aadhi aabadi

  • Feb 1 2018 1:04PM

आजीविका संसाधन केंद्र से महिलाएं बन रही हैं स्वावलंबी-उपायुक्त

आजीविका संसाधन केंद्र से महिलाएं बन रही हैं स्वावलंबी-उपायुक्त


पंचायत : गेतलसूद

प्रखंड : अनगड़ा

जिला : रांची

पंचायतनामा डेस्क

राजधानी रांची अंतर्गत अनगड़ा प्रखंड के गेतलसूद आजीविका संसाधन केन्द्र में मीडिया संवाद का आयोजन किया गया. मीडिया संवाद में शिरकत करते हुए उपायुक्त मनोज कुमार ने कहा कि यह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (जेएसएलपीएस) का सबसे अच्छा केंद्र है, जहां पर आजीविका मिशन बेहतर कार्य कर रहा है. यहां महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाती हैं और स्वरोजगार के माध्यम से आगे बढ़ रही हैं. सरकार द्वारा इन्हें पहले चरण में रोजगार के लिए 15 हजार रूपये दिये जाते हैं. जो स्वयं सहायता समूह अच्छा काम करते हैं, उन्हें एक लाख रुपये तक की राशि बैंकों द्वारा क्रेडिट लिंकेज के माध्यम से मिलती है. उपायुक्त ने कहा कि गेतलसूद का आजीविका संसाधन केंद्र एक मॉडल केंद्र है, जहां पहले महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए आंध्र प्रदेश एवं केरल से प्रशिक्षक बुलाये गये थे, लेकिन अब यहां की दीदियां इतनी सक्षम हो गयी है कि स्वयं दूसरे जिलों में प्रशिक्षण देने जाती हैं. यहां की कुछ महिलाएं केरल भी जा चुकी हैं. सबसे अच्छी बात है कि यहां के हर परिवार की कम से कम एक महिला समूह की सदस्य है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं. मुर्गी पालन, बकरी पालन और कृषि का कार्य तो समूह की महिलाएं कर ही रही हैं, साथ ही पशुओं को बचा कर रखना, उनकी अच्छी नस्ल तैयार करने पर भी इस समूह की सदस्य काम कर रही हैं. पशु-सखी, बैंक-मित्र के रूप में समूह की सदस्यों का कार्य बेहतरीन है. इस अवसर पर गेतलसूद आजीविका संसाधन केंद्र की स्वयं सहायता समूह की विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करनेवाली दीदियों ने अपनी सफलता की कहानी सुनायी. कार्यक्रम के आरंभ में झारखण्ड राज्य आजीविका मिशन सोसाइटी के कुमार विकास ने अतिथियों का स्वागत किया. आजीविका मिशन सोसाइटी, जिला योजना प्रबंधक शांति मार्डी ने बताया कि समूह से जुड़ कर महिलाओं की आय पिछले दो वर्षों में दो- तीन गुणा बढ़ गयी है और अब प्रत्येक समूह के लिए पांच लाख का कैश क्रेडिट लिंकेज बैंक द्वारा किया जा रहा है, ताकि वे तेजी से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें. मौके पर बीस सूत्री उपाध्यक्ष, एडीएम विधि-व्यवस्था, एडीएम नक्सल, अनुमण्डल पदाधिकारी, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी, नजारत उपसमाहर्ता, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला परिषद सदस्य, प्रमुख, मुखिया समेत अन्य उपस्थित थे. 

मार्च से बेस लाइन सर्वे शुरू

पिछले दिनों दिल्ली में नीति आयोग द्वारा देश के 115 जिलों के तीव्र विकास से संबंधित बैठक में कुल 48 मापदंड तैयार किये गये. इसको ही आधार मान कर वर्ष 2022 तक संपूर्ण विकास का स्वरूप तैयार करना है. इन जिलों में राज्य के 19 जिले शामिल हैं. इनमें मार्च में एक बेस लाइन सर्वे किया जायेगा, फिर केंद्र सरकार द्वारा चयनित विभिन्न एजेंसियों के प्रतिनिधियों द्वारा इन जिलों में विकास की गति का हर दिन सर्वेक्षण कर रिपोर्ट नीति आयोग को भेजी जायेगी. इसके लिए राज्य एवं केंद्र स्तर पर भी नोडल पदाधिकारी का मनोनयन किया गया है, जो जिला प्रशासन को हरसंभव मदद करेंगे. संबंधित विभागों के पदाधिकारी अपने स्तर से विकास के निर्धारित मापदंडों के आधार पर कार्य करेंगे. कहीं कोई परेशानी आती है तो जिला उसे राज्य और केंद्र सरकार के पास भेजेगा. 

