aadhi aabadi

  • Dec 5 2018 5:42PM

झारखंड की बेटियों को बालिका वधू बनने से रोकिए

झारखंड की बेटियों को बालिका वधू बनने से रोकिए

पंचायतनामा डेस्क

झारखंड की बेटियों को बालिका वधू बनने से रोकिए. आपकी छोटी सी पहल बड़ा असर दिखा सकती है. बाल विवाह पर रोक के लिए मानसिकता में बदलाव जरूरी है. इसके लिए जन-जागरूकता अहम है. ऐसे में फिल्में जेहन में उतारने का सशक्त माध्यम हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों की सोच में बदलाव को लेकर मोबाइल थियेटर के माध्यम से सुपर सीक्रेट स्टार फिल्म दिखायी जा रही है. ये पहल स्वयंसेवी संस्था ब्रेकथ्रू की ओर से की गयी है.

18 दिसंबर तक दिखायी जायेगी फिल्म
रांची जिले के नगड़ी, सिल्ली, अनगड़ा, नामकुम, बेड़ो और कांके प्रखंड के 12 स्थानों पर 18 दिसंबर, 2018 तक फिल्म दिखायी जायेगी. 25 नवंबर से इसकी शुरुआत की गयी है. वातानुकूलित और डॉल्बी साउंड से सुसज्जित मोबाइल थिएटर में एक साथ 120 लोग फिल्म देख सकते हैं.

तारीख                          प्रखंड                पंचायत                        स्थान
03
04 दिसंबर               अनगड़ा                  कुच्चू            राजकीय मध्य विद्यालय, कुच्चू

05
06 दिसंबर               अनगड़ा                  जोन्हा          राजकीयकृत उच्च विद्यालय, जोन्हा

07
08 दिसंबर              नामकुम                  राजाउलातू                 चर्च के सामने

09
10 दिसंबर              नामकुम                       डुंगरी                 गुंडू स्कूल के सामने

11
12 दिसंबर             बेड़ो                           दिघिया              जनता स्कूल के नजदीक

13
14 दिसंबर            बेड़ो                        केसा/तूको           राजकीय मध्य विद्यालय, तुको

15
16 दिसंबर           कांके                         गागी                             गागी

17
18 दिसंबर           कांके                       पिठोरिया                         पिठोरिया

बालिग होने से पहले ही 38 फीसदी लड़कियों की शादी
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) 2015-16 के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में 38 फीसदी लड़कियों की शादी बालिग (18 साल ) होने से पहले ही हो जाती है. बाल विवाह के कारण लड़कियों पर घरेलू हिंसा की आशंका बढ़ जाती है. 30 फीसदी महिलाओं को शारीरिक हिंसा और 31 फीसदी को शारीरिक और यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है. 65 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं. वहीं 6-59 माह के 70 फीसदी बच्चे एनेमिक हैं.

38 फीसदी लड़कियां उपयोग करती हैं सेनेटरी पैड
स्कूलों में टॉयलेट नहीं होने के कारण लड़कियों का ड्रॉप आउट भी उम्र बढ़ने के साथ बढ़ जाता है. 15-25 आयु वर्ग की 73 फीसदी लड़कियां अभी भी माहवारी के दौरान कपड़े का उपयोग करती हैं. सिर्फ 38 फीसदी लड़कियां सेनेटरी पैड का उपयोग करती हैं. आंकड़ों की मानें, तो इस आयु वर्ग में आधे से अधिक लड़कियां माहवारी के दौरान सुरक्षित साधनों से अभी भी दूर हैं.

फिल्मों से बाल विवाह पर रोक के लिए जागरूकता
ब्रेकथ्रू की निदेशक उर्वशी गांधी कहती हैं कि फिल्में संवाद का सबसे सशक्त माध्यम हैं. बदलाव की दिशा में ये काफी कारगर है. खासकर ग्रामीण इलाके में ये प्रभावी साबित होगा. इसी को ध्यान में रखते हुए चलता-फिरता (मोबाइल) थियेटर से फिल्म दिखा कर बाल विवाह, लैंगिक भेदभाव, यौन हिंसा और घरेलू हिंसा जैसे प्रासंगिक मुद्दों पर आम जनता से चर्चा की जा रही है.

बाल विवाह मुक्त प्रदेश बनाने की पहल
ब्रेकथ्रू के झारखंड-बिहार के राज्य प्रमुख आलोक भारती बताते हैं कि झारखंड में पहले की अपेक्षा बाल विवाह की दर में काफी कमी आयी है. जन-जागरूकता का ही नतीजा है कि आंकड़ों में कमी देखी जा रही है. सामूहिक जनभागीदारी से झारखंड को बाल विवाह मुक्त प्रदेश बनाया जा सकता है. राजधानी रांची के स्थानीय होटल में ब्रेकथ्रू की ओर से बाल विवाह के मुद्दे पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन के अवसर पर संजय और विनीत भी मौजूद थे.