पर भी तेजी से काम किया गया है. शिशु लिंग अनुपात में कमी को रोकने समेत महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए यह योजना लायी गयी है. उसके तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता मिलती है, तो लड़कियों को उच्च शिक्षा में मदद मिलती है. कन्या भ्रूण हत्या रोकने के साथ-साथ विवाह में भी उन्हें आर्थिक मदद दी जाती है. पूरे राज्य में कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जा रहा है. बुनियादी स्तर पर लोगों को जागरूक करते हुए उन्हें ट्रेनिंग देकर सामुदायिक एकजुटता के माध्यम से लोगों की सोच में बदलाव लाया जा रहा है. इस योजना को और अधिक सफल बनाने के लिए गरीब एवं ग्रामीण परिवेश की बच्चियों को पायलट ट्रेनिंग दी जा रही है. इसके लिए उड़ान स्कॉलरशिप योजना चलायी जा रही है.

गुमला की रितु कुमारी के अदम्य साहस ने पेश की मिसाल
राज्य सरकार का मानना है कि कन्यादान पुण्य का काम है, लेकिन विद्या दान उससे भी बड़ा पुण्य है. यही जागरूकता राज्य के कोने-कोने में फैलानी है. गरीबी को खत्म करने के लिए शिक्षा ही सशक्त माध्यम है. बच्चियों को शिक्षित करने से दो परिवारों को इसका लाभ मिलता है. राज्य की बच्चियां अपने पैरों पर खड़ी होने में सक्षम हैं. जरूरत है उन्हें अवसर प्रदान करने की. गुमला की रितु कुमारी समेत कई बच्चियों ने पढ़ाई के लिए विवाह से इन्कार कर एक मिसाल कायम की है. सरकार की ओर से उनकी पढ़ाई की व्यवस्था के साथ-साथ एक लाख रुपये की सम्मान राशि दी गयी है. सरकार आदिवासी, दलित व वंचितों की आवाज बनकर काम कर रही है और आगे भी करती रहेगी.
मेरी बेटी, मेरी पहचान अभियान
राज्य में एक और महत्वाकांक्षी योजना मेरी बेटी, मेरी पहचान अभियान चलाया गया है. इस अभियान के तहत गांव में घर के नेमप्लेट पर बेटियों के नाम लिखे जा रहे हैं. इसके लिए जमशेदपुर के पोटका प्रखंड के तिरिंग गांव को चुना गया है. गांव में अविवाहित बेटियों वाले घरों में पीले रंग की पट्टी पर नीले रंग से बेटी का नाम लिखा गया है. साथ ही छोटे अक्षर में मां का नाम भी लिखा गया है. नाम के साथ ही उनके काम से भी उनकी पहचान बने, उसके लिए तेजस्विनी योजना चलायी गयी है. इसमें 14 से 24 साल की पढ़ाई छोड़ चुकी लड़कियों को फिर से पढ़ने व स्किल ट्रेनिंग लेकर काम करने का अवसर दिया जाता है. पढ़ाई या ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सरकार द्वारा तीन किश्त में दस हजार रुपये दिये जाते हैं.

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जोहार योजना से सब्जी उत्पादन को बढ़ावा
गरीबों और महिलाओं के उत्थान के लिए जोहार योजना शुरू हुई. राज्य के 17 जिलों के 68 प्रखंडों में यह योजना चालू की गयी है. 1400 करोड़ की इस योजना के तहत 3400 महिला स्वयं सहायता समूहों को उनके उत्पाद के लिए बाजार उपलब्ध कराया जायेगा. योजना के तहत सब्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जायेगा. किसानों को आधुनिक तकनीक के जरिये खेती की ट्रेनिंग दी जायेगी. साथ ही 180 करोड़ रुपये की लागत से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी. इस योजना में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के परिवारों को प्राथमिकता दी जायेगी. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें 50 फीसदी से अधिक महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य होगी.

महिलाओं को धुएं से मिली आजादी
गरीब महिलाओं को किचन में धुएं से आजादी दिलाने के लिए उज्ज्वला योजना के तहत राज्य में रिकॉर्ड गैस कनेक्शन बांटे गये हैं. महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन के साथ ही चूल्हा और पहली रिफिल गैस देकर उनकी जिंदगी में उजाला लाने का प्रयास किया गया है.
झारखंड की महिलाएं, युवतियां एवं बच्चियों के सतत विकास और सशक्तीकरण को लेकर सरकार कृतसंकल्पित है. महिलाओं के विकास की राह में आनेवाली तमाम बाधाएं दूर करते हुए सरकार उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. अब वह दिन दूर नहीं है, जब राज्य की महिलाएं हर क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ खड़ी होकर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगी और सपनों को साकार करेंगी.