aadhi aabadi

  • Jul 17 2018 11:27AM

स्वच्छ भारत की वाहक बनतीं सखी मंडल की दीदियां

स्वच्छ भारत की वाहक बनतीं सखी मंडल की दीदियां

 ज्योति रानी 

आजीविका मिशन की महिला सखी मंडलों से जुड़ कर झारखंड की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर होने लगी हैं. सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेकर सखी मंडल की महिलाओं की जिंदगी बदल रही है. सबसे बड़ी बात है कि इन योजनाओं का लाभ सीधे तौर पर उन लाभुकों को मिल रहा है, जो इसकी असली हकदार हैं. सखी मंडल की दीदियां राज्यभर में काम कर रही हैं. स्वच्छ भारत मिशन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है. इसके तहत रानी मिस्त्री के रूप में सखी मंडल की दीदियां शौचालय निर्माण में बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी निभा रही हैं.

ग्रामीण महिलाएं बनीं रानी मिस्त्री
आपने राज मिस्त्री का नाम सुना होगा. उन्हें निर्माण कार्य करते देखा होगा, लेकिन कभी महिलाओं को मिस्त्री का काम करते देखा है ? शायद नहीं, लेकिन झारखंड की हरफनमौला महिलाओं ने अपनी जिंदगी में एक नया फन जोड़ लिया शौचालय निर्माण करने का यानी बन गयी हैं रानी मिस्त्री. ये स्वच्छ भारत मिशन के तहत बखूबी शौचालय का निर्माण कर रही हैं. जेएसएलपीएस ने ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण देकर हुनरमंद बनाया है. स्वस्थ और सुरक्षित भारत के सपने को इन ग्रामीण महिलाओं के जज्बे से मजबूती मिली. कोमल हाथ मजबूत इरादों को नहीं रोक पाये और रानी मिस्त्री आज स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत की वाहक बन गयी हैं. स्वच्छ भारत मिशन के तहत हो रहे शौचालय निर्माण में महिलाएं खुद रानी मिस्त्री का काम कर रही हैं. इससे उन्हें अपने गांव में रोजगार मिल रहा है और पलायन भी रुक रहा है.

गुणवत्ता का विशेष ख्याल
महिलाओं को स्वच्छ भारत मिशन से जोड़ने से काम में तेजी आ गयी है. साथ ही कार्य में पारदर्शिता भी आयी है. बिचौलियों पर अंकुश लगा है. अब शौचालय निर्माण में कोताही नहीं बरती जा रही है. इन शौचालय के निर्माण कार्य में गुणवत्ता का भी काफी ख्याल रखा जा रहा है. सखी मंडल की महिलाएं जहां घर-घर जाकर खुले में शौच से होनेवाले नुकसान को बताती हैं, वहीं इससे होनेवोल फायदे को भी बता रही हैं. इसका असर भी गांवों में दिखने लगा है.

गांव स्तर पर सखी मंडल की भूमिका
- शौचालयों के निर्माण और साप्ताहिक बैठकों के दौरान इसकी आवश्यकता के बारे में चर्चा करना
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इसकी गुणवत्ता के साथ-साथ शौचालय निर्माण और गति के स्तर पर नजर रखने के लिए कच्चा माल खरीदने की जिम्मेदारी वितरित करना
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सफल निर्माण के बाद वे यह भी सुनिश्चित कर रही हैं कि शौचालयों का प्रयोग स्वच्छता दीदी की सहायता से किया जा रहा है

शौचालय निर्माण में मिलती है 12 हजार रुपये की सहायता राशि
शौचालय का उपयोग करने के लिए घरों में शौचालय का होना आवश्यक है. इसके लिए ग्रामीणों को सरकार की तरफ से 12 हजार रुपये की सहयोग राशि दी जाती है. केंद्र सरकार की यह पहली ऐसी योजना है, जिसमें सहायता राशि कार्य शुरू होने से पहले दी जा रही है.