समूह की सदस्यों की सफलता की कहानी

1. आज मेरी खुद की पहचान है : बलमदीना तिर्की

गांव : गेतलसूद भाकू टोंगरी

पंचायत : गेतलसूद

मीडिया संवाद में गेतलसूद गांव की पशु सखी बलमदीना तिर्की ने अपना स्टॉल लगाया था. बलमदीना तिर्की आज अपने परिवार के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही हैं. पहले उनकी हालात इसके ठीक विपरीत थे. मात्र पांचवीं कक्षा तक पढ़ी बलमदीना के पास रोजगार के नाम पर खेती-बारी करने के अलावा और कोई काम नहीं था. खेती-बारी कर घर का गुजारा बमुश्किल हो पाता था. बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ाई के लिए जाते थे. जरूरी काम के लिए किसी से पैसे लेने पर पांच प्रतिशत सूद देना पड़ता था, जो काफी ज्यादा था. साल 2013 में बलमदीना तिर्की को महिला समूह की जानकारी मिली और बलमदीना समूह से जुड़ गयीं. समूह से जुड़ने के बाद साल 2013 में तीन दिवसीय बकरी पालन और देख-रेख की ट्रेनिंग में शामिल हुईं. इस ट्रेनिंग में बलमदीना को बकरी के रख-रखाव, खिलाने के तरीके और रोगों की जानकारी दी गयी. इसके बाद फरवरी 2014 में उन्हें बकरी को दवा खिलाने के तरीके के बारे में प्रशिक्षण दिया गया. बकरी को कृमिनाशक दवा खिलाने के बारे में जानकारी दी गयी और बकरियों में टीकाकरण का तरीका तथा समय के बारे में बताया गया. इस बीच बलमदीना समूह से छोटे- मोटे लोन लेकर घर का खर्चा चला रही थीं. इसके बाद मार्च 2015 में बलमदीना को लखनऊ जाने का मौका मिला और वो पांच दिवसीय प्रशिक्षण के लिए लखनऊ गयीं. बलमदीना बताती हैं कि लखनऊ का प्रशिक्षण काफी काम आया और वहां पर उन्हें बकरियों में बीमारी क्यों और कैसे होती है, इसकी जानकारी दी गयी. साथ ही बंध्याकरण के तरीकों के बारे में बताया गया और बंध्याकरण करने का प्रशिक्षण भी दिया गया. प्रशिक्षण मिलने के बाद से अब बलमदीना की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है. अब इलाके में उनकी खुद की पहचान है. बेझिझक घर के बाहर निकलती हैं और अधिकारियों से भी खुल कर बात करती हैं. समाज के सामने अपनी बात बेहतर तरीके से रखती हैं. वह पशु सखी का काम रही हैं और जिंदगी में आगे बढ़ रही हैं. बलमदीना अपने लिए स्कूटी और पति के लिए मोटरसाइकिल खरीदी हैं. घर के लिए एक टीवी भी खरीदी हैं. पहले बलमदीना का घर किसी तरह खड़ा था. वह उसे भी मरम्मत करायी हैं. बलमदीना बताती हैं कि अब उन्हें एक पहचान मिल गयी है. अपने गांव और आस-पास के गांवों से हर रोज बकरी का इलाज कराने के लिए लोग उन्हें बुलाते हैं. अब उनमें आत्मविश्वास आ गया है और वो सपरिवार खुशहाल जिंदगी जी रही हैं. 

2. लोगों की मदद करना अच्छा लगता है : बरखा रानी कच्छप

गांव : लेपसर

पंचायत : जोन्हा

प्रखंड : अनगड़ा

मीडिया संवाद कार्यक्रम में बरखा रानी कच्छप का भी स्टॉल था. वह लोगों को अपने कार्यों की जानकारी दे रही थीं. बरखा रानी बैंकिंग सखी का कार्य करती हैं. समूह में जुड़ने से पहले बरखा अपने घर में खेती-बारी का कार्य करती थीं. उस समय बरखा रानी को हमेशा आर्थिक तंगी रहती थी. बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पा रही थीं. जिसके बाद साल 2014 में वो महिला समूह से जुड़ गयीं. इसके बाद बरखा रानी को दसवीं पास होने का लाभ मिला और बुक कीपर के तौर पर कार्य करने लगीं. इसके साथ ही सक्रिय सखी के तौर पर कार्य करने लगीं. यह कार्य करते हुए वो बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट का काम करने लगीं. इस कार्य के लिए उन्हें जेएसएलपीएस की ओर से प्रशिक्षण भी दिया गया. आज बरखा बैंकिंग सखी के तौर पर काम कर रही हैं और गांव तक बैंकिंग सेवा पहुंचा रही हैं. उन्होंने समूह से 35 हजार रुपये का लोन भी लिया है. उस पैसे से उन्होंने ई-पॉश मशीन खरीदा है, जिससे उन्हें काम करने में काफी आसानी हो रही है. बरखा बताती हैं कि अभी तक वो पांच से छह लाख रुपये का ट्रांजेक्शन कर चुकी हैं. इसके साथ ही वो 494 नया खाता भी खुलवा चुकी हैं. बरखा रानी ने बताया कि वो दो दिन अपने गांव में बैठती हैं और दो दिन बैंक में बैठती हैं. अन्य दिन वो दूसरे गांवों में जाकर लोगों को बैंकिंग सेवा देती हैं. ई-पॉश मशीन से बैंक की तरह पैसे का लेने-देन भी करती हैं. वह बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही हैं. आज इसके जरिये परिवार के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही हैं.