aadhi aabadi

  • Dec 14 2019 12:56PM

अपने हुनर से आत्मनिर्भर बनतीं ग्रामीण महिलाएं

अपने हुनर से आत्मनिर्भर बनतीं ग्रामीण महिलाएं

रवींद्र यादव

पश्चिमी जिला अंतर्गत नोवामुंडी प्रखंड की सैंकड़ों महिलाएं अपने हुनर से आत्मनिर्भर बन रही हैं. इससे न सिर्फ ग्रामीण महिलाओं में आर्थिक बदलाव आने लगा है, बल्कि सैंकड़ों ग्रामीण महिलाएं, जो पूंजी व हुनर के अभाव में गरीबी में जिंदगी जी रही थीं, उन महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाकर प्रशिक्षण दिया गया. अब प्रशिक्षण प्राप्त करनेवाली महिलाओं को संस्थागत जरूरत के अनुसार लोन मुहैया कराया गया है. महिलाएं अपने हुनर व मेहनत की बदौलत आर्थिक बदलाव ला रही हैं.

द्रोपदी सामड की अहम भूमिका

चेहरे पर मुस्कान साफ झलकती है. इससे महिला समूह की सैंकड़ों सदस्य लाभान्वित हुई हैं. महिलाओं को स्वनियोजन से आत्मनिर्भर बनाने में द्रोपदी सामड की महत्वपूर्ण भूमिका है. इनके नेतृत्व में बनी टीम महिलाओं को व्यवसाय के माध्यम से आगे बढ़ने की हर जानकारी दे रही है.

मां दुर्गा आजीविका स्वयं सहायता समूह

शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आत्मनिर्भर बन अपना व्यवसाय तथा कृषि कार्य बखूबी कर रही हैं. शहरी क्षेत्र में मां दुर्गा आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिला सदस्य बालीझरण कैंप में ही रहती हैं. महिला समूह से जुड़ने के बाद सिलाई मशीन लेकर पिक्को व साड़ी फॉल लगाने का काम करती हैं. इससे उन्हें आमदनी हो रही है, जिससे परिवार को आर्थिक मजबूती मिल रही है.

सफल ग्रामीण महिलाओं के विचार

1. समूह से लोन लेकर ब्यूटी पार्लर का व्यवसाय शुरू की. पिछले एक साल से ब्यूटी पार्लर अच्छी तरह चल रहा है. इससे वह आत्मनिर्भर बन गयी हैं.

रेणु कच्छप, महिला सदस्य

2. पहले आर्थिक स्थिति खराब थी. समूह से जुड़ने और इसके माध्यम से लोन लेकर सिलाई मशीन खरीदी. इससे सिलाई-कढ़ाई कर आज आत्मनिर्भर बन गयी हैं.

पायल कारुआ, महिला सदस्य