aadhi aabadi

  • Dec 14 2019 12:39PM

हुनर से जीवन का अंधियारा दूर करतीं ग्रामीण महिलाएं

हुनर से जीवन का अंधियारा दूर करतीं ग्रामीण महिलाएं

पंचायतनामा टीम 

राजधानी रांची के ओरमांझी प्रखंड अंतर्गत हुटूप गांव की महिलाएं अपने हुनर से कई घरों का अंधियारा दूर कर रही हैं. इसके साथ ही अपने जीवन में कामयाबी और सुकून की रोशनी भी भर रही हैं. लिटर ऑफ लाइट के बैनर तले महिलाएं सोलर लाइट का निर्माण कर रही हैं. बेहतर रोजगार से इन्हें अच्छी आमदनी हो रही है. जिससे इनके जीवन में खुशहाली आ रही है. इनके बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं. यह सब रांची जिला प्रशासन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के साझा प्रयास से संभव हुआ है. प्रशिक्षण के जरिये महिलाओं को इंजीनियर बना दिया गया है, जो बड़ी ही आसानी से अपना काम कर रही हैं. आजीविका से जुड़े हुटूप ग्राम संगठन की इन महिलाओं को इसके लिए रांची और ओरमांझी में प्रशिक्षण दिया गया. तीन महीने की थ्योरी की पढ़ाई रांची में हुई और प्रैक्टिकल ओरमांझी में ही हुआ, जहां महिलाएं फिलहाल सोलर लाइट बना रही हैं. केंद्र में कुल 15 महिलाएं सोलर लाइट बना रही हैं.

हुटूप गांव में आ रही समृद्धि

सोलर लाइट बनानेवाली महिलाएं बताती हैं कि एक वक्त ऐसा था जब उन्हें पैसे की जरूरत पड़ने पर किसी और के आगे हाथ फैलाने पड़ते थे. गांव में भी लोग आर्थिक परेशानी से जूझ रहे थे. अब गांव में बदलाव आ रहा है. महिलाएं प्रतिमाह पैसे कमा रही हैं, जिससे उनके रहन-सहन में बदलाव आया है. घर में सुख-सुविधाएं बढ़ी हैं.

सभी इच्छुक महिलाओं का हुआ चयन

जब महिलाओं के लिए जिला प्रशासन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की ओर से प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी, तब हुटूप गांव की महिलाओं ने ग्राम संगठन की बैठक आयोजित की. बैठक में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बारे में पूछा गया. समूह से जुड़ी 27 महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त करने की इच्छा जतायी, उन्हें रांची में थ्योरी का प्रशिक्षण दिया गया. इसके बाद 15 महिलाओं को ओरमांझी में प्रैक्टिकल कराया गया. 11 जून, 2019 को ओरमांझी में मॉडल प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया गया.

टाटा से 20 हजार लाइट का ऑर्डर

लाइट बनाने के बाद महिलाओं को बाजार की समस्या नहीं होती है, क्योंकि महिलाएं इन लाइट को दिल्ली में आयोजित मेले में भी बेचती हैं. इसके अलावा सिविल कोर्ट में भी दुकान लगा कर महिलाएं लाइट बेचती हैं. इतना ही नहीं, अब तो टाटा कंपनी की ओर से 20 हजार लाइट बनाने का ऑर्डर मिला है. एक दिन में एक महिला 30 लाइट बना लेती हैं. इसके बदले महिलाओं को 311 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पारिश्रमिक मिलता है. लाइट बनाने के लिए पूरा सामान हिंदुस्तान पेट्रोलियम की ओर से दिया गया है. लाइट में लगने वाली सारी सामग्री बाहर से मंगायी जाती है. लाइट का कवर जिसे जीसीबी मोल्ड कहा जाता है, उसे बीआइटी में बनाने की तैयारी चल रही है.

लाइट में लगने वाली वस्तुएं

 पांच एलइडी बल्ब

 एक कैपेसिटर

 एक ट्रांजिस्टर

 दो डायोड

सोलर लाइट निर्माण से बदली जिंदगी : मंजू देवी

सोलर लाइट बनानेवाली मंजू देवी बताती हैं कि सोलर लाइट बनाना सीखने के बाद उनकी जिंदगी में बहुत बदलाव आ रहा है. महीने में मानदेय मिलता है, जिससे उनके घर की आर्थिक समस्या काफी हद तक दूर हो गयी है. अब बच्चे भी अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं. सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक केंद्र में आकर काम करती हैं.

इंजीनियर बनने जैसा है यह अनुभव : सुहानी देवी

सुहानी देवी बताती हैं कि लाइट बनाने के काम में जुटीं अधिकतर महिलाओं ने कॉलेज का मुंह तक नहीं देखा है, लेकिन प्रशिक्षण मिलने के बाद अब इंजीनियर की तरह काम कर रही हैं. पहले घर में रहती थीं. खेती-बारी करती थीं. अब हर दिन ऑफिस जाती हैं. बच्चों की स्कूल फीस समय से जमा कर देती हैं. बच्चों की छोटी-मोटी जरूरतों को भी खुद से पूरा कर लेती हैं.

पहले घर में बल्ब लगाना भी नहीं आता था : बिलास देवी

बिलास देवी कहती हैं कि पहले घर में बल्ब फ्यूज होने पर उसे बदलने के लिए दूसरे का सहारा लेना पड़ता था. अब इस काम को करने के बाद ऐसी समस्या नहीं आती है. अब एलइडी बल्ब खराब होने पर खुद से बना भी लेती हैं. अब इतना आत्मविश्वास आ गया है कि घर के टीवी, पंखे और रेडियो भी बना सकती हूं.