aadhi aabadi

  • Dec 5 2018 1:48PM

जिद से रानी मिस्त्री सीता कच्छप ने बनायी अपनी अलग पहचान

जिद से रानी मिस्त्री सीता कच्छप ने बनायी अपनी अलग पहचान

पंचायतनामा डेस्क
प्रखंड: कांके
जिला: रांची

रांची जिला अंतर्गत नगड़ी गांव की रहनेवाली सीता कच्छप की पहचान आज सफल रानी मिस्त्री के तौर पर है. जिद की वजह से आज उनकी अपनी पहचान है. रांची में आयोजित एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के समक्ष सीता को अपना अनुभव साझा करने का मौका मिला. इतना ही नहीं, वह दिल्ली के एक निजी इंग्लिश न्यूज चैनल के स्टूडियो से भी लोगों को स्वच्छता और शौचालय के बेहतर इस्तेमाल व लाभ के बारे में जानकारी दे चुकी हैं. इस दौरान वह सुपरस्टार अमिताभ बच्चन और अभिनेता अक्षय कुमार जैसे दिग्गज हस्तियों से भी उन्होंने बातचीत की.

रानी मिस्त्री में बनीं अलग पहचान
नगड़ी जैसे छोटे गांव में बीएससी फिजिक्स ऑनर्स की छात्रा सीता ने रानी मिस्त्री का काम करते हुए अपनी अलग पहचान बनायी हैं. कल तक, जो लोग उनका मजाक उड़ाते थे, आज उनकी मिसाल देते हैं. आज भी सीता अपने गांव में रानी मिस्त्री का काम करती हैं. हाथ में करनी लेकर शौचालय बनाती हैं और ग्रामीणों को उसके इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करती हैं. हालांकि, इस पहचान को पाने के लिए सीता कच्छप को काफी संघर्ष करना पड़ा. लोगों के ताने सुनने पड़े. यहां तक कि घर में आकर लोगों ने धमकी भी दी, लेकिन सीता ने हिम्मत नहीं हारी और अपना काम आगे बढ़ाती रहीं. परिणाम आज सबके सामने है. सीता को इस बुलंदी तक पहुंचाने में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रोमोशन सोसाइटी का भरपूर सहयोग रहा.

महिला समूह से हुई सफर की शुरुआत
सीता और उसके पति पढ़ाई करते थे, लेकिन सीता की सास के निधन हो जाने के बाद घर में आर्थिक परेशानी शुरू हो गयी. आर्थिक संकट से निबटने के लिए सीता ने कुछ काम करने का मन बनाया. साल 2014 में सीता किसान शिव शक्ति महिला समिति से जुड़ गयीं. 2014 में ही उन्हें बुक कीपर का प्रशिक्षण मिला, वहीं साल 2017 में सक्रिय महिला का प्रशिक्षण मिला. समूह में कार्य करते हुए सीता के पास थोड़े- बहुत पैसे भी आने लगे. इससे घर चलाने में थोड़ी राहत मिली. सीता बचपन से ही समाज की सेवा करना चाहती थीं. लिहाजा, महिला समूह के जरिये सीता के बचपन की चाहत भी पूरी होने लगी.

यूनिसेफ से मिला रानी मिस्त्री का प्रशिक्षण
राज्य में जब सखी मंडल की महिलाओं को गांवों में शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गयी, तब नगड़ी में भी सखी मंडल की महिलाओं को यूनिसेफ के द्वारा रानी सखी का प्रशिक्षण दिया गया. इस दौरान मिस्त्री का काम करने के लिए उपकरण भी दिये गये. सीता बताती हैं कि शुरुआत के दिनों में जब शौचालय निर्माण हो रहा था, तब पुरुष मिस्त्री काम करने के लिए आते थे, लेकिन हमेशा कुछ न कुछ कारण से छुट्टी ले लेते थे, जिसके कारण शौचालय निर्माण में देरी हो रही थी. टार्गेट पूरा नहीं हो पा रहा था. सीता और गांव की अन्य महिलाओं ने तय किया कि वो खुद शौचालय निर्माण कार्य में लगेंगी.

महिलाओं का हुआ विरोध
महिलाएं जब शौचालय बनाने लगीं, तो समाज और घर से ही उसका विरोध शुरू हो गया. कई महिलाओं के साथ मारपीट भी हुई. कई महिलाओं के पति उन्हें यह काम करने से रोकने लगे. सीता कच्छप के पति ने भी उन्हें यह काम करने से मना किया. कई बार तो ऐसा हुआ कि लोग घर में आकर काम नहीं करने की धमकी देने लगे. सीता के पति ने भी रानी मिस्त्री का काम करने से मना किया. ईंट और बालू की भी चोरी कर ली जाती थी. इसके बावजूद सीता ने हिम्मत नहीं हारी और गांव की अन्य महिलाओं को रानी मिस्त्री का काम करने को प्रोत्साहित करती रहीं. धीरे-धीरे गांव व आस-पास के इलाकों में शौचालय निर्माण की रफ्तार तेज पकड़ ली. इन महिलाओं के काम की सराहना होने लगी. इसके बाद तो सीता समेत अन्य महिलाएं कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखीं.

परिश्रम से मिली सफलता
रानी मिस्त्री के तौर पर बेहतर कार्य करने के कारण सीता को नयी पहचान मिली. यूनिसेफ के द्वारा सीता को दिल्ली बुलाया गया, जहां उन्होंने एक इंग्लिश न्यूज चैनल के स्टूडियो में बैठ कर अपने विचार साझा किये. इस कार्यक्रम में अभिनेता अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार भी ऑनलाइन जुड़े थे. अक्षय कुमार ने सीता की तारीफ करते हुए कहा था कि असल में सीता जैसी महिलाएं ही स्वच्छता की ब्रांड अंबेसडर हैं.

समाज से मिली स्वीकार्यता : सीता कच्छप
रानी मिस्त्री सीता कच्छप बताती हैं कि अब घर और समाज से उनके कार्य को स्वीकार्यता मिल गयी है. पति का भी पूरा सहयोग मिलता है. कल तक जो लोग मजाक उड़ाते थे, अब घर आकर उनके काम की तारीफ करते हैं. सीता बताती हैं कि बचपन से उन्हें समाजसेवा करने का बहुत शौक था. महिला समूह से जुड़ कर उनकी यह इच्छा पूरी हो रही है. इस कार्य के लिए वह जेएसएलपीएस का तहेदिल से शुक्रिया अदा करती हैं. वह कहती हैं कि आजीविका ने उन्हें रानी मिस्त्री के रूप में अलग पहचान बनाने में भरपूर सहयोग किया. सीता बुजुर्गों और अनाथ बच्चों की सेवा करना चाहती हैं.