aadhi aabadi

  • Dec 1 2017 1:49PM

शौचालय निर्माण में ये दीदियां कर रही हैं सराहनीय सहयोग

शौचालय निर्माण में ये दीदियां कर रही हैं सराहनीय सहयोग

 गांव के लोग अब साफ-सफाई के प्रति जागरूक हो रहे हैं और ग्राम संगठन की बैठक में साफ-सफाई, रोजगार से लेकर गांव के विकास से जुड़े मुद्दों पर दीदियां चर्चा भी कर रही हैं. शराबबंदी को लेकर भी दीदियां सकारात्मक कदम उठा रही हैं. शराब बेचने में लगी गांव की महिलाओं को उनके घर जाकर महिला समूह से जोड़ कर उन्हें अन्य स्वरोजगार करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं. आज कई ऐसी ग्रामीण महिलाएं हैं, जो पहले शराब बेचती थी, पर अब समूह से जुड़ कर और लोन लेकर सब्जी बेचने का कार्य कर रही है. अभी गांव में 100 महिलाओं के आत्मनिर्भर होने से उनके 100 परिवार आत्मनिर्भर हो गये हैं. यह सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है.

 
लोग अब मुझे मेरे नाम से जानते हैं : सीमा कुजूर
सक्रिय महिला सदस्य सीमा कुजूर कहती हैं कि पहले जहां भी जाते थे, लोग मुझे मेरे पति के नाम से जानते थे. खुद की कोई पहचान नहीं थी, पर महिला समूह में जुड़ने और मेहनत करके मैंने अपनी पहचान बनायी है. सभी लोग मुझे अब मेरे नाम और काम से जानते हैं. मेरे जीवन में एक बदलाव यह भी आया कि अब मैं खुल कर अपनी बातें किसी के सामने रख सकती हूं. बिना झिझक के लोगों से बातचीत कर सकती हूं. मेरे अंदर यह आत्मविश्वास आया है. मैं अपने हक और अधिकार के लिए लड़ सकती हूं. खुद की मेहनत से आगे बढ़ सकती हूं. यह बदलाव सिर्फ मुझमें नहीं, बल्कि गांव की अधिकतर महिलाओं में आया है.
 
गांव और समाज में आया है बदलाव : प्रीति लिंडा
प्रीति लिंडा कहती हैं कि गांव की महिलाओं में काफी परिवर्तन आया है. अब महिलाएं गांव और समाज के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं. अब ग्रामसभा में महिलाओं से भी रायशुमारी की जाती है. इसके साथ ही गांव में पर्व-त्योहार को लेकर जो कार्यक्रम होते हैं, उसमें महिलाएं सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं. प्रीति अपने बारे में कहती हैं कि पहले वो किसी बाहरी व्यक्ति से बात नहीं कर पाती थीं, पर अब आजीविका वन टच कॉल सेंटर में काम कर रही हैं. अब गांव की महिलाएं सखी मंडल से जुड़ कर जागरूक हो गयी हैं और ग्रामसभा की बैठक में पुरुषों से अधिक भागीदारी निभा रही हैं.