प्रधानमंत्री ने की दीदियों के कार्य की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में झारखंड की सखी मंडलों के जरिये शौचालय निर्माण कार्य की तारीफ की. इसका मुख्य कारण शौचालय निर्माण, उपयोग और ग्रामीणों में जागरूकता लाने में सखी मंडल की दीदियों की विशेष पहल है, जो वाकई काबिले तारीफ है. हजारों की संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने मेसन का प्रशिक्षण लिया है. गांव की महिलाएं अपने संगठन के जरिये शौचालय निर्माण कराकर अच्छी आमदनी कर रही हैं और ठेकेदारों पर नकेल कस रही हैं.

महिलाओं का बढ़ा आत्मबल : गायत्री देवी
गीतांजलि सखी मंडल की अध्यक्ष गायत्री देवी बताती हैं कि पहले इस काम को करने की हिम्मत महिलाओं में नहीं थी, पर प्रशिक्षण के बाद महिलाओं का आत्मबल बढ़ा है. अब वे अच्छे से अपना काम कर पा रही हैं. उन्हें अच्छी आमदनी भी हो रही है और पलायन में कमी भी आ रही है.

केस स्टडी
1.
आजीविका ने दिया सहारा : मोइलिन
सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड अंतर्गत कोनमुरैला पंचायत के बुंदुपानी की रहनेवाली मोइलिन और कोलमडेगा गांव की रहनेवाली ऐशरती लुगुग रानी मिस्त्री का काम कर रही हैं. साल 2016 में मोइलन रोज सखी मंडल और ऐशरती लुगुग रोशनी सखी मंडल से जुड़ीं. 32 वर्षीय मोइलन सखी मंडल के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले मेरा कोई सहारा नहीं था, पर अब मुझे सहारा मिल गया है. जेएसएलपीएस ने मुझे सहारा दिया और आज मैं खड़ी हो गयी हूं. सखी मंडल मेरी निराशा भरी जिंदगी में एक आशा की किरण की तरह आयी है. कहती हैं कि जलडेगा से करीब 15 किलोमीटर दूर सेमरिया गांव पहुंचने के लिए कम से कम चार-पांच किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. उन्होंने उस गांव में जाकर शौचालय का निर्माण किया है. जिसकी सराहना भी की गई है और महिला दिवस के अवसर पर उन्हें सरकार द्वारा सम्मानित भी किया गया है.

2. काम से खुद को किया साबित : ऐशरती
रानी मिस्त्री का अनुभव बताते हुए ऐशरती कहती हैं कि पहले इस काम पर पुरुष काफी हंसते थे, लेकिन उन्होंने काम से खुद को साबित किया. अब उनके इस काम पर कोई नहीं हंसता. इस काम से उन्हें काफी खुशी मिलती है. कहती हैं कि जलडेगा से करीब 15 किलोमीटर दूर सेमरिया गांव पहुंचने के लिए कम से कम चार-पांच किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. उस गांव में जाकर भी शौचालय निर्माण कर चुकी हैं. रानी मिस्त्री के कार्य की सराहना हो रही है. महिला दिवस के अवसर पर उन्हें सरकार द्वारा सम्मानित भी किया गया है.

दोनों रानी मिस्त्री ने किये 26 शौचालय का निर्माण
जेएसएलपीएस की ओर से उन्हें रानी मिस्त्री का प्रशिक्षण दिलाया गया. राज्य सरकार द्वारा उन्हें काम करने के लिए औजार दिये गये. हर शौचालय निर्माण के लिए राज्य सरकार द्वारा 2100 रुपये दिये जाते हैं, जिसे रानी मिस्त्री आपस में बराबर बांटती हैं. औसतन दो रानी मिस्त्री मिल कर एक शौचालय का निर्माण तीन दिन में करती हैं. मोइलिन और ऐशरती ने मिलकर कुल 26 शौचालय बनाये हैं, जिसमें से नौ अपने ही गांव में और शेष 17 शौचालयों का निर्माण दूसरे गांवों में किया है. दो महीने में उन्होंने तकरीबन 25 हजार रुपये की कमाई की हैं. रानी मिस्त्रियां न सिर्फ शौचालय बनाती हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती हैं कि लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं. शौचालय का इस्तेमाल नहीं करने की स्थिति में उससे होनेवाले नुकसान के बारे में भी रानी मिस्त्री लोगों को बताती हैं.